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इस महिला IPS अफसर ने दागे तीखे सवाल, पसीना पोंछती नजर आई हनीप्रीत




डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की कथित बेटी हनीप्रीत इंसां को हरियाणा पुलिस ने पंचकूला दंगा मामले में गिरफ्तार कर लिया है। 39 दिनों बाद गिरफ्त में आई हनीप्रीत को उसकी मददगार सुखदीप के साथ पूछताछ के लिए पंचकूला के सेक्टर 23 स्थित चंडीमंदिर पुलिस स्टेशन के लॉकअप में रखा गया है। जहां उससे क्राइम अगेंस्ट बूमन आईजी ममता सिंह ने कई तीखे सवाल किए, जिनका हनीप्रीत गोलमोल जवाब देती रही। आईपीएस ममता सिंह बेहद सख्त मिजाज की पुलिस अफसर हैं।



- वे बताती है कि उनके पिता के चाचा घमंडी सिंह आर्या देश के पहले आईपीएस थे, जिनकी एक एनकाउंटर में डेथ हो गई थी।

- आईपीएस अफसरों के इतिहास में वे पहले अफसर थे, जिन्होंने देश के लिए जान न्यौछावर की थी। उनकी बहादुरी के किस्सों से ममता पुलिस सेवा की ओर आकर्षित हुईं।


- यही नहीं, उनके घरवालों की भी इच्छा थी कि हमारे घर से कोई पुलिस सेवा में जरूर जाए।


- ममता सिंह डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखती थीं, लेकिन इसके बजाए उन्होंने पुलिस सेवा में जाना बेहतर समझा।


- ममता सिंह के पति 1990 बैच के आईपीएस अफसर हैं, जो हरियाण कैडर में ही हैं। पुलिस अफसर ममता सिंह की दो बेटियां और एक बेटा है।


- इन दिनों हरियाणा कैडर में आईजी ममता सिंह एनएचआरसी में डीजीपी जैसे पदों पर रह चुकी हैं।


एक पुलिस अधिकारी के रूप में ममता सिंह ने छत्तीसगढ़ और झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में काफी काम किया है।


- यहां उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें राष्ट्रपति के पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।


- नक्सलियों के चलाए गए 'सलवा जूडूम' ऑपरेशन के दौरान उन्हें एक घटना ने झकझोरकर रख दिया था।


- जब उन्हें छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा इलाके के गांवों में पहुंचाया गया तो वहां के हालातों ने झकझोरकर रख दिया।


- दरअसल, वहां स्कूल बम से उड़ा दिए गए हैं और लोगों के लिए मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।



 ममता सिंह ने मथुरा में पढ़ाई की है। साथ ही छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत हरियाणा व दिल्‍ली में उन्होंने पुलिस की सेवाएं दी हैं।


- उनके कामों को देखते हुए ही गृहमंत्रालय ने उन्‍हें जेल सुधारों पर बनी कमेटी का सदस्‍य भी बनाया था।


- 1996 बैच की तेजतर्रार आईपीएस अफसर ममता सिंह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में चुनौतियों के बावजूद अच्छा तालमेल बनाकर चलती हैं।


- उनकी मानें तो घरवालों और सीनियर अफसरों के सहयोग से यह सब संभव हो जाता है।


- आईपीएस बनने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। वे एलएलबी समेत दूसरे डिप्लाेमा कोर्सेस भी कर चुकी हैं।


- ममता सिंह पांच भाई-बहन हैं। इनमें से वे अकेली हैं, जो इस रैंक की अफसर बनी हैं।


 बुधवार को हनीप्रीत को अरेस्ट करने के बाद हरियाणा पुलिस उसे पंचकूला के सेक्टर-23 स्थित चंडीमंदिर पुलिस स्टेशन ले गई। पुलिस कमिश्नर एएस चावला, क्राइम अगेंस्ट वूमन आईजी, ममता सिंह, डीसीपी मनबीर सिंह ने करीब साढ़े चार घंटे पूछताछ की।


- चंडीमंदिर पुलिस स्टेशन में पूछताछ के बाद शाम 7 बजे उसे हवालात में भेजा दिया गया। उसे एक कप चाय दी गई। हनीप्रीत ने चाय पी और कुछ देर चुपचाप बैठी रही। पुलिस ने करीब 7.30 बजे फिर से हनीप्रीत को हवालात से बाहर निकाला। करीब 2 घंटे फिर से पूछताछ की गई।


- हनीप्रीत को करीब 9.30 बजे फिर से हवालात में बंद कर दिया गया। कुछ देर के बाद रात का खाना दिया गया। खाने में दाल और रोटी थी। हनीप्रीत ने खाना खाने से मना कर दिया। हनीप्रीत रात भर रोती रही।


- रात में 12.30 बजे हनीप्रीत ने तबीयत खराब होने की शिकायत की, जिसके बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां जांच के बाद मेडिकल चेकअप करवाया गया।


क्या पुलिस रेड की जानकारी मिलती थी? हां, तो किसके जरिए? अगर नहीं, तो बाड़मेर, श्रीगंगानगर, रामसर मोडिया, उदयपुर, यूपी, दिल्ली, गुरुग्राम से रेड से ठीक पहले कैसे निकल गई?


-पंचकूला में दंगा करवाने के लिए कितने रुपए भेजे गए? अहम रोल किनका था?
-दंगा करवाने में गुरमीत का क्या रोल है?


- डेरे की 45 मेंबरी कमेटी में शामिल लोगों का क्या रोल था?
-पवन, आदित्य इंसां से आखिरी बार कब बात हुई, वो दोनो कहां हैं?
-रोहतक की सुनरिया जेल से निकलने के बाद पुलिस के सामने क्यों नहीं आई?



हनीप्रीत के पास इंटरनेशनल नंबर थे, जिन्हें उसने इस्तेमाल किया और उनसे ही वॉट्सऐप कॉल किए।



- हनीप्रीत 25 अगस्त से ही आदित्य, पवन, रोहताश के संपर्क में थी। इन सभी से उसकी वॉट्सऐप पर बात होती थी। हनीप्रीत ने कहीं भी सिंपल कॉलिंग का इस्तेमाल नहीं किया।