टू व्हीलर पर प्रेमी पंछी नहीं कर सकेंगे सैर सपाटा
ऐसे तो कई सड़क हादसे देखे होगे और सुना भी होगा की कही पर बड़ा सड़क हादसा हो गया है इन सब पर सरकार ने कई कानून बनाए है
और नियंत्रण भी रखा है लेकिन अब सड़क हादसे को ध्यान में रखकर कर्नाटक सरकार चाहती है
कि अब लोग अपने टूव्हीलर पर दूसरी सवारी न बैठाएं. साथ ही कुछ कंपनियां भी ऐसी गाड़ी बनाएं जिसमें सिर्फ एक सीट हो.
कर्नाटक सरकार ने ये नियम 100 CC से कम पावर वाले दुपहिया वाहनों के लिए लागू किया जा सकता है.
वाहन निर्माता कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी बाइकों या स्कूटर पर केवल एक ही व्यक्ति के बैठने की व्यवस्था हो.
कर्नाटक के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने यह फैसला पिछली सीट पर बैठने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए लिया गया है.
जो अक्सर ऐक्सिडेंट के शिकार हो जाते हैं. कर्नाटक सरकार ने सड़क पर एक्सीडेंट को रोकने के लिए हाई कोर्ट में एफिडेविट दाखिल भी किया है
और जल्द ही वो एक आधिकारिक सर्कुलर जारी करके अपनी बात की पुष्टि भी कर देगी.
सरकार के इस फैसले से राज्य में सड़क हादसों में नियंत्रण रहेगा या नहीं.
मगर इससे एक बात तो साफ है कि लोगों को सड़क, सुचारू ट्रैफिक देने में नाकाम सरकार ने इस तरीके से खूबसूरती से अपना पल्ला झाड़ लिया है और लोगों को बता दिया है
कि उनके एक्सीडेंट सिर्फ इसलिए होते हैं क्योंकि गाड़ी में एक से ज्यादा लोग बैठे रहते है और सीट बड़ी रहती हैं.
कर्नाटक सरकार ने अपने फरमान से कोर्ट के अलावा जनता तक को यह बता दिया कि, लीजिये साहब हमनें सांप भी मार दिया है और हमारी लाठी भी नहीं टूटी.
आम भारतीय होने से ज्यादा मुझे राज्य सरकार के इस फैसले पर हैरानी से ज्यादा हंसी आ रही है.
क्योकि हंसी का कारण बस इतना है कि जैसे मुझे गणित न आने के चलते मैंने यह स्वीकार कर लिया कि मैं इंजीनियर नहीं बन सकता.
वैसे ही अच्छी सड़क और सुचारू ट्रैफिक व्यवस्था देने में नाकाम सरकार अपनी कमी क्यों नहीं स्वीकार कर पाई.
अगर सरकार अपनी यह कमी स्वीकार कर लेती तो शायद हमें आज ये अजीबो-गरीब साफरमान सुनने को नहीं मिलता और न ही मैं ये याद करता कि, काश मैंने मैथ ढंग से पढ़ी होती तो मैं आज इंजीनियर होता.


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