इन महिलाओं के कारण महात्मा गाँधी ने मरते दम तक नहीं पहने थे कपड़े
जब भी भारत देश की आजादी की बात की जाती है तो सबसे पहले महात्मा गाँधी को याद किया जाता है.
क्यों की बापू की वजह से ही हम अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हुए है. हालांकि बापू के अलावा भारत के कई वीर सेनानियों ने भारत की आजादी के लिए अपने प्राणो की आहुति दी है.
ताकि हमें अंगेजो के चंगुल से बाहर निकाला जा सके. वैसे तो महात्मा गांधी जी का पूरा जीवन कई दुखों से भरा हुआ है.
बापू ने भारत को आजाद कराने में किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी थी. सदैव सत्य, अहिंसा और धर्म के रास्ते पर चलते हुए उन्होने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ दिया.
वैसे तो हम सभी बापू के कई आंदोलनों के बारे में भली भाती जानते है. इन आंदोलन में से एक आंदोलन था चंपारण आंदोलन.
आपकी जानकारी के लिए बता दे की इस आंदोलन को 100 साल हो चुके हैं महात्मा गांधी के लिए यह सफर आसान नहीं था. जब बापू चंपारण आए थे तो यहां के आम व्यक्ति तो उन्हें जानते ही नहीं थे.
चंपारण आंदोलन के प्रारम्भिक दिनों में तो बापू को कई प्रकार का संशय था. महात्मा गाँधी को हमने जब भी देखा तो वह अक्सर धोती में दीखते थे.
लेकिन क्या आप जानते है कि महात्मा गाँधी के सिर्फ धोती पहनने के पीछे का कारण क्या था. आखिर ऐसा क्या कारण था की महात्मा गांधी ने मरते दम तक धोती के अलावा कुछ नहीं पहना था.
महात्मा गाँधी जब चंपारण आंदोलन कर रहे थे तब उन्हें काफी परेशान किया जा रहा था. उस समय बापू को कई तरह की प्रताड़नाओं का सामना भी करना पड़ा था.
हालांकि इतनी प्रताड़नाओं के बावजूद भी गाँधी जी ने उनकी एक भी बात नहीं मानी और आंदोलन पर डते रहे. बापू के इस आंदोलन के चलते सरकार ने बापू को चंपारण से चले जाने का नोटिस दिया था.
बापू ने जब मुजफ्फरपुर के कमिश्वर से मुलाकात की तो उन्होंने बापू को इस बात को वही पर खत्म करने का कहकर चंपारण आंदोलन समाप्त करने की बात कही साथ ही किसी भी किसान की मदद करने से भी रोका था.
लेकिन महात्मा गाँधी ने उनकी किसी भी बात को मानने से साफ इंकार कर दिया और अपनी राह पर आगे बढ़ते रहे.
महात्मा गाँधी ने उन लोगो की एक भी बात न मानते हुए किसानों के लिए सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की. जब अधिकारियों ने महात्मा गाँधी को धमकाया तो इस बात की जानकारी तीन औरतों को पता थी.
चंपारण और सत्याग्रह के आंदोलन के दौरान जो कुछ भी हुआ इसकी गवाही के लिए तीन महिलाओ को आना था. उन महिलाओ के पास साड़ी नहीं थी.
तीनों महिलाओ के पास महज एक साबुत साड़ी थी. महिलाओ की इस समस्या के कारण गवाही पर तो संकट के बादल छा रहे थे.
हालांकि पहले तो उन औरतों ने आने से ही मना कर दिया था. लेकीन एक औरत आई जिसके पास साड़ी थी.
गवाही होने के बाद वह महिला घर गई और दूसरी महिला को अपनी साड़ी दे दी. इस तरह एक एक कर तीनों महिला ने गवाही दी. महिलाओ की ऐसी हालत को देखकर बापू को बड़ा धक्का लगा.
बापू ने देखा की उनके देश की जनता का हाल बेहाल है. बापू ने कहा की आज के बाद वह कपड़े त्याग करते है.
अब वह केवल धोती ही पहनेंगें. उस दिन से लेकर मरते दम तक महात्मा गाँधी ने सिर्फ धोती के आलावा कुछ नहीं पहना.


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