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सात पहाड़ काटकर बनाई 40 किलोमीटर सड़क, माउंटेनमैन कहलाते हैं ये


जॉय ऑफ गिविंग की आज की कड़ी में हम आपको महाराष्ट्र के माउंटेनमैन से मिलवाने जा रहे हैं। महाराष्ट्र के मांझी कहे जाने वाले राजाराम भापकर गुरुजी ने 57 साल में अपनी सारी पूंजी खर्च कर सात पहाड़ियों को काटा और गांव के लिए 40 किलोमीटर की सड़क बनाई।

उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। अपने गांव के लिए सड़क बनाने वाले गुरुजी कुछ महीने पहले गांव छोड़ने के लिए मजबूर हुए थे। एक रुपया भी सरकार से नहीं लिया

-आजादी के वक्त अहमदनगर के गुंडेगांव को पास के गांवों से जोड़ने के लिए पगडंडी तक नहीं थी। उस दौरान भापकर गुरुजी ने 1957 में कोलेगांव की जिला परिषद स्कूल में काम शुरू किया।

-उनके गांववालों को स्कूल पहुंचने के लिए तीन गांवों का चक्कर लगाना पड़ता था।

-कई मर्तबा सरकार से कहा कि 700 मीटर ऊंची संतोषा पहाड़ी को काटकर सड़क बनाएं, लेकिन कोई मदद नहीं मिली तब उन्होंने खुद यह काम अपने हाथ में लिया।

29 किलोमीटर का सफर 10 किमी में सिमट गया

-शुरुआत में कोलेगांव पहुंचने के लिए देउलगांव से होकर जाना पड़ता था। 29 किलोमीटर का सफर होता था।

-पहाड़ को काटकर कच्चा रास्ता बनाया तो यह दूरी घटकर 10 किलोमीटर रह गई। सड़क बनाने के काम में मदद करने वालों को गुरुजी ने अपनी कमाई से मेहनताना दिया।

-वे अपनी सैलरी में से आधा पैसा मजदूरी पर खर्च कर देते थे। इन सड़कों को बनाने के लिए एक रुपया भी सरकार से नहीं लिया।

-1968 में जिस रास्ते से साइकिल तक नहीं गुजर सकती थी, अब वहां से बड़े-बड़े वाहन गुजरते हैं।

1991 में रिटायरमेंट के बाद जो पैसा मिला, वह भी उन्होंने सड़कों पर लगा दिया।

-फावड़ा-कुदाली कम पड़ रहे थे, तो बड़ी मशीनों का इस्तेमाल भी किया। पेंशन का पैसा भी लगाया।

तब जाकर 1997 में सड़कें बनकर तैयार हुई।

-एक ग्रामीण ने बताया, पहले की पगडंडी से 1968 में एक साइकिल भी पास नहीं कर सकती थी। अब इस सड़क पर बड़े वाहन चलते हैं।

- भापकर गुरुजी पर कुछ दिन पहले गाव के गुंडों ने हमला किया था। गुरुजी गांव में शराब मुक्ति की मुहिम चला रहे थे, इसलिए गांव के शराब अड्डे वालों ने उन पर हमला किया।

-इस बारे में एसपी से शिकायत करने पर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन बाकी के आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए। वे गांव में खुलेआम घूम रहे थे।

-भापकर गुरुजी ने पुलिस प्रोटेक्शन की मांग की थी, उन्होंने कहा है कि अगर प्रोटेक्शन नहीं मिला तो उन्हें मजबूरन गांव छोड़ना पड़ेगा।

-गुरुजी ने गांव के शराब बेचने वालों को दूसरा बिजनेस करने की सलाह दी थी, लेकिन उन पर ही हमला किया गया