खौलते दूध से नहाने वाले पुजारी की भविष्यवाणी- 2019 में आएगी सपा सरकार
अब तक पूजा पाठ और धर्म पर राजनीति होती आई है लेकिन अब पूजा राजनीतिक हो गई है वो भी अंधविश्वास से भरी. किसी भी पर्व में अलग-अलग जगहों पर अपनी मान्यतायें होती हैं और इन्ही मान्यताओं में कुछ जगहों में पर्व के नाम पर अंधविश्वास ज्यादा देखा जा सकता है.
ऐसा ही कुछ जनपद सोनभद्र में गोवर्धन पूजा के दिन दिखाई दिया. गोवर्धन पूजा के दिन सोनभद्र में ना सिर्फ बीर लोरिक पत्थर की पूजा होती है बल्कि पुरानी परंपराओं के अनुसार यहां गर्म दूध से स्नान होता है. मान्यता के मुताबिक पुजारी और जजमान के खौलते दूध से स्नान करने पर लोगों का कल्याण होता है. इस दौरान एक बाबा ने खौलते दूध में स्थान करने के बाद भविष्यवाणी कर दी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में मिली जुली सरकार बनेगी और प्रदेश में सपा के लोग जीतेंगे.
हर साल गोवर्धन पूजा के अवसर पर सभी यदुवंशी सोनभद्र के मारकुंडी घाटी में स्थित लोरिक पत्थर के नीचे इकट्ठे होते है. यहां पुजारी आग प्रज्वलित कर दूध को खौलाते हैं. इस दूध को तब तक खौलाया जाता है जब तक मन्त्र खत्म न हो जाएं और उसके बाद इस खौलते दूध से ना सिर्फ पुजारी बल्कि पूजा पर बैठे जजमान को भी स्नान कराया जाता है. पुजारी का दावा है कि इस दूध से नहाने पर सिर्फ वही जलते है जो कपटी होते हैं.
पुजारी अपने दावे को साबित करने के लिए ना सिर्फ खौलते ढूध में अपने सिर को डाल देता है बल्कि जजमान की आंखों में भी गर्म दूध डाल जाता है. इतना ही नहीं पुजारी अपने दावे को पुख्ता करने के लिए शक्ति का ऐसा प्रदर्शन करता है जिसे देख कर आपके भी रोंगटे खड़े हो जायेंगे. पुजारी पास में हो रहे हवन कुंड में अपने सिर और शरीर को आग के हवाले कर देता है. इस बारे में पुजारियों का कहना है कि देखने में दूध गर्म लगता है लेकिन शरीर पर डालते ही ठंडा हो जाता है. उसका कहना है कि पूजा में बहुत शक्ति होती है.
इस पूजा के आयोजकों के मुताबिक गोवर्धन पर्वत की पूजा भगवान श्रीकृष्ण ने शुरू की थी जो 5 हजार वर्षों से चली आ रही है. इसी परंपरा के तहत यदुवंशी समाज वीर लोरिक पत्थर पर प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा का आयोजन करता है. बाबा के दूध से नहाने की परंपरा सदियों पुरानी है और यह भक्ति से जुड़ा हुआ है. इसमें किसी कानून का उल्लंघन नहीं है. यह पूरी तरह से भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और शक्ति है.
आस्था और अंधविश्वास से जुड़ा यह कार्यक्रम इस बार पूरी तरह से राजनीतिक हो गया. इसमें समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय यादव के साथ पूर्व सांसद नरेंद्र कुशवाहा, दोनों पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा, रमेश चंद्र दुबे और पूर्व जिलाध्यक्ष संजय यादव, रामनिहोर यादव पहुंचे थे. वर्तमान सत्ता पक्ष के नेताओं के नहीं पहुंचने से इस कार्यक्रम ने राजनीतिक रूप ले लिया.

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