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ये है गुजरात के विकास की असली तस्वीर, अकेला बाबेन गांव दे रहा देश के हाईटेक शहरों को टक्कर

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इस चुनाव में विकास के मुद्दे को खूब उछाला गया। आज हम आपको गुजरात के उस गांव की तस्वीर दिखा रहे हैं, जिसे किसी पार्टी या सरकार द्वारा विकास की जरूरत नहीं पड़ी। यहां के लोगों ने खुद ही पूरे गांव को पूरे देश के लिए रोल मॉडल बना दिया है।


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बाबेन गांव में तालाब किनारे स्टैचू ऑफ यूनिटी की Replica भी लगाई गई है


हम बात कर रहे हैं सूरत जिले के बाबेन गांव की। 13 हजार की आबादी वाले इस गांव की किस्मत प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, जिसकी शुरुआत 2014 में हुई थी, उससे 7 साल पहले यानी की 2007 से ही चमकना शुरू हो गई थी। गांव के सरपंच भावेश भाई के नेतृत्व में बाबेन गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए पंचायत के सभी 19 सदस्यों ने संकल्प लिया था। साल 2011 में गुजरात सरकार द्वारा बाबेन गांव की ग्राम पंचायत को ‘बेस्ट ग्राम पंचायत ऑफ द ईयर’ अवार्ड्स से भी सम्मानित किया जा चुका है।


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बाबेन गांव का स्कूल


13 हजार की आबादी वाले इस गांव में कुल 8500 मकान है, जिनमें से 95 प्रतिशत मकान पक्के हैं। इस गांव में गटर, पानी, स्ट्रीट लाइट सहित सभी प्राथमिक सुविधा मौजूद हैं। गांव में आंगनबाड़ी और पंचायत घर के साथ-साथ कम्युनिटी हॉल भी बन चुका है।


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गांव में स्थित शुगर मिल में ही मिल जाता है ग्रामीणों को रोजगार


इसके अलावा इस गांव में बच्चों के पढ़ने के लिए प्राइमरी स्कूल और हाई स्कूल भी मौजूद है। गांव में बैंक डाक घर के लिए अलग भवन बना हुआ है और इस गांव में एंबुलेंस सुविधा भी खुद गांव वालों ने शुरू की है। शुगर मिल के कारण गांव के लोगों को नौकरी के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
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शहरों से भी अच्छी हैं इस गांव की 12 फीट चौड़ी सड़कें


इस गांव की पंचायत के एक करोड़ रुपए बैंक में फिक्स डिपॉजिट रखे हुए हैं। गांव के अंदर ही 12 फीट चौड़ी पक्की सड़कें और उसके दोनों तरफ स्ट्रीट लाइट्स लगी हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि सड़क का निर्माण सरकारी सहायता से नहीं, बल्कि पंचायत द्वारा ही करवाया गया है।


गांव में साफ पानी के लिए लगी पानी की टंकी


इस गांव के बीचों-बीच बड़ा पक्का तालाब है, और वो बिल्कुल साफ रहता है। तालाब के चारों ओर का नजारा भी इतना खूबसूरत है कि इसे देखने दूर-दराज के लोग यहां आते हैं। गांव में साफ पानी की भी व्यवस्था है। पानी सप्लाई के लिए पूरे गांव में पाइप लाइनें डाली गई हैं। पूरे गांव में ऐसा कोई घर नहीं, जिसे पानी की कमी का सामना करना पड़ता हो। यहां पानी की टंकी का निर्माण पंचायत ने ही करवाया है।


सुबह-सुबह होती है रोज सड़कों की सफाई


अब अगर आप सोच रहे हैं कि इस गांव में सफाई व्यवस्था का हाल और गांवों की तरह होगा तो आप बिल्कुल गलत हैं। यहां की सड़कें साफ करने के लिए 22 सफाई कर्मचारियों की पूरी टीम है। वो सुबह-सुबह ही अपने काम में लग जाती है। वहीं, हर घर से सुबह-शाम कचरा उठाने के लिए पंचायत की गाड़ी आती है।