ड्राइवर को अपनी सीट पर बिठा IAS ने चलाई गाड़ी, पार्टी देकर उसे घर तक छोड़ा
यहां के डीएम उदय कुमार सिंह के गाड़ी के ड्राइवर संपत राम आैर कलेक्ट्रेट का एक अन्य कर्मचारी शनिवार काे रिटायर्ड हाे गए। इस दौरान एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के बाद जब ड्राइवर के घर जाने की बारी आई तो डीएम ने खुद गाड़ी की स्टेयरिंग संभाल ली। उन्होंने ड्राइवर से कहा कि आज आप पीछे बैठिए, मैं आपको घर तक छोड़ूंगा।
बता दें कि डीएम ने अपने ऑफिस के दोनों कर्मियों के सम्मान में समारोह का आयोजन किया। इसमें डीएम ने ड्राइवर संपत राम आैर अन्य कर्मचारी परमेश्वर कुमार काे भविष्यनिधि और अन्य राशि का चेक दिया। कार्यक्रम खत्म हाेने के बाद डीएम ने ड्राइवर संपत राम से कहा कि आज हम ड्राइवर बनते हैं और तुम हमारी सीट पर बैठो। हम चालक बन कर तुमको तुम्हारे घर तक छोड़ देते हैं। इसके बाद डीएम ने ड्राइवर काे अपनी सीट बिठा खुद गाड़ी चलाते हुए उसे घर तक जाकर छोड़ा।
इधर, ड्राइवर संपत राम ने कहा कि हमने 34 वर्ष 7 माह 13 दिन तक सरकार की सेवा की। डीएम साहब ने इस दौरान मुझे किसी चीज की कमी नहीं हाेने दी। डीएम साहब ने कहा कि चलो गाड़ी पर। हम अपनी सीट पर बैठने के लिए गेट खोलने लगे- तभी साहब ने कहा कि नहीं, आज गाड़ी मैं चलाऊंगा और आप मेरी सीट पर बैठेंगे। मैं कुछ समझ नहीं पाया और न साहब को गाड़ी चलाते देखा था। मैंने उनको चाबी दे दी और साहब ने मेरे लिए पीछे वाले गेट को खोल दिया। इसके बाद बैठते ही मेरे आंखों में आंसू अा गए। इसके बाद साहब गाड़ी चलाते हुए मेंरे घर पर पहुंचे तो मेरी पत्नी गीता देखते ही रह गई। मोहल्ले के लोग भी आश्चर्यचकित होकर यह देखने पहुंच गए कि यह क्या हो गया? बिहार में इस तरह का शायद यह पहला मामला है।
संपत राम ने कहा- मुझे उम्मीद नहीं थी कि डीएम साहब ऐसा करेंगे। पहले से यह जानकारी जरूर थी कि मैं रविवार को रिटायर्ड हो रहा हूं। पर विशेष कार्यक्रम और इस सम्मान के बारे में नहीं जानता था। शनिवार शाम साढ़े चार बजे डीएम साहब को लेकर कलेक्ट्रेट के पोर्टिको में पहुंचा तो यह सब देख कर आंखों से आंसू छलक पड़े।
डीएम ने कहा कि ड्राइवर के सेवा भाव से लगा कि जो व्यक्ति हमारे यहां करीब 36 वर्षों से सेवा दे रहा है, आज वह रिटायर्ड हो रहा है। नौकरी के आखिरी दिन मैं इसकी सेवा करूं। मैं अपने चालक संपत राम को बिना बताए कई दिनों से उसके लिए विदाई समरोह की तैयारी कर रहा था। यह कोई आइडिया नहीं था, मेरी आत्मा की आवाज थी। जिसने इतने दिनों तक हमारी सेवा की, आज उसकी सेवा की जाए।

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