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6 साल में टेस्ट में बनाए सिर्फ दो रन, ऐसी अमेजिंग है इस क्रिकेटर की स्टोरी


पूर्व श्रीलंकाई टेस्ट क्रिकेटर मार्वन अटापट्टू ने अपने टेस्ट करियर में 6 डबल सेन्चुरी लगाई हैं।

पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर और कप्तान मार्वन अटापट्टू टीम के सबसे सक्ससेफुल क्रिकेटर्स में से एक रहे हैं। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 5 हजार और वनडे करियर में 8 हजार से ज्यादा रन बनाए। नवंबर 1990 में भारत के खिलाफ खेलकर टेस्ट डेब्यू करने वाले अटापट्टू का करियर करीब 17 साल रहा, जिसमें उन्होंने गजब के उतार-चढ़ाव देखे। उन्हें टेस्ट क्रिकेट में 1 रन से दूसरा रन बनाने में छह साल लग गए।

अटापट्टू ने 20 साल की उम्र में नवंबर 1990 में भारत के खिलाफ सीरीज के एकमात्र मैच में खेलते हुए टेस्ट डेब्यू किया था। उस मैच की दोनों इनिंग्स में वे बिना खाता खोले (0) आउट हुए थे।
- श्रीलंकाई टीम 54 रन पर 5 विकेट खो चुकी थी, ऐसे में सातवें बैट्समैन के तौर पर अटापट्टू बैटिंग करने आए, और बिना टाइम लिए वापस लौट गए।
- पहली इनिंग में मेहमान टीम 82 रन पर ऑलआउट हो गई। दूसरी इनिंग में अटापट्टी छठे बैट्समैन के तौर पर बैटिंग करने उतरे। लेकिन कहानी वही दोहराकर गए। इस बार फिर वे 0 पर आउट हो गए।
- चंडीगढ़ में हुए इस मैच में टीम इंडिया एक इनिंग और 8 विकेट से जीती थी। इसके बाद अटापट्टू को अगले दो साल तक टीम में मौका नहीं मिला।

अटापट्टू को करियर का दूसरा टेस्ट मैच खेलने का मौका, डेब्यू के 21 महीने बाद यानी अगस्त 1992 में मिला। जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच के लिए टीम में शामिल किया गया।
- कोलंबो में हुए इस मैच की पहली इनिंग में अटापट्टू एकबार फिर शून्य पर विकेट गंवा बैठे। वहीं दूसरी इनिंग में सिर्फ 1 रन बनाकर आउट हो गए। इस मैच के बाद वे एकबार फिर टीम से बाहर हो गए।

करियर के दूसरे टेस्ट मैच में 1 रन बनाकर आउट होने के बाद अटापट्टू एकबार फिर टीम से बाहर हो गए। हालांकि घरेलू फर्स्ट क्लास मैचों में उन्होंने खेलना जारी रखा और लगातार बड़ी-बड़ी इनिंग खेलकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करा ही लिया।
- इस श्रीलंकाई क्रिकेटर को करियर का तीसरा मैच खेलने का मौका 18 महीनों बाद फरवरी 1994 में मिला। जब उन्हें भारत के खिलाफ अहमदाबाद में होने वाले टेस्ट के लिए टीम में शामिल किया गया।
- मैच नया था लेकिन कहानी वही पुरानी। इस मैच की दोनों इनिंग्स में वे एकबार फिर शून्य पर आउट हो गए। इसके बाद तो लगा कि उनका टेस्ट करियर खत्म हो ही गया। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और डोमेस्टिक क्रिकेट में लगातार अच्छा परफॉर्म करते रहे।

करियर का तीसरा टेस्ट खेलने के बाद चौथा मैच खेलने के लिए अटापट्टू को तीन साल लंबा इंतजार करना पड़ा।
- उन्होंने मार्च 1997 में न्यूजीलैंड के खिलाफ दुनेदिन में अपने करियर का चौथा टेस्ट खेला, जिसमें पहली इनिंग में 25 और दूसरी में 22 रन बनाए।
- इस मैच के बाद अटापट्टू के करियर पर बार-बार लग रहा ब्रेक हट गया। हालांकि इसके बाद भी उन्हें पहली सेन्चुरी लगाने के लिए दसवें मैच तक इंतजार करना पड़ा।
- इसके बाद अटापट्टू ने अपने टेस्ट करियर में 90 मैच खेले। जिसमें 6 डबल सेन्चुरी समेत 16 सेन्चुरी लगाते हुए 5500 से ज्यादा रन बनाए। वे सबसे ज्यादा टेस्ट डबल सेन्चुरी लगाने के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर हैं।
- वहीं वनडे करियर में अटापट्टू ने 268 मैच खेले, जिसमें 11 सेन्चुरी लगाते हुए 8500 से ज्यादा रन बनाए। उनकी गिनती दुनिया के बेस्ट टेस्ट ओपनर्स में होती थी।