आनंदपाल का 15 करोड़ का बुलेटप्रूफ टॉर्चर हाउस, घुप अंधेरे में चमगादड़ों के बीच लॉकअप
आनंदपाल एनकाउंटर के 23वें दिन रविवार को पुलिस ने प्रेस काॅन्फ्रेंस बुलाई। इसमें तीन एडीजी पीके सिंह, उमेश मिश्रा और एनआरके रेड्डी ने एनकाउंटर को लेकर नए तथ्य और सबूत सामने रखे। एडीजी पीके सिंह ने बताया कि आनंदपाल ने नागौर जिले में लाडनूं के पास एक बुलेटप्रूफ टॉर्चर रूम के साथ 15 करोड़ रुपए का फार्म हाउस बना रखा था। जहां आनंदपाल की गैंग ने एक शख्स की हत्या कर उसकी बॉडी के टुकड़े-टुकड़े कर एसिड में डाला, फिर हडि्डयां पीसकर फेंक दी थी।
एडीजी पीके सिंह ने बताया कि 1992 में आनंदपाल पर केस दर्ज होना शुरू हुए। इनमें मारपीट, मर्डर, अपहरण, डकैती, लूट जैसे 40 केस हैं। आनंदपाल और उसकी गैंग के सदस्य इस तरह से मर्डर करते थे कि रूह तक कांप जाए। पुलिस अफसरों के अनुसार नानूराम को आनंदपाल की गैंग ने पंखे से उल्टा लटका कर गर्दन काटने की कोशिश की। अधूरी कटी गर्दन समेत नानूराम के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।
- इसके बाद एसिड में डाल दिया। जब टुकड़े नष्ट हो गए तो दांत व हड्डियां निकाल कर पीस दी और फेंक दिया। आनंदपाल माइंस मालिकों से वसूली करता था। उसकी गैंग ने छोटी सी बात पर सेल्समैन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। गुमनाराम नाम के व्यक्ति के हाथ-पैर तोड़े। इसके बाद छाती पर बैठ कर गोली मार दी।
ऐसा है गैंगस्टर का टार्चर रूम
बेसमेंट :आनंदपाल का टार्चर रूम बेसमेंट में ठीक वैसा ही था, जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है। बिल्कुल घुप अंधेरा। आठ फीट की ऊंचाई। सिर्फ एक रोशनदान। लोगों को बंधक बनाने के लिए कई लॉकअप। टार्चर रूम में तीन सौ से ज्यादा चमगादड़। वसूली होने तक यहां पर लोगों को किडनैप करके रखा जाता था। इसके ऊपर दो मंजिला बिल्डिंग।
ग्राउंड फ्लोर : इस फ्लोर पर इस तरह की खिड़कियां, जिनमें गेट से आने वाले व्यक्ति को निशाना बनाकर फायर करने के लिए गोलाकार जगह। खिड़कियां ऐसी मोटी कि गोलियां भी नहीं भेद सकें। यह सब व्यवस्था इसलिए कि कभी पुलिस इस फार्म हाउस को घेरे भी तो आसानी से मुकाबला किया जा सके।
छत : सीमेंट-कंक्रीट से बंकरनुमा बनी हुई छत। जिसमें चारों तरफ इस तरह से जगह बनी हुई है, जैसे आर्मी टैंकों में बनी होती है। इनमें से गर्दन निकाल कर आसानी से निशाना साधा जा सकता है। यह फार्म हाउस सरकार ने नवंबर 2016 में कुर्क कर लिया है।
एनकाउंटर फर्जी नहीं, 3 एडीजी के ये दावे
सीबीआई में रहे अफसर मौका-मुआयना कर चुके एडीजी क्राइम पीके सिंह ने कहा कि सीबीआई बाहर की एजेंसी नहीं है। इसमें भी अलग-अलग राज्यों के अफसर होते हैं। राजस्थान पुलिस में भी 5 से 15 साल तक सीबीआई में रहने का अनुभव रखने वाले करीब 12 अफसर हैं। इनमें से कुछ इस मामले को देख चुके हैं। वे कह चुके हैं कि यह एनकाउंटर फर्जी नहीं है। हम भी हर एंगल से जांच कर चुके। फायरिंग के दौरान एक सैकंड की देरी होती तो आनंदपाल के निशाने पर आईपीएस सहित वे सब पुलिसकर्मी होते जो एनकाउंटर के दौरान सीढ़ियों में थे। फिर भी 11 जुलाई को एसआईटी गठित की है।
आनंदपाल के पास आय का कोई जरिया नहीं था, फिर भी बना ली करोड़ों की संपत्ति, बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं
एडीजी रेड्डी ने बताया कि आनंदपाल के पास कोई सोर्स आॅफ इनकम नहीं था। इसके बाद भी करोड़ों की प्रॉपर्टी बना ली। फार्म हाउस हैं। जयपुर में फ्लैट हैं। बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। आनंदपाल ने ये संपत्तियां अवैध तरीके से अर्जित की थी। आठ में से सात प्रॉपर्टी काे कुर्क कर लिया है। आनंदपाल ने अपने करीबी धर्मेन्द्र हरिजन की पत्नी के नाम भी प्राॅपर्टी ले रखी थी। इसे भी कुर्क किया गया है।

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