चिता पर रखे शव की पूजा करने पहुंच जाती है ये लेडी, लोग कहते हैं पागल
भगवान की चौखट पर माथा टेका... पीरों-फकीरों के दर पर गई...और अब जिंदगी की आस में मृत देह की फेरियां लगाने लगी... यह कहानी एक मां की है... जो अपनी जिंदगी, यानी अपने दोनों बच्चों की सलामती के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। अब कोई उसे अंधविश्वासी कहता है तो कोई उसे पागल। यह मां है राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर के अर्जुननगर की प्रीति। जानें क्या है पूरा मामला...
- प्रीति बताती है, 2012 में उसकी शादी हुई, जिससे 2014 में जुड़वा बच्चे हुए। नाम रखा नील और निखिल।
- घर में खुशियों के माहौल के बीच दो महीने बीते कि पता लगा निखिल कोई हरकत नहीं कर रहा। बच्चे को तत्काल डॉक्टर के पास ले गए तो डॉक्टरों ने कहा कि यह कभी ठीक नहीं हो सकता।
- छह महीने ही बीते थे कि दूसरे बच्चे को दौरे आने शुरू हो गए। बस उसी दिन से शुरू हुआ मां का संघर्ष, जो आज तक जारी है।
- शुक्रवार को तो यह मां दोनों बच्चों के साथ एक शव यात्रा में पहुंच गई। वहां उसने शव के चारों ओर चक्कर लगाए। मां उसके बच्चों को देख हर कोई हैरान था और सब उसे हैरतभरी नजरों से देख रहे थे।
- लोगों के पूछने पर मां ने जब अपनी कहानी बताई तो कइयों की आंखें नम हो गई।
प्रीति बताती है, निखिल साढ़े तीन साल का हो गया। लेकिन पानी पर ही जिंदा है। मुंह में खाना भी जबरन डालना पड़ता है। इस उम्र में बच्चे स्कूल जाने लगते हैं, लेकिन उसने मेरी गोद भी नहीं छोड़ी।
- नील को जन्म के छह महीने के बाद ही दौरे पड़ने शुरू हो गए। अब सप्ताह में एक से दो बार उसे दौरे आते ही हैं। दोनों का अलग-अलग डॉक्टरों के पास इलाज चल रहा है।
- निखिल के लिए डाक्टर कहते हैं, ये कभी ठीक नहीं हो सकता, जबकि नील काे ठीक होने में लंबा वक्त लगेगा।
- मैं नौकरी करती थी। बच्चों के इलाज के लिए मैंने नौकरी भी छोड़ दी। दोनाें बेटों को अब कभी नजरों से दूर नहीं करती। हर पल डर लगता है कि कहीं कुछ हो जाए।
- घर आए रिश्तेदार ने एक बार कहा कि जब तुम गर्भवती थी। तब शायद किसी शव यात्रा के पास से निकली होगी। ऐसा करो कि जब भी कोई शव यात्रा हो तो तुमे उसे नीचे से 7 बार निकलना।
- हालांकि मैं पढ़ी-लिखी हूं और इन बातों पर यकीन नहीं रखती। लेकिन दूसरी तरफ मां भी हूं। मैंने शव के चक्कर लगाए।
- किसी ने बोला कि तुम रोज सुबह-शाम मंदिर में नंगे पांव जाया करो। मैंने वो भी किया। एक ने कहा कि मजार पर जाओ। मैं वहां भी गई। अब तो मेरी घर की स्थिति भी बहुत नाजुक हो चली है। भगवान में भी यकीन है कि वही मेरे बच्चों को सही करेगा।

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