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ज्यादा गोरे लोगों को हो सकती हैं ये 5 हेल्थ प्रॉब्लम


दुनिया के अधिकांश देशों में गोरेपन को खूबसूरती का पैमाना माना जाता है, लेकिन ज्यादा गोरा होना भी नुकसानदायक हो सकता है।

दुनिया के अधिकांश देशों में गोरेपन को खूबसूरती का पैमाना माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्यादा गोरा होना भी नुकसानदायक हो सकता है?

 बॉम्बे हॉस्पिटल के कंसल्टेंट डर्मटोलॉजिस्ट डॉ. मीतेश अग्रवाल के मुताबिक ज्यादा फेयर या व्हाइट स्किन वालों में मेलानिन की कमी होती है इसलिए उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम का खतरा डार्क स्किन वालों की तुलना में ज्यादा होता है।

क्या काम करता है मेलानिन?

 मीतेश अग्रवाल का कहना है कि हमारी स्किन का कलर मेलानिन नामक पिगमेंट की वजह से होता है।

अगर स्किन में मेलानिन की मात्रा ज्यादा होगी तो कलर डार्क होगा और अगर मेलानिन की कमी होगी तो स्किन फेयर यानी गोरी होगी।

मेलानिन न केवल हमारी स्किन और बालों के कलर के लिए जिम्मेदार होता है बल्कि वह स्किन को कई हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचाने में भी हेल्पफुल होता है।

क्या है स्किन कलर टोन?

 अग्रवाल के मुताबिक इंटरनेशनल लेवल पर स्किन की फेयरनेस की पांच 5 पैमानों पर नंबरिंग की गई है। सबसे ज्यादा गोरी और व्हाइट स्किन की एक और दो नंबर की टोनिंग होती है।

इंडिया और एशियाई देशों में स्किन कलर की टोनिंग 3 और 4 नंबर की मानी जाती है। जबसे ज्यादा डार्क स्किन को 5 नंबर की स्किन टोन माना जाता है।

हालांकि एक और दो नंबर की स्किन टोन वालों को बीमारियां होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है लेकिन 3 नंबर की स्किन टोन वालों को भी सतर्कता बरतनी चाहिए।

कौन सी सनस्क्रीन इंडिया के लिए है बेस्ट ?

मीतेश अग्रवाल का कहना है कि भारतीय क्लाइमेट और स्किन टोन के हिसाब से 30 SPF की क्रीम सबसे अच्छी होती है।