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पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों से होता है ऐसा, इस शख्स ने बताया वहां का सच


ये भावुक करने वाली स्टोरी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जकोबाबाद जिले के 66 साल के ट्रांसपोर्टर कारोबारी प्रीतमदास की है। वे अब इंडियन नागरिक बनकर खुश हैं। 1996 में इंडिया आए प्रीतमदास के परिवार को काफी स्ट्रगल के बाद इंडिया की नागरिकता मिलने की प्रोसेस पूरी हो गई। सेंट्रल होम मिनिस्टरी की रिपोर्ट भी ओके है।

 हाल ही में उनकी 36 साल की बेटी गीता और 39 साल की कविता काे नागरिकता देने की प्रोसेस पूरी हो गई। कविता बताती हैं कि 11वीं तक की पढ़ाई पाकिस्तान में ही हुई। प्राइवेट स्कूल में उन्हें बुर्का पहनकर जाना पड़ता है। बिना बुर्का पहने घर से बाहर निकलना भी मुश्किल है।

-प्रीतमदास मुताबिक,पाकिस्तान में राइस मिल और जमा-जमाया कारोबार था। 20 एकड़ जमीन थी। इलाके में पहले माहौल खराब नहीं था, इसलिए बंटवारे के बाद भी वहां बने रहे, लेकिन अब वहां हिंदू लड़कियों को जबरन उठा लिया जाता है।

- बच्चों का किडनैप कर फिरौती मांगी जाती है। उनकी दो बेटी हैं। बहुत फिक्र होती थी। पड़ोसियों के साथ कुछ ऐसे वाकये हुए कि मन विचलित हो गया, इसलिए सब छाेड़कर इंडिया आ गए। ओल्ड सुभाष नगर में ट्रांसपोर्ट का काम शुरू किया।

इंद्रविहार कॉलोनी के रहने वाले परमानंद मेघानी 5 भाई और मां भगवती बाई के साथ 1979 में पाक के जाकोबाबाद जिले से इंडिया आए थे। पिता की मौत पाक में ही हो गई थी।

- वहां हो रहे जुल्म को देखकर मां ने इंडिया आने का फैसला किया। रिश्तेदारों से संपर्क किया। 31 मार्च 1995 को मां की मौत हो गई। इंडिया में 36 साल हो चुके थे। कुछ दिन पहले ही नागरिकता मिली है।

- सिंध प्रांत से आकर भोपाल में बसे 520 परिवार नागरिकता के लिए भटक रहे हैं। इनमें से कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिन्हें बिना नागरिकता प्रमाणपत्र मिले भोपाल में रहते हुए 30 साल बीत चुके हैं।

पिछले साल केंद्र सरकार ने इंडियन सिटीजनशिप एक्ट 1955 में किए गए नए संशोधन के बाद 31 दिसंबर 2014 तक इंडियाआकर बसे पाकिस्तानी व बांग्लादेशी हिंदुओं को इंडियाकी नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान कर दिया है।

- बदले हुए कानून को इंडियन सिटीजनशिप (अमेंडमेंट) एक्ट 2015 नाम दिया गया है। इससे पहले दिसंबर 2009 तक इंडियाआए पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों को नागरिकता दिए जाने का प्रावधान था।