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जब पटरियां तक हो गईं टेढ़ी, माइनस 62 डिग्री टेम्परेचर में हुआ था ये हाल

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सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है और अब दुनियाभर के कई देशों में कड़ाके की सर्दी पड़ना शुरू हो जाएगी। हालांकि, ठंड की बात की जाए तो मामले में रूस का साइबेरिया कुख्यात है, जहां के वर्खोयांस्क टाउन में साल 1885 में पारा माइनस 67 डिग्री पर पहुंच गया था। ठंड के मामले में यह रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

पिछले साल पहले भी यहां पारा माइनस 62 पर पहुंच गया था। इससे वर्खोयांस्क सहित आसपास के कई शहरों की हालत बदतर हो गई थी। रेलवे ट्रैक के शेप तक बिगड़ गए थे और बर्फीले तूफान से घरों की दीवारों में दरारें पड़ गईं थीं।





- चिंता वाली बात यह है कि रूस के इस इलाके में साल दर साल ठंड बढ़ती जा रही है।
- इसी संबंध में यूएस-रशिया के रिसर्चर्स ने एक रिपार्ट तैयार की है, जिसमें बताया गया है कि 2050 तक रूस का यह इलाका बर्फ के ढेर में बदल जाएगा।


- यह ‘थॉइंग पर्माफ्रॉस्ट’ (हमेशा के लिए बर्फ बना देने वाली प्रक्रिया) के कारण होगा।


- इस रिपोर्ट के साथ साइबेरिया के वर्तमान हालात के कुछ फोटोज भी जारी किए गए हैं।


क्या है ‘थॉइंग पर्माफ्रॉस्ट’...


- पर्माफ्रॉस्ट बर्फ के नीचे दबी एक मोटी व ठंडी परत है। धरती के गर्म होने की वजह से यह लेयर ऊपर आती है।


- पर्माफ्रॉस्ट के ऊपर आने पर वहां की जमीन बर्फ में तब्दील होने लगती है। इससे हरेक चीज जम जाती है।


- यह नदी-तालाब व जमीन से लेकर पहाड़ों की चट्टानों को भी अपनी चपेट में लेती जाती है।
- वर्तमान में रूस का साइबेरिया, अलास्का और कनाडा के आसपास के इलाके पर्माफ्रॉस्ट जोन में आते हैं।



- पर्माफ्रॉस्ट के चलते जमीन सिकुड़ने लगती है। इसी के चलते साइबेरिया के कुछ इलाकों में रेल की पटरियां भी उखड़ गईं।



- पेड़-पौधे खत्म होने के चलते इससे कॉर्बनडाई-ऑक्साइड की मात्रा भी बढ़ने लगती है। अक्सर बर्फीले तूफान आते हैं।




- तूफान से सबसे ज्यादा नुकसान इलाके में बने घरों को होता है, क्योंकि बर्फ बन चुकी चट्टानों के टुकड़ें घरों व अन्य निर्माणाधीन चीजों को बर्बाद कर देते हैं।






- दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रफल वाले रूस के लिए साइबेरिया उसकी इकोनॉमी की रीढ़ है।



- यहां पेट्रोलियम, नेचुरल गैस, गोल्ड माइंस से लेकर बड़-बड़े डायमंड माइंस भी हैं।




- इसी के चलते यूएन द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद रूस सैकड़ों सालों से अपनी इकोनॉमी को संभाले हुए है।



- अगर आने वाले सालों में इस तरह साइबेरिया जमता चला गया तो यहां सबकुछ खत्म हो जाएगा।
- पर्माफ्रॉस्ट लेयर के ऊपर आने से जमीन के नीचे दबी सारी चीजें बर्फ में तब्दील हो जाएंगी।