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बापू को मारने से पहले खाई थी मूंगफली, माली ने गोडसे पर किया था हमला




 आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि बापू की हत्या के दिन नाथूराम गोडसे ने क्या-क्या किया था। बापू को गोली मारने के बाद वहां मौजूद एक माली ने अपने खुरपे से नाथूराम के सिर पर वार किया जिससे उसके सिर से खून निकलने लगा था।


30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी। हत्या करने से एक दिन पहले नाथूराम ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अपने मित्र नारायण आप्टे और विष्णु करकरे के साथ वेटिंग रूप में रात गुजारी।


- उसने सुबह उठते ही आप्टे से कहा कि उसे मूंगफली खाने का मन कर रहा है। आप्टे गोडसे के लिए मूंगफली खरीदने के लिए स्टेशन से बाहर तक गए।


- आप्टे थोड़ी देर बाद आकर बोले कि मूंगफली कहीं नहीं मिल रही है, कहो तो काजू या बादाम ला दूं?
- गोडसे ने कहा, "उनकी तो सिर्फ मूंगफली खाने का मन हो रहा है।" इसके बाद आप्टे फिर बाहर निकले और इस बार वो मूंगफली लेकर ही लौटे।


- गोडसे ने खुश होकर मूंगफली खाई। तभी आप्टे ने कहा, "अब चलने का समय हो गया है।"


नाथूराम गोडसे और उनके साथी करीब सवा चार बजे स्टेशन से तांगे से कनॉट प्लेस के लिए निकले।
- वहां से फिर उन्होंने दूसरा तांगा किया और बिड़ला हाउस से दो सौ गज पहले उतर गए।


- यहां से पैदल ही बिड़ला हाउस गए। इधर गांधीजी को इस दिन प्रार्थना सभा में पहुंचने में दस मिनट की देर हो गई।


- जब उन्हें याद दिलाया गया तो वह जाने के लिए खड़े हो गए। गांधीजी ने चप्पल पहनी और सभास्थल की ओर चल दिए।


 इस दौरान नाथूराम गोडसे गांधीजी के सामने आ गया, वह थोड़ा झुका, गांधी जी के साथ चल रही उनकी एक सहयोगी ने गोडसे को सामने से हटाने की कोशिश की, गोडसे ने उन्हें धक्का दे दिया और उसके हाथ से माला और किताब गिर गई।


- वो उन्हें उठाने के लिए नीचे झुकीं, तभी गोडसे ने एक के बाद एक तीन गोलियां गांधीजी के सीने और पेट में दाग दी।


- गांधीजी के मुंह से निकला, "राम.....रा.....म." और उनका शरीर नीचे की तरफ गिरने लगा, साथ चल रहे लोगों ने उसे संभालने की कोशिश की।


 नाथूराम गोडसे ने जेल में मिलने गए भाई गोपाल गोडसे को बताया था कि फायर करने के बाद उसने कसकर पिस्टल को पकड़े हुए अपने हाथ को ऊपर उठाए रखा और 'पुलिस-पुलिस' चिल्लाया।


- गोडसे ने कहा कि वह चाहता था कि कोई यह देखे कि यह योजना बनाकर और जानबूझ कर किया गया काम था।


- उसने गोपाल गोडसे को यह भी बताया कि वह यह भी नहीं चाहता था कि कोई यह कहे कि उसने घटनास्थल से भागने या पिस्टल फेंकने की कोशिश की।


 नाथूराम गोडसे जैसे ही पकड़ा गया वहां मौजूद माली रघुनाथ ने अपने खुरपे से उसके सिर पर वार किया जिससे सिर से खून निकलने लगा।


- हालांकि, गोपाल गोडसे ने अपनी किताब 'गांधी वध और मैं' में इसका खंडन किया है।


- उन्होंने किताब में लिखा है कि नाथूराम के पकड़े जाने के कुछ मिनटों बाद किसी ने छड़ी से नाथूराम के सिर पर वार किया था, जिससे सिर से खून बहने लगा था।