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इन्होंने धवन-नेहरा को बनाया स्टार, खुद पैसों के लिए कर रहे क्लर्क की जॉब


टीम इंडिया को आशीष नेहरा और शिखर धवन जैसे दिग्गज क्रिकेटर्स दे चुके कोच तारक सिन्हा आज भी लाइमलाइट में आना पसंद नहीं करते। वो करीब 40 सालों से कोचिंग दे रहे हैं। उनके सिखाए हुए 11 से ज्यादा क्रिकेटर्स टीम इंडिया के लिए खेल चुके हैं।

इसमें नेहरा-धवन के अलावा, आकाश चोपड़ा, रमन लाम्बा, मनोज प्रभाकर जैसे नाम हैं। उनके स्टूडेंट्स की लिस्ट में सबसे लेटेस्ट नाम है रिषभ पंत का, जो टीम इंडिया के लिए टी20 डेब्यू कर चुके हैं। नेक्सा न्यूज़  के लिए दिए इंटरव्यू में तारक सिन्हा ने अपनी लाइफ की कई बातें शेयर कीं। १९६९ में बनाया था सोनेट क्लब

- 1969 में तारक सिन्हा और उनके साथियों ने सोनेट क्लब का गठन किया था। कुछ दिन क्लब की ओर से विकेटकीपर-बैट्समैन के तौर पर खेले। उसके बाद क्लब के कोच बन गए और कोचिंग देना शुरू किया।

- शुरुआत में कोचिंग के लिए कोई फीस नहीं लेते थे। वर्तमान में अभी 200 बच्चे ट्रेनिंग करते हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत से ही फीस ली जाती है। जबकि, 50 प्रतिशत बच्चे ऐसे वर्ग से हैं जो फीस नहीं दे पाते। उनके किट आदि की व्यवस्था क्लब के सदस्यों की ओर से की जाती है।

- वहीं, घर का खर्चा निकालने के लिए उन्होंने पीजीडीएवी कॉलेज में क्लर्क के पद पर ज्वाइन किया है। इसके साथ ही यंग क्रिकेटर्स को कोचिंग देने का काम करते हैं।

अपने स्टूडेंट शिखर धवन के बारे में तारक सिन्हा का कहना है कि जब इंडिया टीम में वीरेंद्र सहवाग, आकाश चोपड़ा और गौतम गंभीर जैसे ओपनर खेलते थे, तब दिल्ली रणजी में भी ओपनर के तौर पर इन्हीं खिलाड़ियों का दबदबा था।

- सिन्हा के अनुसार, ‘धवन अंडर 19 के वर्ल्ड कप में मैन ऑफ द सीरीज बनकर आए थे। ऐसे में शिखर धवन को विश्वास था कि उन्हें दिल्ली रणजी टीम में मौका मिल जाएगा, लेकिन आकाश चोपड़ा, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर का बेहतर प्रदर्शन जारी था। वहीं, मिडल ऑर्डर में मिथुन मिन्हास और रजत भाटिया जैसे खिलाड़ी थे। ऐसे में शिखर धवन को मौका नहीं मिल पा रहा था। वो नर्वस हो गए थे।'

- ‘तब मैंने उसे समझाया कि उन्हें मौका मिलेगा, अपना बेहतर करें। साथ ही जो भी मौका मिलता है, उसमें 100 परसेंट दें। शिखर धवन को उनके धैर्य का फल मिला।'

- सिन्हा के अनुसार अब भी धवन में कुछ सालों तक इंडिया टीम के लिए खेलने की क्षमता है। वह अभी फिट हैं। साथ ही शानदार बैटिंग भी कर रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही है कि वो हमेशा पॉजिटिव सोचते हैं।

आशीष नेहरा ने मकान खरीदने में की मदद

- तारक सिन्हा कहते हैं कि उन्होंने क्रिकेट के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। कभी वो सरकारी मकान में रहते थे। मकान किसी कारण से खाली करना पड़ा। तब उनके पास घर लेने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में उनके स्टूडेंट रहे क्रिकेटर आशीष नेहरा ने उनकी मदद की थी और फ्लैट गिफ्ट किया था। साथ ही क्रिकेट से जुड़े कई लोग हेल्प के लिए आगे आए थे। क्रिकेट ने भी उन्हें बहुत कुछ दिया है।

देश को और क्रिकेटर देना चाहते हैं

- तारक सिन्हा कहते हैं कि उन्होंने अब तक 40 साल से ज्यादा के कोचिंग करियर में कई खिलाड़ी दिल्ली और देश को दिए हैं। उनकी कोशिश होती हैं कि उनके एकेडमी में प्रैक्टिस के लिए आने वाला खिलाड़ी देश के लिए खेले। अगर वह देश के लिए नहीं खेल सके तो अच्छा इंसान जरूर बने।

- सिन्हा ने राजस्थान, गुजरात सहित कुछ राज्यों में जाकर वहां के प्लेयर्स को क्रिकेट के गुर भी सिखाए हैं। अब तो वह दिल्ली में ही अपनी एकेडमी में ज्यादा से ज्यादा समय देना चाहते हैं।

बहन के लिए नहीं बसाया अपना घर

- तारक सिन्हा ने अपनी बहन को सपोर्ट करने के लिए दोबारा शादी नहीं की। उनके अनुसार, ‘शादी के एक साल बाद ही पत्नी का देहांत हो गया था। रिश्तेदारों-दोस्तों ने दोबारा शादी करने की सलाह दी, लेकिन बड़ी बहन विधवा हो गई थी। उनकी एक लडक़ी थी। ऐसे में मेरे सिवा उनका कोई नहीं था। इसलिए बहन और उसकी फैमिली को सपोर्ट करने के लिए मैंने दोबारा शादी नहीं करने का निर्णय लिया।‘ अभी सिन्हा के परिवार में उनकी बहन और बहन की लडकी और उसके बच्चे हैं।

वर्तमान वुमन टीम ने बदल दी वुमन क्रिकेट की दशा

- तारक सिन्हा बताते हैं कि साल 2002 में जब उन्होंने वुमन टीम की कोचिंग की कमान संभाली थी, उस दौरान मिताली राज इंडिया टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। तब केवल एक ही लेफ्ट आर्म स्पिनर नीतू डेविड थी।

उस समय क्रिकेट काफी स्लो खेला जाता था, लेकिन वर्तमान में कई लड़कियां लड़कों की तहत फास्ट बैटिंग करती हैं। यही कारण है कि वुमन क्रिकेट टीम के प्रति लोगों का रूझान बढ़ा है।

- वहीं अब इंडिया वुमन टीम में कई बेहतर बॉलर्स हैं। टीम ज्यादा ऑर्गनाइज्ड है। हरमनजीत कौर लड़कों की तरह फास्ट रन बनाती है।

- सिन्हा के अनुसार, जुलाई में हुए वुमन वर्ल्ड कप फाइनल में मिताली राज का रनआउट होना गेम का टर्निंग प्वाइंट था।