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डॉक्टरों ने रचा इतिहास, अधजन्मे बच्चे की जान की खातिर कर डाला ये असंभव काम


कहते हैं डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं. कई बार ये डॉक्टर अपनी सूझ बुझ से ऐसे हैरतअंगेज कारनामे करते हैं कि मौत के मुंह में फंसे इंसान को भी जिन्दा बाहर ले आते हैं. ऐसा ही एक कारनामा दिल्ली के बीएलके हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कर दिखाया हैं. दरअसल यहाँ के डॉक्टर्स के पास गर्भ में पल रहे शिशु के गले में ट्यूमर का एक बेहद मुश्किल केस आया था. इस तरह के मामले को सफलतापूर्वक करना दुनियांभर के डॉक्टर्स के लिए एक चेलेंजिंग टास्क होता हैं. लेकिन बीएलके हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने ना सिर्फ इस चेलेंज को ख़ुशी ख़ुशी लिया बल्कि इसे सफलता से अंजाम देते हुए पूरी दुनियां को हैरत में डाल दिया. आइए विस्तार से जाने क्या हैं पूरा मामला…

दरअसल बिहार में रहने वाली एक गर्भवती महिला जब डॉक्टर के पास अल्ट्रासाउंड के लिए गई तो उसे कुछ ऐसा पता चला जिसे सुन उसके खुशहाल जीवन पर दुखो के पहाड़ टूट पड़े. डॉक्टर ने उसे बताया कि उसके गर्भ में पल रहे शिशु के गले में एक बड़ा ट्यूमर हैं. यह ट्यूमर गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए जानलेवा बन गया था. ट्यूमर आकार में इतना बड़ा था कि उसकी वजह से बच्चे की सांस की नली दब रही थी और उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. यही वजह थी कि इसका इलाज तुरंत कराना बेहद जरूरी था. चुकी ये इलाज काफी मुश्किलों से भरा था इसलिए दंपत्ति को दिल्ली के करोल बाग़ के बीएल कपूर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में रेफर किया गया.

पीड़ित महिला 36वें सप्ताह से गर्भ से थी. ऐसी स्थिति में किसी भी बच्चे को बाहर निकाल सिर्फ 20 से 25 सेकण्ड के अन्दर ऑक्सीजन ट्यूब डालनी होती हैं लेकिन इस केस में ये करना मुमकिन नहीं था. इसलिए डॉक्टर्स ने एक बेहद मुश्किल निर्णय लिया. उन्होंने बच्चे को माँ के गर्भ से आधा बाहर निकाला. इस तरह उसे तुरंत ऑक्सीजन ट्यूब देने की आवश्यकता नहीं पड़ी क्योंकि उसे गर्भनाल के जरिए ऑक्सीजन मिल रहा था. इस बात का फायदा उठाते हुए डॉक्टर्स ने 1:30 मिनट के अन्दर बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए कृत्रिम ट्यूब डाल दी और बाद में गर्भनाल को अलग कर दिया. इस तरह बच्चे को वेंटीलेटर सपोर्ट मिला और डॉक्टरों का देर तक बच्चे के ट्यूमर का इलाज कर पाना संभव हुआ. अस्पताल के डॉक्टर्स का दावा हैं कि इस प्रकार का सफल ऑपरेशन चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में पहली बार किया गया हैं.