19 साल के 10th फेल लड़के के कारनामे, ऐसे कमाए थे 30 से 35 लाख

क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले अंतरप्रांतीय गिरोह के ऐसे सरगना को टीकमगढ़ से दबोचा है, जो बैंक अधिकारी बन लोगों को कॉल करता और डेबिट-क्रेडिट कार्ड नंबर व ओटीपी लेकर खातों से लाखों रुपए उड़ा लेता।
10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुके इस बदमाश ने गांव के ही कई स्कूली बच्चों अौर महिलाओं को भी ठगी के लिए तैयार कर लिया था। ये सभी लैपटॉप लेकर खेतों में बैठ जाते और ठगी को अंजाम देते थे। अधिकांश बच्चों के पास से महंगे मोबाइल, लैपटॉप और कई फर्जी सिम जब्त हुई हैं। इस गिरोह के तार हरियाणा, यूपी, दिल्ली, झारखंड और जम्मू एंड कश्मीर के बड़े गिरोह से जुड़े हैं। पकड़ा गया सरगना ग्राम असगारी का हुकुम सिंह पिता मुलायम सिंह है।
30 से 35 लाख रुपए की ठगी
- पूछताछ में आरोपी ने बताया कि इंदौर में 18 लोगों को बैंक अधिकारी बनकर ठगने के लिए कॉल किए थे। इनमें से तीन तो ठगी का शिकार हो चुके हैं। एएसपी अमरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि आरोपी तीन साल से ऑनलाइन ठगी कर रहा है। 10वीं के बाद उसने पढ़ाई भी छोड़ दी थी।
- हुकुम ने बताया वह जिस गिरोह से जुड़ा है उसमें कई बड़े सरगना हैं। उसके गांव के कई युवक सालाना 30 से 35 लाख रुपए की ठगी करते हैं। कई ग्रामीणों ने तो ठगी के रुपए से मकान तक बना लिए हैं। वहीं कई के फर्जी दस्तावेज से खुले वॉलेट में लाखों रुपए ठगी के जमा हैं।
- हुकुम सिंह ने बताया अस्तारी गांव में उसके अलावा भरतसिंह पिता लालाराम, नरेंद्र पिता भवानी दास, राजेंद्र पिता शीतलाप्रसाद, अरविंद पिता रघुनाथ, रवींद्र पिता रमेश, राहुल पिता मुन्नालाल, यशपाल पिता कल्लू, जितेंद्र, रोहित पिता धीरेंद्र सिंह, शैलेंद्र, सौलब, प्रदीप, रोहित पिता मुन्नालाल और पुष्पेंद्र पिता हरनारायण दो साल से ठगी कर रहे हैं।
- सभी को ठगी के लिए शैलेंद्र ने ट्रेनिंग दी थी। सभी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से जानकारियां जुटा लेते हैं, फिर ओटीपी लेकर उनके अकाउंट से पैसा ई-वॉलेट्स में या किसी फर्जी खाते में ट्रांसफर करवा लेते हैं।
- हुकुम सिंह ने बताया टीकमगढ़ के अस्तारी गांव के अलावा आसपास के गांव थोना, नौरा, महेवा, गोबा, चौमो खस, चरीकला, करीखास के लोग भी यही काम कर रहे हैं। गिरोह का सरगना शैलेंद्र इसी गांव का है। वह दिल्ली में रहकर ठगी करना सीखा।
- इसके बाद उसने गांव के लोगों को मोबाइल से ठगी करना सिखाया। इसके बाद स्कूल में पढ़ने वाले कई नाबालिग बच्चे भी पढ़ाई छोड़कर इसी काम में लग गए। इन गांवों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि पुलिस छापा मारती भी है तो उन्हें इनके अड्डे का पता नहीं चलता।
15 से 30 साल के युवा फ्रॉड में शामिल
