Header Ads

जिस ओर भक्त चाहते हैं, उसी ओर घूम जाता है इस मंदिर का शिवलिंग


मंदिरों में आमतौर पर शिवलिंग की जलहरी उत्तर की ओर रखी जाती है। कुछ विशेष मंदिर में यह दिशा दक्षिण हो जाती है, लेकिन एक मंदिर ऐसा भी है, जहां शिवलिंग को भक्त अपनी सहूलियत से घुमाकर किसी भी दिशा में उनका मुख ले जा सकते हैं।

आज शिव मास सावन का पहला सोमवार है।  ग्वालियर के पास श्योपुर के उस ऐतिहासिक मंदिर की कहानी जहां शिवलिंग अपनी जलहरी की दिशा भक्तों की इच्छा से बदल सकता है....
- यह अनूठा शिवलिंग श्योपुर के छार बाग मोहल्ला स्थित अष्टफलक की छत्री में है। शिवलिंग को इस प्रकार बनाया गया है कि वह अपनी धुरी पर चारों ओर घूम सकता है।
- श्रद्धालु अपनी इच्छा के मुताबिक शिवलिंग की जलहरी को दिशा देकर भोलेनाथ को रिझाते हैं।

300 साल पहले गौड़ राजा सोलापुर से लाए थे शिवलिंग
- घूमने वाले इस शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा श्योपुर के गौड़ वंशीय राजा पुरुषोत्तम दास ने सन् 1722 में करवाई थी, इसका उल्लेख इस मंदिर में लगे शिलापट्ट पर भी अंकित है।
- इस शिवालय को अब गोविंदेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इससे पूर्व यह शिवलिंग सोलापुर महाराष्ट्र में बाम्बेश्वर महादेव के रूप में स्थापित था।
- गौड़ राजा शिवभक्त थे। उन्होंने शिवनगरी के रूप में शिवपुर (अब श्योपुर) नगर बसाया।

लाल पत्थर से बना है शिवलिंग
- शिवलिंग लाल पत्थर का बना हुआ है। यह दो भाग में विभाजित है। एक पिंडी और दूसरा जलहरी।
- यह शिवलिंग नीचे एक आकार में बनी पत्थर की धुरी पर टिका हुआ है। अपनी धुरी पर यह शिवलिंग चारों तरफ घूम जाता है।
-मंदिर में आने वाले भक्त शिवलिंग को अपनी सुविधानुसार घुमाकर पूजा कर लेते हैं।