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सीने से आर-पार हो गई 4 इंच मोटे लोहे की रॉड, फ‍िर भी ज‍िंदा


राजधानी में शन‍िवार को डीसीएम वैन ने बाइक सवार को जबरदस्त टक्कर मार दी। इस घटना में बाइक सवार व्यक्त‍ि के सीने में 22 इंच लंबा और करीब 4 इंच चौड़ा लोहे की रॉड आर-पार हो गई। आनन-फानन में उसे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां 6 डॉक्टरों की टीम ने 3 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद उसकी बॉडी से लोहे की रॉड न‍िकालने में कामयाबी पाई। फ‍िलहाल पेशेंट की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। आगे पढ़‍िए पूरी घटना के बारे में

-यूपी के गोंडा निवासी समीर मिश्रा (26) 27 अगस्त को अपनी बाइक से किसी खास काम से लखनऊ आ रहे थे। रास्ते में एक डीसीएम वैन ने उन्हें टक्कर मार दी। डीसीएम पर लोहे की रॉड लदी हुई थी।

-टक्कर इतनी जबरदस्त हुई क‍ि लोहे की रॉड समीर के सीने के राइट साइड के अंदर से पार हो गई। बॉडी से तेज खून निकलकर रहा था और उसे सांस लेने में प्रोब्लम हो रही थी। पर‍िजन उन्हें लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।

-यहां सर्जरी डिपार्टमेंट में उन्हें एडमिट किया गया। उनका चेक अप किया गया। जांच में ब्लड प्रेशर कम पाया गया। सर्जरी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन उसी दिन करने का डिसीजन लिया।

-ऑपरेशन करने के लिए 6 डॉक्टरों की टीम बनाई गई। इसमें केजीएमयू के सर्जरी डिपार्टमेंट के डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. समीर मिश्रा, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. अनुराग, सीटीवीएस डिपार्टमेंट के डॉ. अजय पांडेय और एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की डॉ. निधि शुक्ला को शामिल किया गया।

-उन्होंने पेशेंट को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया। उसके बाद राइट साइड से सीने को खोला गया। सीने के अंदर 1 लीटर ब्लड जमा हो गया था जिसे साफ किया गया। चोट लगने के कारण लंग्स का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह से डैमेज हो गया था। नस से ब्लड का रिसाव हो रहा था।

-डॉक्टरों ने लोहे के रॉड को सीने से निकालकर उसे वापस सील दिया गया। ऑपरेशन के बाद पेशेंट की 8 दिनों तक मॉनिटरिंग की गई। उसकी सेहत में हो रहे सुधार को देखते 5 सितम्बर को पेशेंट को केजीएमयू से डिस्चार्ज कर दिया गया।

क्या कहते हैं ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर्स
-केजीएमयू के सर्जरी डिपार्टमेंट के डॉ. संदीप तिवारी के मुताबिक, समीर मिश्रा की बॉडी लोहे के रॉड के आर-पार हो जाने से बुरी तरह से डैमेज हो गई थी। इस तरह के केस को ऑपरेट करना काफी मुश्किल भरा काम होता है।

-अगर थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो पेशेंट की जान जा सकती है, इसलिए हम लोगों ने कुशल डॉक्टरों की एक टीम बनाई, जिसमें केजीएमयू के 6 डॉक्टरों को शामिल किया गया।

-सभी ने उसी दिन पेशेंट का ऑपरेशन करने का डिसीजन लिया। पेशेंट का 3 घंटे तक ऑपरेशन चला। उसके बाद उसकी बॉडी से लोहे की रॉड निकाल ली गई। उसकी हालत खतरे से बाहर है। उसकी सेहत में सुधार को देखते हुए उसे केजीएमयू से डिस्चार्ज कर दिया गया है।