पिंजड़े में कैद कर गैंगस्टर लेता था लोगों की जान, आज उसकी लाश की ये हालत
कभी राजस्थान पुलिस के लिए खाैफ का दूसरा नाम रहे मोस्ट वांटेड गैंगस्टर आनंदपाल का 24 और 25 जून को हुए एनकाउंटर के बाद डेड बॉडी का अंतिम संस्कार अब तक नहीं हाे सका है। अंत्येष्टि के इंतजार में 10 दिन बाद बॉडी खराब होने लगी तो उसे डीप फ्रीजर में रखना पड़ा। बता दें आनंदपाल ने अपने दुश्मनों और लोगों को सजा देन एक टार्चर रूम भी बनवाया हुआ था। जिसमें एक पिंजड़ा था, जिसमें किडनैप कर लाए गए लोगों को रखा जाता था। फार्महाउस में बना है ये टार्चर रूम...
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंदपाल लोगों को अगवा कर उन्हें टॉर्चर करता था। उसका टार्चर रूम की फोटोज वाकई हैरान कर देने वाली है। नौ बीघा जमीन में फैला फार्महाउस, खेत और झाड़ियां और बीच में 4 मंजिला हवेली में 2 मंजिल ऊपर अौर नीचे 2 मंजिल हैं। इसी मकान में आनंद पाल का टॉर्चर रूम। डॉन आनंदपाल के टॉर्चर रूम में चार फुट लंबा और ढाई फुट चौड़ा लोहे का पिंजड़ा रखा है।
ये पिंजरा ही इस टॉर्चर रूम की सबसे खौफनाक जगह है। फिरौती के लिए अगवा करके लाए गए लोगों को ये डॉन इसी पिंजरे में कैद रखता था। ये पिंजरा इतना छोटा है कि इसमें कैद शख्स ना तो ठीक से सो सकता है और ना ही ठीक से बैठ सकता है।
राजस्थान पुलिस के मुताबिक, आनंदपाल ने छात्र नेता जीवन राम गोदारा को इसी पिंजड़े में कैद करके मारा था। आनंदपाल ने अपने इस अड्डे को अभेद किले में तब्दील कर दिया था। इस मकान का हर दरवाजा, हर खिड़की लोहे की मोटी चादरों की बनाई गई है। जिनपर गोलियों का भी कोई असर नहीं होता। मकान की भीतरी दीवारों पर कई छोटे छोटे छेद बने हुए हैं।
पुलिस का कहना है कि इनका इस्तेमाल बाहर खड़े दुश्मन पर गोलियां बरसाने के लिए किया जाता था, यानी आनंदपाल के शैतान घर के भीतर से दुश्मन को ढेर कर देते, लेकिन वो खुद लोहे की चादरों के कवच में छिपे रहते हैं।
डॉन आनंदपाल कितना शातिर दिमाग है इसका अंदाजा उसके बंकरनुमा कमरे को देखकर लगाया जा सकता है। चारों तरफ लोहे की बड़ी-बड़ी खिड़कियां और दरवाजे इन खिड़कियों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कमरे में बैठे-बैठे बाहर खड़े दुश्मन पर निशाना साधा जा सके। साथ ही गैंग की हिफाजत का भी पूरा इंतजाम कर रखा था। नीचे की दो मंजिलों का इस्तेमाल आनंदपाल और उसके साथी सेफ हाउस के तौर पर करते थे। भीतर की ओर एक खुफिया तहखाना भी है जिसमें एक साथ कई लोग छिप सकते हैं।
अगले 48 घंटे में हो सकती है अंत्येष्टि
गैंगस्टर आनंदपाल के अंतिम संस्कार को लेकर 11 वें दिन मंगलवार को दिनभर हलचल रही। संभावना है कि अगले 48 घंटे में उसकी अंत्येष्टि हो सकती है। एडीजे कोर्ट ने आनंदपाल के भाई मंजीत सिंह की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए शव के अंतिम संस्कार की तिथि और समय पूछी है। कोर्ट अब बुधवार को जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा।
इधर, आनंदपाल के परिजनों की मांगे मनवाने को लेकर समाज सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। जयपुर में करणी सेना के संयोजक लोकेंद्र सिंह कालवी सरकार के साथ वार्ता की।
समाज का प्रतिनिधि मंडल एडीजी एनआरके रेड्डी से मिला। इसमें गिरिराज सिंह और महावीर सिंह सहित पांच लोग शामिल थे। सांवराद में आनंदपाल के परिजनों के मानवाधिकारों के हनन के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर सात बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
वहीं, आनंदपाल के पैतृक गांव सांवराद में तनाव बरकरार है। राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के नेतृत्व में यहां धरना जारी है। उनका कहना है कि सभी मांगे पूरी होने तक अंत्येष्टि नहीं की जाएगी। हरियाणा की साध्वी देवा ठाकुर को मंगलवार दिन में पुलिस ने सांवराद जाने से रोक दिया। साध्वी ने पुलिस पर मनमानी का आरोप लगाया है।
पर बतसर में एडीजे अनीश दाधीच की कोर्ट में मंजीत की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। एपीपी केएल आचार्य ने बताया की आनंदपाल के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वकील अनिल जोशी ने मंजीत की अंतरिम जमानत की अर्जी पेश की। उन्होंने 15 दिन की जमानत मांगी है।
सरकारी वकील ने अंतिम संस्कार और पगड़ी की रस्म में शामिल होने के लिए कड़ी सुरक्षा में मंजीत को कुछ घंटों के लिए कड़ी सुरक्षा में ले जाने का तर्क दिया। कोर्ट ने मंजीत के वकील को अंतिम संस्कार और पगड़ी कार्यक्रम का सही समय और दिन का शपथ पत्र पेश करने के लिए बुधवार तक का समय दिया है। उन्होंने 48 घंटे में अंत्येष्टि की बात कही है। मंजीत को अंतरिम जमानत देने की अर्जी पर इसी दिन फैसला होगा।


Post a Comment