9 की उम्र में महाराणा प्रताप ने जीता था पहला युद्ध, पिता नहीं बनाना चाहते थे राजा
आज महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि है। प्रताप पर रिसर्च करने वाले डॉक्टर चन्द्रशेखर शर्मा ने अपने रिसर्च पेपर में बताया है कि प्रताप बचपन से ही युद्ध में सेना के साथ पराक्रम दिखाते रहे थे। उन्होंने अपना पहला युद्ध केवल 9 साल की उम्र में लड़ा था।
9 मई 1540 में जन्में महाराणा का काफी वक्त कुंभलगढ़ में गुजरा। जहां उनकी मां जैवन्ताबाई से ही उन्होंने युद्ध कौशल के बारे में जाना। इसके बाद चित्तौड़गढ़ दुर्ग में भी उनके रहने की व्यवस्था राजसी ठाठ-बाठ से अलग तहखाने में की गई। कारण था कि महाराणा के प्रति पिता उदयसिंह का कम लगाव।
- इस दौरान ही उन्होंने अपनी शिक्षा भी पूरी की। सन 1549 में उदयसिंह और डूंगरपुर के रावल आसकरण के बीच सोम नदी के किनारे पर युद्ध हुआ। इस युद्ध में प्रताप ने भी हिस्सा लिया। इस वक्त उनकी उम्र मजह 9 साल थी।
- प्रताप ने इस युद्ध में सलूम्बर के राठौड़ों को परास्त कर छप्पन क्षेत्र को मेवाड़ राज्य के अधीन किया था। इसके बाद उन्होंने कई युद्ध लड़े। जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई।
- डॉक्टर चन्द्रशेखर शर्मा की किताब राष्ट्ररत्न महाराणा प्रताप के अनुसार उदयसिंह अपनी चहेती रानी धर कंवर के पुत्र जगमाल को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था।
- उदयसिंह की मौत 28 फरवरी 1572 में हुई। राजवंशों में यह परम्परा रही कि बड़ा बेटा या उत्तराधिकारी मृत शासक की अंतिम क्रिया में हिस्सा नहीं लेता। वे शवयात्रा के बाद सिंहासन पर बैठता है। जिससे गद्दी खाली ना रहे।
- जब बड़े बेटे महाराणा प्रताप अंतिम संस्कार में पहुंचे तो सभी को पता चला कि जगमाल अगला उत्तराधिकारी होगा।
- इसके बाद प्रताप के मामा समेत कई लोगों ने जगमाल के उत्तराधिकारी बनाए जाने का विरोध किया। जिसके बाद जगमाल को गद्दी से हटा के महाराणा प्रताप की ताज पोशी 28 फरवरी 1572 को ही की गई।

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