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'पद्मावती' के लहंगे से शाहिद के अंगरखा तक, इन्होंने किया है कॉस्ट्यूम डिजाइन




फिल्म पद्मावती के लिए कपड़ों को डिजाइन करने के लिए संजय लीला भंसाली ने डिजाइनर रिम्पल और हरप्रीत नरूला से कहा था। दिल्ली की इस डिजाइनर जोड़ी का यह पहला फिल्मी प्रोजेक्ट था।

दरअसल, फिल्म पद्मावती के 'घूमर' गाने में दीपिका पादुकोण के डांस के साथ-साथ उनका मैरून कलर का लहंगा भी चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि गोल्डन कलर के मोटिफ उस लहंगे की सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं। खबरों की मानें तो इस लहंगे की कीमत करीब 30 लाख रुपए और वजन 30 किलो है।



- दिल्ली की रिंपल और हरप्रीत नरूला ने बताया, '' इस प्रोजेक्ट पर काम करने से पहले हम नहीं जानते थे कि फिल्म इंडस्ट्री में डिजाइनिंग और कॉस्ट्यूम पर काम कैसे होता है। शायद निजी तौर पर संजय लीला भंसाली भी यही चाहते थे और इसलिए हमारे जैसी नई प्रतिभा पर भरोसा करके हमें इतना बड़ा प्रोजेक्ट दिया। तीन बड़े सितारों के लुक पर काम करना एक बहुत बड़ी परीक्षा थी।


हम अपने ट्रायल के लिए हर आउटफिट़्स डिजाइन करते समय लगातार भंसाली के साथ रहते थे। शाहिद ऐसे अभिनेता हैं जो खुद को किरदार में पूरी तरह ढाल लेते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी है कि जब वह अंगरखा पहनकर दिखाते थे तो हर बार लगता था कि वास्तव में महाराज रतन सिंह जीवंत खड़े हैं।''


केलिको और जयपुर म्यूजियम से मिली प्रेरणा

- चौदहवीें सदी के चितौड़गढ़ में जिस तरह के कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता था। उन्हें दोबारा बनाने के लिए क्या प्रयास किए ?


- इस बारे में रिंपल-हरप्रीत ने बताया कि चौदहवीं सदी के चित्तौड़ के संबंध में ऐतिहासिक दस्तावेज की अधिक जानकारी नहीं है और न ही कोई अवशेष हैं। अहमदाबाद का केलिको म्यूजियम और जयपुर संग्रहालय में मौजूद ऐतिहासिक तथ्य और धरोहर ही उनके लिए प्रेरणा और अध्ययन का एकमात्र स्रोत था। उन्होंने तय किया कि ऑर्गेनिक मलमल, सिल्क, कॉटन और ऊनी कपड़ों का ही प्रयोग करेंगे। मलमल, सिल्क और ऊनी वस्त्र तैयार करने के लिए बुनकरों और शिल्प समूहों को नियुक्त किया।


- राजस्थान में ब्लॉक प्रिंटिंग के मशहूर केन्द्र बगरू और सांगानेर में ब्लॉक प्रिंटिंग का काम किया गया। मल्टी कलर के लहरिया प्रिंट का सेंपल देखना चाहें तो यह लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट संग्रहालय में है। संग्रहालय में कई प्रिंटेड वस्त्र पुराने दौर के रखे हुए हैं, जिनमें पारंपरिक कढ़ाई जैसे मुक्के का काम भी किया है।


- पहले ही प्रोजेक्ट में संजय लीला भंसाली के साथ काम करने का मौका मिला। ऐसे में बतौर कला निर्देशक उनसे क्या सीखा इस सवाल के जवाब में हरप्रीत ने बताया कि भंसाली के साथ काम करना बतौर डिजाइनर हमारे लिए प्रेरणादायी रहा। उनका विजन बहुत अच्छा है। वे जिन किरदारों की कल्पना करते हैं वे असल बन जाते हैं।


 हमारी उनसे पहली मुलाकात पुराने कपड़ों के साथ लुक टेस्ट को लेकर हुई थी। असली कॉस्ट्यूम में एक्टर्स कैसे दिखाई देंगे इस पर चर्चा होती थी। कभी किसी तरह का कोई विवाद या मतभेद नहीं हुए। हम हर आउटफिट को तैयार करते हुए महसूस करते थे कि ये अत्यंत महत्वपूर्ण है और कोई कसर नहीं छोड़नी है। डिजाइनर के तौर पर हम ऐसे कलेक्शन लाते हैं जो कहानी में फिट बैठ सकें। इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम करना काफी चुनौतीपूर्ण है। वस्त्र संग्रह पर काम करने की इस प्रक्रिया ने हम पर अमिट छाप छोड़ी है।