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एक ही दिन अलग हुए थे दो देश, एक गरीब तो दूसरा ऐसे बन गया अमीरसाउथ कोरिया


साउथ कोरिया ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बहुत तेजी से कदम बढ़ाए। इसके लिए तेजी से अच्छी सड़कों का निर्माण किया। 1960 ,से 2000 के बीच देश में करीब 65 हजार किमी की पक्की सड़कें तैयार कर ली गई थीं। इनमें 22,182 किमी के हाईवे भी शामिल हैं। ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम को मजबूती देने के लिए रेलवे नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया। देश का रेलवे नेटवर्क 45 हजार किमी का है। इसके अलावा देश में इस समय 103 एयरपोर्ट्स हैं। इसके बाद समुद्री परिवहन को भी विकसित किया गया। जापान, अमेरिका से लेकर कई एशियाई कंट्री तक साउथ कोरिया का नेटवर्क है।

नॉर्थ कोरिया
तानाशाही शासन के चलते अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देशों ने नॉर्थ कोरिया पर बैन लगा दिए। इससे देश की अर्थव्यवस्था डांवाडोल होती चली गई। देश में आय के साधन सीमित हो गए, जिससे देश बदहाल होता चला गया। 1960, से 2000 के बीच यहां सिर्फ 20 हजार किमी की पक्की सड़कें तैयार हो पाईं। देश के हजारों गांव में पक्की सड़कें नहीं हैं। इसके अलावा यहां का रेलवे नेटवर्क सिर्फ 5 हजार किमी का ही है। ट्रांसपोर्टेशन खस्ताहाल में हैं और अब भी यहां 15 से 20 साल पुरानी बसें चल रही हैं। देश में 12 पोर्ट्स और 49 एयरपोर्ट्स हैं।

सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद कई देशों को आजादी मिली। इनमें सिर्फ भारत-पाकिस्तान ही शामिल नहीं थे, बल्कि 15 अगस्त 1945 को जापान से कोरिया भी आजाद हुआ। हालांकि, इस समय ये दोनों देश एक ही थे, लेकिन कोरिया में अमेरिकी और सोवियत ताकतों की मौजूदगी के कारण जल्द ही युद्ध के कारण इस देश के दो टुकड़े हो गए, जो नॉर्थ-कोरिया और साउथ कोरिया बने। आज ही दिन यानी की 17 जुलाई, 1948 को साउथ कोरिया का संविधान अस्तित्व में आया था। इसके बाद साउथ कोरिया एक लोकतांत्रित देश बना, लेकिन नॉर्थ कोरिया में तानाशाही शासन की शुरुआत हुई, जो आज तक कायम है।

साउथ कोरिया ने अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों से मिलकर अपने देश की विकास की रफ्तार को बढ़ाया। इन कोरियाई देशों में बारिश बहुत कम होती है। इसके चलते साउथ कोरिया ने पानी के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया। छोटे-छोटे डैम से लेकर कई तालाब व नहरें बनाईं और एग्रीकल्चर को तेजी से बढ़ाया। देश में हरियाली लाने के लिए लोगों को जागृत किया। सबसे पहले यहां कॉफी का उत्पादन शुरू हुआ और इसके बाद अन्य फसलें भी उगाई जाने लगीं। खेती-किसानी के लिए साउथ कोरिया ने शुरुआत में दूसरे देशों से मशीनरी खरीदीं। लेकिन, इसके बाद देश में ही टेक्नोलॉजी को विकसित किया, जिससे मशीनरी के मामले में देश आत्मनिर्भर हो गया।

नॉर्थ कोरिया
तानाशासी किम इल-सुंग ने सिर्फ सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया। इससे देश में गरीबी बढ़ती गई। पानी कमी के चलते यहां की आधी आबादी अकाल से ग्रस्त है। वहीं, एग्रीकल्चर के क्षेत्र में भी कोई खास विकास ना हो पाने के कारण देश में भुखमरी के हालात हैं। देश में अधिकतर कॉफी, चायपत्ती की खेती होती है। देश में आय का मुख्य जरिया कोयला है, जो चीन एक्सपोर्ट किया जाता है।

साउथ कोरिया
देश की इकोनॉमी को मजबूती देने के लिए साउथ कोरिया ने सबसे ज्यादा ध्यान अपने यहां इंडस्ट्रीज लगाने पर दिया। सैमसंग से लेकर एलजी और हुंडई जैसी कंपनियों ने साउथ कोरिया में ही जन्म लिया। इसके अलावा, दुनिया की सबसे बड़ी कार कंपनी जनरल मोटर्स के 4 बड़े प्लांट भी यहीं हैं। इस देश में अगर छोटी कंपनियों को छोड़ दिया जाए तो अकेले 1000 से ज्यादा बड़ी कंपनियां हैं। साउथ कोरिया अमेरिका का 6वां सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर देश है। इसी के चलते इकोनॉमिक रिफॉर्म के मामले में 35वें नंबर पर आता है।

नॉर्थ कोरिया
तानाशाही रवैये के चलते नॉर्थ कोरिया ने बाहरी कंपनियों को अपने देश में आने ही नहीं दिया। इसके चलते देश की इकोनॉमी लगातार गिरती चली गई। इकोनॉमिक रिफॉर्म के मामले में आज नॉर्थ कोरिया 179 देशों की लिस्ट में अंतिम नंबर पर है। देश में अधिकतर फैक्ट्रियां कोयले और छोटे वेपंस की हैं।

साउथ कोरिया विकसित देशों की श्रेणी में आता है। यहां लोगों की लाइफ स्टाइल पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। रेस्टोरेंट, बार, डांस क्लब हरेक जगह देखे जा सकते हैं। इसके चलते यहां टूरिस्टों की भी संख्या भी अच्छी खासी है।
नॉर्थ कोरिया
साउथ कोरिया से वॉर (1950,53) के बाद से ही तानाशाह किम इल-सुंग ने देश में पश्चिमी देशों की लाइफ स्टाइल पर बैन लगा दिया था। क्योंकि, वॉर के समय अमेरिका ने साउथ कोरिया का साथ दिया था। लोगों को सिर्फ पारंपरिक वेषभूषा में ही रहने की परमिशन है। इसके अलावा यहां बार, डांस क्लब पर भी बैन है