ये है 2 हजार साल पुराना शनि मंदिर, यहां शिव के रूप में होती है शनि की पूजा
उज्जैन के त्रिवेणी संगम पर 2 हजार साल पुराना देश का पहला नवग्रह शनि मंदिर है। ये संभवतः देश का एकमात्र मंदिर है जहां शनिदेव भगवान शिव के रूप में विराजित है। शनि अमावस्या को देशभर के श्रद्धालु शिव रूप में शनिदेव को तेल चढ़ाकर प्रसन्न कर रहे हैं। मंदिर प्रबंधन का अनुमान है कि दिनभर में पांच क्विंटल से ज्यादा तेल चढ़ाया जाएगा। तेल इकट्ठा करने के लिए मंदिर में कई टंकिया लगाई गई हैं।
- मंदिर के पुजारी पंडित राकेश बैरागी ने बताया इस मंदिर की स्थापना उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने की थी। इस मंदिर के साथ विश्व के सबसे वैज्ञानिक कैलेण्डर विक्रम संवत का इतिहास भी जुड़ा है। राजा विक्रमादित्य ने मंदिर बनाने के बाद यही से विक्रम संवत की शुरुआत की थी।
- वर्त्तमान में 2074 वां विक्रम संवत चल रहा है। इस लिहाज से ये मंदिर भी इतना ही पुराना है। पंडित बैरागी बताते है कि यह देश का पहला ऐसा मंदिर भी है जहां शिव के रूप में शनि विराजित है लोग अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए यहां तेल चढ़ाते हैं। लोगों को आसानी से दर्शन हो सकें इसलिए मंदिर के बाहर एलईडी डिस्प्ले की व्यवस्था भी की गई है।
- मंदिर प्रबंध समिति के प्रबंधक नरेंद्र बोरीवाल के मुताबिक़ शनि अम्वास्या को श्रद्धालु करीब 5 क्विंटल तेल चढाएंगे, इस तेल को इकट्ठा करने के लिए मंदिर परिसर में कई टंकियां लगाई गई है।अमावस के बाद रविवार को इस तेल की नीलामी की जाएगी।
- क्षिप्रा किनारे बसे इस मंदिर में दर्शन और स्नान के लिए शुक्रवार शाम से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी। लोगों ने रात 12 बजे से फव्वारों में स्नान शुरू कर दिया था, लेकिन मुख्य स्नान सूर्योदय के बाद अमावस्या पर्व काल में ही शुरू हुआ।

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