ये हैं दिल्ली की बाहुबली लेडी बाउंसर, बार में रात को 10 घंटे करती हैं जॉब
महरून्निसा को देखकर कोई भी यही अंदाजा लगाएगा कि वे एक साधारण भारतीय महिला की तरह रोज शाम को अपने काम पर जाती हैं। लेकिन उनका काम अलग है। वे यहां हौज खास इलाके के एक रेस्टरां बॉर में बाउंसर का काम करती हैं।
ऐसा करने वाली वे शायद पहली मुस्लिम महिला हैं। काली वर्दी में डांस फ्लोर के नजदीक अपने मजबूत हाथों को मोड़कर बड़ी-बड़ी आंखों से जब वे संगीत की धुन पर थिरकते जोड़ों को घुरती हैं तो किसी की क्या मजाल कि कोई किसी से भूलकर भी बेअदबी करे। महरून्निसा शौकत अली बीते एक दशक से बाउंसर का काम कर रही हैं। पिछले 3 महीने से तो वे रात को 10 घंटे की शिफ्ट पर रहती हैं। रेस्टोरेंट वाले उन्हें झगड़े निपटाने वाली बाहुबली के रूप में देखते हैं।
सोशल नाम के इस रेस्तरां के मालिक रियाज़ अमलानी कहते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही हमने महरून्निसा को बाउंसर के रूप में जगह दी है। दिल्ली से 200 किमी. दूर सहारनपुर की एक बड़े मुस्लिम परिवार की सदस्य महरून्निसा ने कभी आर्मी या पुलिस में अफसर बनने का सपना संजोया था, लेकिन परिवार की पितृसत्ता ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। वो तो उनकी मां ने जिदकर उन्हें प्राइमरी से आगे की शिक्षा दिलवा दी।
महरून्निसा को अपने काम से कोई शिकायत नहीं
फिर कुछ यूं हुआ कि महरून्निसा की जिंदगी ही बदल गई। पिता को शेयर बाजार में भारी नुकसान हुआ और पूरा परिवार दिल्ली आ गया। अब सवाल था दो बहनों और बड़ी बहन के तीन बच्चों के साथ पूरे परिवार का गुजारा कैसे हो? महरून्निसा को अपने काम से कोई शिकायत नहीं, सिर्फ इतना मलाल होता है कि ईद के पाक महीने में उसे रात की शिफ्ट करनी पड़ती है और परिवार की मायूसी उससे देखते नहीं बनती।
वे कहती हैं, “क्या फर्क पड़ता है। अम्मी और अब्बा को मुझपर यकीन तो है और मैं कुछ गलत भी तो नहीं कर रही।” महरून्निसा की राह पर उसकी छोटी बहन तरण्णुम (27) भी चल पड़ी हैं। दोनों बहनें मिलकर 30 हजार रुपए एक महीने में कमा लेती हैं। उन्हें फक्र है कि खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षाकर वे अपनी जिम्मेदारी को बखूबी पूरा कर रही हैं।

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