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गैंगरेप के बाद यहां कपड़े लेने गए थे आरोपी, फिर चारों ने लड़की किया से रेप


छात्रा हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही कि अब तो मुझे जाने दो। लेकिन दरिंदे नहीं माने।

पीएससी की तैयारी कर रही छात्रा के सामने उस दिन सबसे पहले गोलू और अमर ही आए। संघर्ष हुआ। दोनों ने उसके साथ ज्यादती की। तब वह इस हालत में नहीं थी कि भाग सके। पौन घंटा बीत गया था। छात्रा हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही कि अब तो मुझे जाने दो। कपड़े फट चुके थे। गोलू उसे वहीं अमर की निगरानी में छोड़कर कपड़ों के इंतजाम के लिए निकला। नाले के रास्ते करीब 50 मीटर चलकर एक झुग्गी में पहुंचा। यह झुग्गी आरोपी राजेश और राजू उर्फ राजेश उर्फ रमेश की है। वे दोनों वहीं थे। गोलू ने उनसे एक जोड़ी कपड़े मांगे। राजेश और राजू ने पूछा-कपड़े क्यों चाहिए? गोलू ने लड़की की मौजूदगी की जानकारी के साथ पूरा वाकया बताया।

वे दोनों भी गोलू के साथ घटनास्थल तक साथ आ गए। कपड़े देने के पहले राजेश अौर राजू ने भी ज्यादती की। वारदात के बाद चारों बेसुध छात्रा के पास कपड़े फेंककर भाग गए। उन्हें लगा था कि वह मर चुकी है। जीआरपी हबीबगंज की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उस दिन हुआ क्या था। छात्रा वही कपड़े पहनकर आरपीएफ थाने पहुंची थी। जीआरपी ने फटे हुए कपड़े और बाद में पहने हुए कपड़े जब्त कर लिए हैं। इधर एसआरपी अनीता मालवीय का वीडियो सामने आया, जिसमें वे इस केस के बारे में बात करते हुए ठहाके लगा रही हैं। जब इस गैरगंभीर रवैए पर बातचीत करनी चाही तो फोन रिसीव नहीं किया।
राजेश नाम का तीसरा आरोपी जेल में है। वह हबीबगंज रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-5 के पास झाड़ियों के बीच एक झुग्गी में रहता है, जो सांची दुग्ध संघ के पिछले हिस्से में है। उसकी झुग्गी दुग्ध संघ की बाउंड्री वॉल और रेलवे ट्रैक के बीच नाले के पास एक छोटे से हिस्से में है। घनी झाड़ियों और संकरी पगडंडियों के बीच यह बहुत ही दुर्गम सी जगह है, जहां कोई आसानी से नहीं जा सकता। यहां शायद ही कभी रेलवे पुलिस ने ताकझांक की हो। रेल प्रशासन ने भी कभी इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए कुछ नहीं किया। अपराधियों के लिए यह बड़ी सुरक्षित पनाहगाह है। रेलवे पीआरओ आईए सिद्दीकी कहते हैं-वहां कोई झुग्गी है ही नहीं। हो ही नहीं सकती। भास्कर ने उन्हें तस्वीरें भेजी हैं। स्थानीय निवासी रामकुमार तिवारी ने भास्कर को बताया कि राजेश 6 महीने पहले ही रहने आया। वह मिस्त्री का काम करता है। वह अकेला रह रहा था। ज्यादा बात नहीं करता। राजेश और राम कुमार के अलावा वहां कोई नहीं रहता। सवाल है कि जब राजेश यहां अकेला था तो उसकी झुग्गी में महिला के कपड़े कहां से आए, जो बाद में पीड़ित छात्रा को दिए गए?
आम लोगों को पुलिस थाने से लेकर सभी अफसरों के नंबर सार्वजनिक किए गए हैं, लेकिन घटना के बाद से ही सभी इस मामले में बोलने से बच रहे हैं। जीआरपी में एएसपी से लेकर एसआरपी तक कोई फोन रिसीव नहीं कर रहे, तो भोपाल जिला पुलिस के अफसर भी फोन पर इस विषय पर बात करने से बच रहे हैं।
मामले में पीड़िता के साथ मौके पर जाने से लेकर बयान लेने तक की कार्रवाई हबीबगंज पुलिस ने की। टीआई हबीबगंज रविंद्र यादव ने ही मौके पर पहुंचकर जीआरपी को सूचना दी, लेकिन फिर मामला सीमा विवाद में उलझ गया। वे नियमानुसार ही काम कर रहे थे, लेकिन फिर कानूनी उलझनों में उलझ गए। इसका जिक्र मामले की जांच कर रहे एसआईटी के अधिकारी ने शुक्रवार दोपहर तक अपनी रिपोर्ट में किया। दोपहर तक टीआई को इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रशंसा पत्र मिलने वाला था। इसके लिए जांच अधिकारी डीजीपी से अनुशंसा करने की बात कर रहे थे। लेकिन उनके अनुशंसा करने के पहले ही एमपी नगर और हबीबगंज जीआरपी टीआई के साथ-साथ हबीबगंज पुलिस थाने के टीआई रविंद्र यादव को हटा दिया गया।
हमें कुछ अपडेट मिले हैं, दबिश दी है
मामले की जांच कर रहे हैं। फरार आरोपी के बारे में कुछ अहम जानकारियां मिली हैं। कई ठिकानों पर दबिश दी है।