इसी स्कूटर से बेचते थे नमकीन-बिस्किट, ऐसे बने अरबों की कंपनी के मालिक
सहारा इंडिया परिवार हेड सुब्रत रॉय रविवार को गोरखपुर में थे। वो अगले दो दिन भी यहीं रहेंगे। इस दौरान वो सहारा के डायरेक्टर स्तर के कर्मचारियों और मंडलीय कर्मचारियों से मिल रहे हैं। उन्होंने कहा- ''मैं जब भी गोरखपुर आता हूं, मुझे बहुत अच्छा लगता है। ये मेरा घर है। पूरी दुनिया में तमाम शहर हैं लेकिन गोरखपुर मेरे लिए खास है। उम्मीद है कि सहारा की मुश्किलें जल्द खत्म हो जाएंगी। लेकिन, ये मेरे हाथ में नहीं है। हम आशावादी होकर उम्मीद ही कर सकते हैं।''
सुब्रत रॉय का जन्म 10 जून, 1948 को बिहार के अररिया जिले में हुआ था। कोलकाता में शुरुआती पढ़ाई करने के बाद सुब्रत रॉय ने गोरखपुर के एक सरकारी कॉलेज से मैकेनिकल इंजिनियरिंग की।
- गोरखपुर में सहारा की शुरुआत 1978 के समय सुब्रत रॉय की जेब में महज 2000 रुपए ही थे। वो गोरखपुर में एक स्कूटर से चलते थे। तब दिन में 100 रुपए कमाने वाले लोग उनके पास 20 रुपए जमा कराते थे।
- सहारा ने शुरुआत में एजेंट्स के जरिए लोगों से पैसा इकट्ठा करना शुरू किया। छोटे से शहर से बिजनेस शुरू करने वाले इस शख्स ने 36 सालों में दुनिया भर में अपना कारोबार फैला लिया।
- फिलहाल सहारा के पास देश भर में 10 लाख एजेंट हैं। सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी (एससीसीएस) के जरिए सहारा ने २०१०, से फिक्सड डिपॉजिट भी शुरू कर दिया।
- सहारा ई. शाइन, सहारा यू. गोल्डन, सहारा क्यू शॉप सरीखी कई स्कीम्स से पैसा इकट्ठा किया जाता है। आज देश से लेकर विदेश तक सहारा ग्रुप की करोड़ों की प्रॉपर्टी फैली हुई है। लखनऊ में भी सुब्रत रॉय की काफी प्रॉपर्टी हैं।
कभी गोरखपुर से शुरू हुआ 'सहारा' का सफर आज अरबों रुपयों तक पहुंच चुका है। पॉलिटिक्स, बॉलीवुड और स्पोर्ट्स के दिग्गज स्टार्स इस ग्रुप से जुड़े रहे हैं।
- सुब्रत रॉय के लिए कहा जाता है कि एक जमाने में वे बिस्किट और नमकीन बेचा करते थे। वो भी लंब्रेटा स्कूटर पर। आज ये स्कूटर कंपनी मुख्यालय में रखा हुआ है।
- एक समय ऐसा था कि रॉय को उनका व्यापार शुरू करने के लिए एसबीआई ने पांच हजार रुपए का लोन देने से मना कर दिया था, लेकिन उन्होंने एक मित्र के साथ छोटी सी चिट फंड कंपनी शुरू की। इसके बाद शुरू हुई सफलता की कहानी।
'सहाराश्री' रॉय का पद 'मैनेजिंग वर्कर' का है। वे मैनेजिंग डायरेक्टर कहलाना पसंद नहीं करते। 80 के दशक में वे निवेशकों से प्रतिदिन पांच से दस रुपए निवेश करने को कहते थे।
- कम रकम होने की वजह से लाखों की संख्या में निवेशकों ने पैसा लगाया। जिससे रॉय की संपत्ति और कंपनी बढ़ती चली गई। लेकिन, ये सफर नवंबर 2013 में आकर थम गया, जब सेबी ने निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने पर सहारा समूह के बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया।
10 जून 1948 को बिहार के अररिया जिले में जन्मे सुब्रत राय सहारा एक व्यवसायी और सहारा इंडिया परिवार के संस्थापक, प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष हैं।
- वे 'सहाराश्री' के नाम से भी जाने जाते हैं। इंडिया टुडे ने उनका नाम भारत के 10 सर्वाधिक शक्ति सम्पन्न लोगों में शामिल किया था। उन्होंने सन् 1978 में सहारा की स्थापना की।
- वे पुणे वॉरियर्स इंडिया, ग्रॉसवेनर हाउस, एमबी वैली सिटी, प्लाजा होटल, ड्रीम डाउनटाउन होटल के मालिक भी हैं।
सुब्रत रॉय ने सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी बनाई थी।
- आरोप है कि इसके जरिए उन्होंने रियल एस्टेट में इंवेस्टमेंट के नाम पर 3 करोड़ से अधिक इंवेस्टर्स से 17,400 करोड़ रुपए इकट्ठा कर लिया था।
- सितंबर 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने आईपीओ लाने के लिए सेबी में डॉक्यूमेंट जमा किया। सेबी ने अगस्त, 2010 में दोनों कंपनियों के जांच का आदेश दिया था।
- जांच में खामी पाने पर सेबी ने सवाल उठाए तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रुप की दोनों कंपनियों को इंवेस्टर्स को 24,000 करोड़ रुपए लौटाने के आदेश दिया था। उसे नहीं चुकाने के मामले में वे 4 मार्च २०१४, से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे।
- सहारा की मां छवि राय के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 6 मई 2016 को पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। तभी से वो जेल से बाहर हैं।

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