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भयानक हादसे में जिंदा बच गई लड़की, कहा- बुआ ने नहीं मानी थी बात




जयपुर से बाड़मेर आ रही रोडवेज बस में लगी आग में जान गंवाने वाली रेखा की भतीजी भी उनके साथ में थी, वो जिंदा बच गई। भतीजी ने बताया कि जयपुर से रवाना हुए तब आने से मना किया था, लेकिन वे नहीं मानीं। घर पर काम होने की बात कहकर वे बस में रवाना हो गए, अगर बात मान लेते तो शायद बुआ जिंदा बच जाती। महिला रेखा के पति अजीतसिंह बायतु कोसरिया के एक स्कूल में अध्यापक हैं।



- जयपुर से बाड़मेर के बीच चलने वाली रोडवेज की स्लीपर बस में रविवार सुबह पांच बजे बालोतरा से निकलते ही खेड़ गांव के पास आग लग गई। बस के पिछले हिस्से से धुंआ निकलने लगा।


- इस पर परिचालक की सूचना पर चालक ने बस को तुरंत रोका। तेरह यात्रियों को बस से सुरक्षित निकाल लिया,लेकिन स्लीपर में सो रही एक मां-बेटी भीषण आग की चपेट में आ गई और आग तेज होने के कारण निकाला नहीं जा सका।


- बस में नागौर के थांवला गांव की ढाई साल की काव्या व उसकी मां रेखा  पत्नी अजीतसिंह जिंदा जल गई। घटना के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग को बुझाया गया।

- आग लगने के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बताया जा रहा है कि एक स्लीपर में सो रहे दो युवकों ने सिगरेट जलाई और उसके बाद आग लग गई। हादसे में बस जलकर राख हो गई है।


- बस चालक भवानीसिंह व कंडक्टर जसवंत जाणी ने बहादूरी दिखाते हुए 13 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। बस में आग के कारण फैले धुएं के कारण दोनों बेहोश भी हुए,लेकिन इन्होंने बस में सवार तेरह यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना की सूचना मिलते ही आला अफसर और पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचे।



- रोडवेज की स्लीपर कोच बस में दो युवक सवार थे। रवानगी के बाद उन्हाेंने कई बार सिगरेट जलाई। अजमेर में बस के रुकने पर परिचालक ने युवकों को धुम्रपान करने से मना किया। बाद में जोधपुर में बस रुकी तो और धुम्रपान करने लगे। वे बस में भी सिगरेट जला रहे थे।


- सुबह करीब 4.30 बजे बालोतरा प्रथम रेलवे फाटक के समीप स्टैंड पर बस रुकी। इस दरम्यान चाय पीने के बाद कई यात्री बस में सवार हो गए। इन्हीं युवकों ने फिर से सिगरेट जलाई। संभवत: सिगरेट बुझाने के दौरान सीट में लगा फोम झुलस गया और इसके बाद आग फैल गई।


गहरी नींद में थे यात्री, धुएं में दम घुटने के बावजूद शीशे खोलकर बाहर निकले


- बस के कंडक्टर जसवंत कुमार ने बताया कि जयपुर से शनिवार शाम 7 बजे बस रवाना हुई थी। बालोतरा में सुबह 4.30 बजे स्टॉपेज था, इसके बाद बस रवाना होकर 7 किमी. दूर खेड़ पहुंची थी। सुबह के करीब 5 बजे थे।


- बस के पिछले हिस्से से धुंआ उठते हुए दिखाई दिया। बस को तुरंत रूकवाया। सीटों पर सवारियां कम थी, रात का समय होने से 13 सवारियां ही थी, अधिकांश यात्री स्लीपर में ऊपर साे रहे थे।


- सर्दी का मौसम होने से शीशे बंद थे, बस में धुएं से घुटन होने लगी। इसके बावजूद बस में शीशे खोल कर एक-एक यात्री को स्लीपर से खींच-खींच कर बाहर निकाला।


- धुंआ इतना था कि बस में 2 मिनट से ज्यादा रुक नहीं पा रहा था। सवारी को नीचे उतार सांस लेकर ४,5 बार बस में चढ़कर सवारियों को सुरक्षित निकाला।


- पीछे के स्लीपर में एक महिला और एक मासूम सो रही थी, धुएं से बेहोश हो गई। हालांकि इनके साथ सो रही महिला की भतीजी को बचा लिया। मां-बेटी को बचाने के लिए खूब प्रयास किए, लेकिन इस बीच आग तेज हो गई। मेरा हाथ भी जल गया, बाल भी जल गए।


- आग और धुएं में कूद महिला को बचाने का प्रयास किया, महिला के कपड़े हाथ में आ गए थे, लेकिन स्लीपर से महिला को बाहर नहीं निकाल सका। इस बीच धुएं से मैं खुद भी बेहोश हो गया। पीछे से आ रहे एक ट्रक का चालक शॉल ओढ़कर बस में घुसा और मुझे घसीट कर बाहर निकाला,बाहर आने के बाद होश आया।


- बस का मुख्य गेट आगे था, ऐसे में पीछे के हिस्से तक पहुंचना और बाहर निकाल पाना मुश्किल रहा। शीशे बंद होने से अंदर धुंआ भर गया।