इस मंदिर में लड़कियों को रखा जाता है टॉपलेस, सैकड़ों में से 7 होती हैं सिलेक्ट
तमिलनाडु के मदुरै में परंपरा के नाम पर कम उम्र की लड़कियों को टॉपलेस करके 15 दिनों तक येजहायकथा अम्मान मंदिर में रखा जाता है। यहां इनको देवी रूप में सजाकर पूजा की जाती है, लेकिन शरीर के ऊपरी हिस्से पर कोई कपड़ा नहीं पहनाया जाता। हालांकि, इस बार कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए लड़कियों के पूरे शरीर को ढंकने का आर्डर दिया है। साथ परिजनों को भी बेटियों के साथ रहने का आदेश दिया है। ६०, से ज्यादा गांवों के लोग शामिल...
दरअसल, यहां पुरानी धार्मिक रीति-रिवाज के नाम पर 7 या उससे अधिक लड़कियों को देवी रूप में सजाया जाता है।
- इस दौरान उनके शरीर के ऊपरी हिस्से को निर्वस्त्र करवा दिया जाता है, जबकि कमर से नीचे वे धोतीनुमा वस्त्र पहन सकती हैं।
- इस परंपरा के तहत मदुरै के आसपास के तकरीबन ६०, से ज्यादा गांवों के लोग शामिल होते हैं।
- उन लड़कियों (जिनके अभी तक पीरियड्स शूरू नहीं हुए हों) को देवी रूप में 15 दिनों तक अम्मान मंदिर में जाकर पूजते हैं।
- यह भी एक प्रकार से 1988 में प्रतिबंधित हो चुकी 'देवदासी प्रथा' का एक ही रूप है।
- इन लड़कियों को घर से दूर रहने के अलावा 15 दिन तक पढ़ाई से भी वंचित कर दिया जाता है। - इस पूरे त्यौहार रूपी समारोह के खत्म होने पर पांच लड़के उन लड़कियों के वस्त्रों को हटाते हैं, जिससे वे निर्वस्त्र हो जाती हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इन पंद्रह दिनों तक मंदिर में रहने के दौरान इन लड़कियों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत नहीं होती।
- इस पखवाड़े के दौरान अम्मान मंदिर के पुरुष पुजारी उन लड़कियों की देखभाल और सुरक्षा का जिम्मा उठाते हैं।
- मदुरै के डीएम के. वीरा राव का कहना है कि यह 200 साल पुरानी परंपरा है। इसके लिए घरवाले मर्जी से ही अपनी लड़कियां मंदिरों में भेजते हैं। हमें किसी की ओर से अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।
- हालांकि, अब डीएम ने इन लड़कियों के शरीर को पूरी तरह से कपड़े से ढंकने से आदेश जारी कर दिए हैं।
उधर, नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने इस मामले को लेकर तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया है और चार हफ्तों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
- आयोग ने कहा है कि अगर लड़कियों को टॉपलेस रखने का मामला सही है तो यह मानव अधिकारों का सरासर उल्लंघन है।


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