जानिए, क्यों कुतरते हैं नाखून!
क्या आप खुद के नाखून दांतों से कुतरते रहना?
कोई बीमारी है या फिर कुछ और?
दुनिया के पांच अरब लोगों में से लगभग 60 करो़ड लोग नाखून चबाने की आदत से मजबूर हैं, भले ही मखौल बनते रहें?
मनोवैज्ञानिकों की मानें तो दरअसल ऎसा कुछ नहीं है, जब कोई इंसान परेशान या बोर होने लगता है तो नाहक ही बेचारे मासूम नाखून खुद-ब-खुद दांतों तले आ जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है- यह एक सहज प्रवृत्ति है, बच्चो को बचपन से सिखाया जाता है कि नाखून चबाना गलत है।
ऎसा करने पर बराबर के उम्र वालों के बीच भी मजाक बनता है। ब़डे भी फटकार लगाते हैं, बावजूद तमाम टोका-टोकी के भी बच्चे इस आदत को लेकर चौकन्ने नहीं हो पाते और ब़डी उम्र तक आदत बरकरार रहती है।
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि नेल बाइटिंग दरअसल बच्चों और युवाओं में मानसिक तनाव और ऑवसेसिव कंपलसिव डिसऑर्डर का लक्षण है।
वे सचेत करते हैं, नेल बाइटिंग से गंभीर किस्म की संक्रामक बीमारियों का खतरा तो रहता ही है, दूसरे नाखून का मूल आकार भी हमेशा के लिए बदशक्ल हो सकता है।


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