कभी नहीं नहाती यहां कि महिलाएं, फिर भी मानी जाती हैं सबसे खूबसूरत !!
खूबसूरती एक ऐसा शब्द है जिसे किसी परिभाषा या फिर किसी को बताने की जरूरत नही है। वह तो सिर्फ देखने और महसूस करके ही प्राप्त की जा सकती है। दुनिया में कई ऐसी जगह है जिनकी खूबसूरती की लोग मिसाल दिया करते है। इन जगहों पर लोग जाना पसंद करते है।
वैसे खूबसूरती का दूसरा पर्याय इंसान को माना जाता है। और उनमें भी सबसे ज्यादा महिलाओं को। लेकिन बदलते समय के साथ और अनेको सौंदर्य प्रसाधनों के चलते खूबसूरती के मायने ही बदल चुके है। वैसे महिलाए अपनी खूबसूरती को ज्यादा निखारने के लिए कई प्रसाधनों का उपयोग भी करती हैं। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि दुनिया में एक ऐसी भी जगह है जहां कि महिलाएं और लड़कियां अपने जीवन में कभी भी नही नहाती है लेकिन उसके बावजूद भी वे सबसे खूबसूरत मानी जाती है !! जानकर आप भी हैरान रह गए ना ! लेकिन यह सत्य दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां कि रहने वाली महिलाएं कभी नही नहाती है, लेकिन फिर भी मानी जाती है सबसे खूबसूरत
विश्व के कई आदिवासी क्षेत्र है, जिनके बारें में आज भी लोगो को ज्ञान या उनके बारें में कुछ भी पता नही है। ऐसी ही एक जनजाति है अफ्रीका के नार्थ नामीबिया के कुनैन प्रांत में यहां रहती है हिम्बा जनजाति। हिम्बा जनजाति की महिलाओं को नहाने की इजाजत नहीं है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फिर भी यहां के महिलाओं को अफ्रीका की सबसे खूबसूरत महिलाओं का दर्जा हासिल हैं। बता दें, अफ्रीका के कुनैन प्रांत में रहने वाले हिम्बा जनजाति में कुल 20 हजार से 50 हजार लोग हैं।
दरअसल, हिम्बा जनजाति में किसी भी महिला को नहाने की इजाजत नही दी गई है और ऐसा इसलिए है कि वहां के लोगो ने यह नियम बना रखा है। और यह प्रथा कई वर्षो से चली आ रही है जिसका आज भी लड़कियां और महिलाएं निर्वाह कर रही है। यहां रहने वाली महिलाएं अपने जीवन में सिर्फ पीने के लिए ही पानी का इस्तेमाल करती है और इसके अलावा कभी भी पानी का इस्तेमाल नही करती है।
आपको बता दें कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा जनजाति की महिलाएं नहाने के लिए तो दूर हाथ तक धोने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। और ऐसा उनके लिए सख्त और कठोर नियम बना रखा है। हालांकि वहां कि महिलाएं अपने आप को साफ-सुथरा रखने और अपनी खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कुछ खास तरीका अपनाया हुआ है जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
दरअसल, हिम्बा जनजाति की महिलाएं नहाने की जगह खास जड़ी-बूटियों को पानी में उबालकर उसके धुंए से अपनी बॉडी को फ्रेश रखती हैं। ताकि उनसे बदबू ना आए। इस हर्ब की खुशबू से इनकी बॉडी कभी ना नहाने के बाद भी अच्छी स्मेल करती है। और यही धुंआ ही उनकी बाॅडी को ताजगी प्रदान करता है साथ ही उनके शरीर के सारं किटाणुओं को भी नष्ट कर देता है। जिसकी वजह से वो बिमारी का शिकार नही हो पाती है।
इसके अलावा यहां कि महिलाएं अपनी बाॅडी को धूप से बचाने के लिए खास तरह के लोशन का इस्तेमाल करती हैं। जो वे अपनी शरीर पर लगाती है। दरअसल, ये लोशन जानवर की चर्बी और हैमाटाइट के घोल से तैयार किया जाता है। हैमाटाइट की धुल की वजह से उनकी स्किन का रंग लाल हो जाता है। ये खास लोशन उन्हें कीड़ों के काटने से भी बचाता है। ये लोशन ही इनकी बाॅडी को हमेशा ताजा बनाए रखने में मदद करना है। और यही लोशन यहां के लगभग हर लोग इस्तेमाल करते है।
चर्बी और हैमाटाइट के घोल लगाने और यहां कि धुल के शरीर पर लगने से इनकी स्किन लाल रंग की हो जाती है यही लोशन इन्हें बिमारी और शरीर की बदबू से बचाए रखता है। स्किन के लाल होने के कारण इन महिलाओं को रेड वुमन और पुरूषो को रेड मैन के नाम से भी जाना जाता है।
हिम्बा जनजाति के लोगो का हेयरस्टाइल भी अजीब और अनोखा है। यहां के पुरूष सिर पर केवल एक चोटी बनाकर रखते है वो भी सींगनुमा होती है। हालांकि यहां कि शादीशुदा पुरूष अपने सिर पर पगड़ी पहनते हैं। इससे भी ज्यादा हैरानी वाली बात यह है कि यहा जिन पुरूषो की शादी हो जाती है वे शादी के बाद अपने सिर से कभी भी पगड़ी नही उतारते है।
जहां पुरूषों में सींगनुमा हेयरस्टाइल का प्रचलन है तो वही महिलाओं की हेयरस्टाइल और भी अनोखी है। यहां दरअसल, बालों को मोटी लटों में बांटने के लिए महिलाएं लाल मिट्टी व मक्खन के लेप को घंटों घिसती रहती हैं। एक युवा लड़की आमतौर पर दो चोटी रखती है, जिसे यहां ओजोनडाटो बुलाया जाता है। इन महिलाओं को अपने बाल बनाने और चोटी तैयार करने में घंटो लग जाते है।
हिम्बा संस्कृति में विवाह काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां शादी को त्यौहार की तरह माना जाता है और इसके लिए सभी प्रकार के रिवाज अपनाए जाते है। हालांकि, हिम्बा में शादी के बाद भी किसी के साथ भी संबंध बनाए जा सकते है। इसके अलावा यहा बहुविवाह महिला व पुरुष दोनों के लिए नियम है। वे आसानी से किसी के साथ भी शादी कर सकते है।
हिम्बा में वैसे तो पुरूषों और औरतों दोनो का ही समान अधिकार चलता है। यहां शादी हमेशा दो अलग-अलग समूह के लोगो के साथ की जाती है। वैसे तो यहां भी पुरूषों के पास ही सारी जिम्मेदारियां होती है लेकिन उसके बावजूद भी आर्थिक निर्णय का अधिकार केवल यहां कि महिलाओं के पास ही है और परिवार में किसी भी तरह के खर्च पर महिलाओं की स्थिति निर्णायक है।
वैसे तो आपको भी पता है कि भारत में हिंदूओं के लिए गाय का कितना अधिक महत्व है, उसी प्रकार हिम्बा जनजाति में भी गाय का एक अहम महत्व है। दरअसल, दूसरी जनजातियों की ही तरह हिम्बा के लोग भी गाय पर निर्भर हैं। जानकारी के मुताबिक, गोजातीय साथियों के बिना हिम्बा का व्यक्ति सम्मान योग्य नहीं माना जाता है।













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