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श्रीराम के पैरों के निशान पर भी पैर नहीं रखती थीं सीता, ये था कारण



श्रीरामचरित मानस के अनुसार भगवान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण 14 साल तक वनवास में रहे। इस दौरान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण जिस भी गांव से निकलते, वहां के लोग उनका खूब आदर-सत्कार करते। गोस्वामी तुलसीदास ने ये भी लिखा है कि-


चौपाई


प्रभु पद रेख बीच बिच सीता। धरति चरन मग चलति सभीता।।
सीय राम पद अंक बराएं। लखन चलहिं मगु दाहिन लाएं।।



अर्थात्- मार्ग पर चलते समय सीता इस बात का ध्यान रखतीं थीं कि गलती से भी श्रीराम के पदचिह्नों पर उनका पैर न रखा जाए। लक्ष्मण भी यह देखते हुए चलते कि श्रीराम व सीता दोनों ही के पैरों के निशान पर उनका पैर न पड़े।



इसलिए सीता श्रीराम के पैरों के निशान पर पैर नहीं रखती थीं




सीता द्वारा श्रीराम के पदचिह्नों को बचाते हुए चलना तथा लक्ष्मण द्वारा श्रीराम व सीता के पैरों के निशान पर पैर न रखना पारिवारिक मर्यादा का अनुपम उदाहरण है। सीता श्रीराम को अपना स्वामी मानती थीं इसलिए वे बात का ध्यान रखती थीं कि गलती से भी श्रीराम के पद्चिह्नों पर उनका पैर न पड़ जाए। उनका मानना था कि ऐसा करना धर्म के अनुसार अनुचित होगा।




ये सीखें इस प्रसंग से




लक्ष्मण के लिए राम व सीता दोनों ही परम आदरणीय थे। इसलिए वे भी इसी बात का विशेष ध्यान रखते थे। इस प्रसंग का सार पारिवारिक जीवन में मर्यादा पर आधारित है। इसलिए पारिवारिक जीवन में मर्यादा का होना बहुत आवश्यक है। मर्यादा के अभाव में परिजन एक-दूसरे का अपमान करने से भी नहीं चूकते। न बड़ों का आदर होता है न छोटों पर विश्वास। वर्तमान समय में ये प्रसंग हमें अपनों से बड़ों सदस्यों का मान-सम्मान करना सीखाता है।