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मां हो तो ऐसी: झाड़ू पोछा लगाया-सब्जी बेचा, इस मुकाम पर पहुंची बेटी



यहां सब्जी बेचने वाली महिला ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाकर समाज में मिशाल पेश की है कि गरीबी कभी भी पढ़ाई पर हावी नहीं हो सकती। महिला का बेटा भी बहन के सपनों को पूरा करने के लिए सब्जी का ठेला लगाता है। अब ये मां-बेटे इलाके में रोल मॉडल बन चुके हैं।



हमीरपुर के मौदहा कस्बे में सुमित्रा अपनी फैमिली के साथ रहती हैं। इनके 2 बेटे और 3 बेट‍ियां हैं। करीब 12 साल पहले इनके पति संतोष की मौत हो गई थी। जिसके बाद पांचों बच्चों की जिम्मेदारी सुमित्रा पर आ गई।


- वह बताती हैं, सबसे बड़ी बेटी अनीता पढ़ने में तेज थी, वह डॉक्टर बनना चाहती थी। मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं, लेकिन बेटी की लगन देख उसे आगे पढ़ाने का फैसला किया। हाईस्कूल इंटर में बेटी ने स्कूल में टॉप किया। इसके बाद उसे कानपुर CPMT की तैयारी के लिए भेज दिया।


- एक साल की तैयारी के बाद 2013 में अनीता का CPMT का चयन हो गया। बेटी की 682 रैंक आई। उसे सैफई मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिला। MBBS की पढ़ाई को 4 साल हो गए हैं, अगले साल वह पूरी तरह से डॉक्टर बन जाएगी। इस बीच उसकी प्रैक्ट‍िस भी शुरू हो गई है।


- अनीता कहती है, जब मेरा सिलेक्शन हुआ था, उस पूरी रात मां रोती रही, वो खुशी के आंसू थे। मां-भाइयों ने मेरी पढ़ाई में बड़ा योगदान दिया। मां ने घरों में झाड़ू-पोंछा लगाया, बस स्टैंड पर पानी बेचा। लेकिन इतने पैसे नहीं मिलते थे, जिससे मेरी पढ़ाई का खर्च निकल सके।


- इसके बाद उन्होंने सब्जी की दुकान लगानी शुरू की। इससे वो ३००, से 500 रुपए रोज कमाने लगीं। भाई ने भी सब्जी का ठेला लगाना शुरू कर दिया। एक-एक पाई जोड़कर घरवालों ने पहले कोचिंग, फिर कॉलेज की फीस जमा कराई।


- यही नहीं, हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान पैसों की दिक्कत होने पर मैंने स्कूल के बाहर इमली तक बेची, जिससे कॉपी-किताब खरीदती थी।


 सुमित्रा कहती हैं, बेटी के लिए परिवार कई बार भूखी रही है। तैयारी के दौरान एक-एक रुपए जोड़कर बेटी को भेजते थे।


- बड़ी बेटी डॉक्टर बन ही गई है, अब छोटी बेटी विनीता भी डॉक्टर बनना चाहती है। उसे सीपीएमटी की तैयारी करने के लिये कानपुर भेज दिया गया है। अनीता कहती है, गरीबी क्या होती है ये मुझसे बेहतर कौन जानेगा।


- पिता की बीमारी के कारण मौत हो गई थी, हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि उनका इलाज करा पाते। तभी से मेरे मन में डॉक्टर बनने की इच्छा थी। मैं उन लोगों का फ्री में इलाज करूंगी, जो रुपए नहीं होने के चलते हॉस्पिटल नहीं जाते हैं।