Header Ads

इस एक्ट्रेस ने फिल्मों में किए सबसे ज्यादा रेप सीन, गंभीर बीमारी से हुई थी मौत


बॉलीवुड में 60's और 70's की एक्ट्रेसेस की बात करें तो नाजिमा का नाम बरबस ही सामने आ जाता है। वैसे तो नाजिमा को फिल्मों में सपोर्टिंग रोल के लिए ही जाना जाता है, लेकिन उनके नाम एक और रिकॉर्ड है जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। नाजिमा बॉलीवुड की इकलौती ऐसी एक्ट्रेस थीं, जिन्होंने सबसे ज्यादा फिल्मों में रेप सीन किए हैं। उन्हें फिल्म 'बेइमान' के लिए 1972 में बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस कैटेगरी में फिल्मफेयर के लिए नॉमिनेट किया गया था। 27 साल की उम्र में कैंसर से हो गई मौत...

- नाजिमा ने बेहद कम उम्र में ही काफी कुछ हासिल कर लिया था। महज 22 साल की उम्र में ही वो उस दौर की हीरोइंस की नजरों में खटकने लगी थीं। अपने छोटे से करियर में ही उन्होंने ३०, से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

- 27 साल की उम्र में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जूझते हुए 1975 में उनकी मौत हो गई थी।

- नाजिमा के इनोसेंट लुक की वजह से उन्हें कई फिल्मों में हीरो या हीरोइन की छोटी बहन का किरदार निभाने का मौका मिलता था। यहां तक कि वो उस दौर में 'बॉलीवुड की बहन' के नाम से फेमस हो गई थीं।

- बतौर लीड हीरोइन नाजिमा ने सिर्फ एक ही फिल्म में काम किया और वह थी 1975 में रिलीज हुई 'दयार-ए-मदीना'।

चूंकि 60 और 70 के दशक की फिल्मों में अक्सर हीरो या हीरोइन की छोटी बहन रेप का शिकार हो जाती थी। ऐसे में एक्टर्स की छोटी बहन का सपोर्टिंग रोल निभाने वाली नाजिमा को ही सबसे ज्यादा रेप सीन करने पड़ते थे।


नाजिमा को डायरेक्टर कभी लीड रोल नहीं देते थे। ऐसे में वो इस डर से छोटी बहन के सपोर्टिंग रोल ही एक्सेप्ट कर लेती थीं कि कहीं ऐसा ना हो कि उन्हें काम मिलना ही बंद हो जाए। 'सिनेप्लॉट' में छपे 1968 के एक इंटरव्यू के मुताबिक, नाजिमा ने कहा था- मैं खुद नहीं जानती कि आखिर डायरेक्टर मुझे लीड रोल क्यों नहीं देना चाहते। मैं एक के बाद एक फिल्में सिर्फ इसी आशा में करती जा रही हूं कि शायद कभी मुझे बतौर लीड एक्ट्रेस ब्रेक मिलेगा।



नाजिमा के मुताबिक, मुझे इस बात का कोई दुख नहीं है कि मैंने अपने करियर में सिर्फ सिलेक्टेड फिल्मों में ही काम किया है। बल्कि मैं अपने रोल से खुश हूं। मैं जानती हूं कि कुछ ना करने से तो बेहतर है कि आप कुछ करते रहें।



नाजिमा का जन्म 1948 में महाराष्ट्र के नासिक में हुआ था। उन्होंने करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट 'बेबी चांद' नाम से की थी। देवदास, गंगा जमुना और हम पंछी एक डाल के जैसी फिल्मों में उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया है।



नाजिमा की आखिरी फिल्म 'रंगा खुश' थी, जो 1975 में उनकी मौत के बाद रिलीज हुई। इसके अलावा इसी साल उनकी 'संन्यासी' और 'दयार-ए-मदीना' जैसी फिल्में भी आईं।


1965 में आई फिल्म 'आरजू' के लिए बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के अवॉर्ड से नवाजा था। इस फिल्म को 'रामायण' के प्रोड्यूसर रामानंद सागर ने बनाया था। फिल्म में लीड रोल में राजेन्द्र कुमार और साधना थ। फिल्म में नाजिमा ने हीरोइन साधना की छोटी बहन सरला का रोल प्ले किया था।