अपने आप खिसकते है ये पत्थर !! नासा के वैज्ञानिक भी नही सुलझा सके यह रहस्य
दुनिया कई प्रकार के रहस्यों से भरी पडी है और इस संसार में इन रहस्यों का आज तक किसी को पता नही चल पाया कि आखिर कैसे ये मुमकिन है। वैसे आपने सुना होगा की बरमुडा ट्रायंगल में अपने आप कोई भी जहाज संपर्क में आते ही समुद्र में समां जाता है। आज तक वैज्ञानिक भी इस गुत्थी केा सलझा नही पाएं है। इसी तरह के दुनिया में कई रोचक और खतरनाक रहस्य है जो दुनिया के लिए परेशानी का सबब बने हुए है। वैसे आपने पत्थर तो देखे ही होंगे बडें और छोटे सभी प्रकार के, वैसे आपको तो पता ही होगा कि पत्थर जो कि बिना किसी सहायता के कही भी नही जा सकतें है, लेकिन क्या कभी आपने ऐसा सुना या देखा है कि कोई पत्थर जो अपने आप खिसकता है और लगभग मीलो की दूरी तय कर चुका है !! सुनकर दंग रह गए ना लेकिन दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां पर पडें हजारों पत्थर अपने आप खिसकते है और ये वैज्ञानिक भी नही पता लगा पाए है कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। आइए, आपको बताते है इस विचित्र घटना के बारें में
रहस्य के बारें में आपने कई बार देखा और सुना होगा। एक ऐसा ही रहस्य है पूर्व कैलिफ़ोर्निया के रेगिस्तान मे। जिसें दुनिया डेथ वैली के नाम से जानती है। यह एक रेगिस्तान है जहां पर तापमान सबसे ज्यादा रहता है। यह उत्तरी अमेरिका का सबसे गर्म, सूखा और विचित्र स्थान है।इस जगह पर भी वैज्ञानिकों को हमेशा कुछ न कुछ चौंकाने वाला मिलता है।
कैलिफोर्निया के डेथवैली की संरचना और तापमान भू-वैज्ञानिकों को हमेशा से चौंकाता रहा है। लेकिन अगर यहा किसी चीज ने सबसे ज्यादा परेशान किया है तो वह है यहा के अपनेआप खिसकने वालें पत्थर। जी हां, सही सुना आपने इस रेगिस्तान के पत्थर बिना किसी की सहायता के सरकते हैं।
इन खिसकते पत्थरों को सेलिंग स्टाॅस के नाम से जान जाता है। आप ये सुनकर और भी हैरान रह सकते है कि यहा के रेसट्रैक क्षेत्र में 320 किलोग्राम तक के पत्थरों को जगह बदलते देखा गया है। और वे अपनी जगह से खिसकते हुए दूसरी जगह जाते है।
कैलिफोर्निया की डेथ वैली में इन पत्थरो का अपने आप खिसकना दुनिया के लिए पहेली के साथ रहस्य भी बना हुआ है। लोगो को पता नही चल पा रहा है कि आखिर कैसे पत्थर एक जगह से दूसरी जगह पर चले जाते है। यहां बने रेसट्रैक करीब 6 किमी तक चारों और फैले हुए है। और यहा पर आसपास के पडें सारें पत्थर अपने आप आगे की ओर बढ रहें है।
इससे भी चैकाने वाली बात ये है कि यहा के पत्थर सर्दियों में करीब 250 मीटर तक खिसक जाते है। वैज्ञानिको की टीम ने सबसे पहले इस जगह के रहस्य को स लझाने के लिए 1972 में अपनी एक टीम बनाकर यहां खोज शुरू की थी। टीम ने पत्थरों के एक ग्रुप का नामकरण कर उस पर सात साल अध्ययन किया।
इनमें से एक केरीन नाम का पत्थर लगभग 317 किलोग्राम का था जो अध्ययन के दौरान ज़रा भी नहीं हिला। लेकिन जब वैज्ञानिक कुछ साल बाद वहां वापस लौटे, तो उन्होंने केरीन को 1 किलोमीटर दूर पाया। अब वैज्ञानिकों का यह मानना है कि तेज रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण ऐसा होता है। लेकिन भला ऐसी कौनसी गति से हवा चली होगी कि 317 किलों के पत्थर अपने आप खिसक गया।
वही दुसरें वैज्ञानिकों का मानना है कि इन पत्थरों की इस अद्भुत गतिविधि का कारण मौसम की खास स्थिति हो सकती है। एक अन्य शोध के मुताबिक रेगिस्तान में 90 मील प्रति घंटे की गति से चलने वाली हवाएं, रात को जमने वाली बर्फ और सतह के ऊपर गीली मिट्टी की पतली परत, ये सब मिलकर पत्थरों को गतिमान करते होंगे।
बिना किसी हलचल या बल प्रयोग के खिसकते ये पत्थर 1900 के दशक से रहस्य बने हुए है और यहां के लोग इसें उपर वाले की कोई अद्भूत शक्ति मानते है। इतने ही साल से वैज्ञानिक भी इनका कारण पता लगा रहे हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इनका राज जानने के लिए शोध कर चुकी है। वहीं स्पेन की कम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिकों की टीम ने इसका कारण मिट्टी में मौजूद माइक्रोब्स की कॉलोनी को बताया था।
वैसे तो कई वैज्ञानिको ने अपनी अपनी राय दी है लेकिन अभी तक ये साफ तौर पर जाहिर नहीं हो पाया है कि आखिर इसका राज क्या है और क्यों पत्थर अपने आप अपने स्थान से खिसक जाते हैं। और पत्थरों का मीलो मील अपने आप खिसकना बिना किसी सहायता के संभव नही हो सकता। और यही सरदर्द वैज्ञानिको के लिए आज तक बना हुआ है।


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