- आरोपी प्री-एक्टिवेटेड सिम का इस्तेमाल करता था। अच्छे रुपए मिलने का लालच देकर आरोपी ने गांव के 15 से 30 साल के युवाओं बैंक अधिकारी बनकर लोगों से बात करने की ट्रेनिंग दी थी। उसने टीकमगढ़ के ग्राम निवाड़ी, पृथ्वीपुर और तहरका में कई स्कूली छात्रों को इस काम में माहिर बना दिया है। ये खेतों में मोबाइल और लैपटाप लिए बैठकर लोगों को कॉल कर वारदात करते थे।
- ठग हुकुमसिंह ने बताया कि यह काम वह अकेला नहीं, बल्कि उसके गांव से लगे करीब आठ गांवों के सौ से ज्यादा लड़के मिलकर कर रहे हैं। इनका नेटवर्क आठ राज्यों में फैला है। उसने बताया कि गिरोह के सरगना शैलेंद्र ने गांव के युवाओं को महंगे मोबाइल फोन के जरिए इसमें माहिर कर दिया।
- शैलेंद्र दिल्ली में कुछ कियोस्क सेंटर, आउट सोर्स कंपनी, बैंक और मोबाइल कंपनी के कर्मचारियों के संपर्क में है। उन्हीं के जरिए यह कस्टमर का डाटा चुराता है। फिर उसी डाटा के आधार पर ये लोगों से ठगी करते हैं।
जो एक बार में जानकारी नहीं देता, उसे दिखाते लॉटरी खुलने का सपना
- आरोपी ने बताया बैंकों व मोबाइल कंपनियों के कस्टमर का डेटा चुराकर इस गिरोह के बदमाश डेटा के आधार पर कस्टमर का नाम लेकर या उसका अकाउंट नंबर बताकर उन्हें बैंक अधिकारी बनने का विश्वास दिलाते हैं। फिर डेबिट-क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने, उसे आधार से लिंक करने, पेन कार्ड देने के नाम पर बातों में उलझाकर कार्ड के पीछे के 16 डिजिट के नंबर और सीवीवी कोड पूछकर उनसे ओटीपी भी हासिल कर लेते हैं और उनके अकाउंट्स से पैसा ई-वॉलेट में ट्रांसफर कर देते हैं।
- यदि एक बार में कोई अपनी जानकारी नहीं देता है तो इसी गिरोह के दूसरे सदस्य उन्हें दोबारा फोन करते हैं और इस बार वे लॉटरी खुलने का सब्जबाग दिखाकर बात करते हैं, फिर जाल में उलझा लेते हैं। ऐसे में जरूरी नहीं कि फोन करने वाला बैंक से ही बोल रहा हो। ये चोरी गए डाटा के आधार पर खुद को बैंककर्मी बनकर लोगों से ठगी करते हैं।
फर्जी दस्तावेज से खोले जाते हैं खाते
क्राइम ब्रांच एएसपी अमरेंद्र सिंह ने बताया गिरोह में बैंक खाते कियोस्क के माध्यम से फर्जी दस्तावेज के आधार पर खोले जाते हैं। वहीं गिरोह के लोग खातों को आॅनलाइन ट्रांजेक्शन से ही ऑपरेट करते हैं। इन्होंने फर्जी दस्तावेज पर कई ई-वॉलेट भी ले रखे हैं, जिसमें ठगी का पैसा ट्रांसफर कर उसे कैश करवा लेते हैं। ये बात भी सामने आई है कि कुछ बैंक के कर्मचारी व मोबाइल कंपनी के लोग भी इस गिरोह से जुड़े हैं, जो उन्हें कस्टमर की सारी जानकारी उपलब्ध करवाते हैं।
उम्र 19 साल की पर ठगी में माहिर
- डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि आरोपी हुकुम (19) पिता मुलायम सिंह ठगी में माहिर है। उसके खिलाफ मुकेश पिता कैलाशचंद कोरी निवासी राखी नगर नंदबाग ने शिकायत की थी। उससे आरोपी ने लॉटरी खुलने के नाम पर 32 हजार की ठगी की थी। सायबर हेल्पलाइन पर साढ़े चार महीनों में 676 लोगों ने ऑनलाइन ठगी की शिकायतें की थीं। सर्चिंग में 320 नंबर ऐसे मिले थे, जिनसे ठगी के लिए कॉल किए जा रहे थे। इनमें अधिकांश नंबर बिहार और झारखंड के थे। कुछ मप्र, गुजरात और दिल्ली के निकले।

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