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आर्मी जनरल को मिलते थे ताने- 'किन्नर है तुम्हारी बेटी', आज जीती है ऐसी लाइफ



पिछले 17 सालों से यूपी की राजधानी में होने वाली शादियों में नाचने वाली एक किन्नर अब नॉर्मल लाइफ जी रही है। इस बड़े चेंज के लिए उन्होंने इग्नू में एडमिशन लिया है। अब वो नेक्स्ट मंथ होने वाले सेमेस्टर एग्जाम की तैयारी में जुटी हैं। वो पढ़-लिखकर नॉर्मल लोगों की तरह जॉब करना।


 सुधा बताती हैं, "मैं बिहार के सीवान की रहनेवाली हूं। मेरे पापा अमरनाथ आर्मी में जनरल थे। हम पांच भाई-बहन थे। बहनों में मैं दूसरे नंबर पर थी। मां की मौत हो चुकी है। दोनों भाई दिल्ली में जॉब करते हैं और बहनें मैरिड हैं।"


- "मैं तब छठवीं में थी जब मुझे लगा कि मैं अपने क्लासमेट्स से अलग हूं। मेरा बॉडी स्ट्रक्चर देखकर लोग मजाक बनाते थे। सिर्फ मुझे ही नहीं, मेरी फैमिली को भी पब्लिकली ताने दिए जाते थे- तुम्हारी बेटी तो किन्नर जैसी है, इसे नाचने-गाने भेज दो।"


- "मैं घर आकर अकेले में घंटों रोती थी। भाई-पापा तो बाहर वालों से लड़ाई भी कर लेते थे कि हमारी बेटी को ऐसे क्यों कह रहे हो। वो मुझे सपोर्ट करते थे, कभी मुझसे कुछ नहीं कहा, लेकिन फिर भी मुझे बुरा लगता था।"



सुधा के मुताबिक, ''मैं 14 साल की उम्र में घर से भागकर लखनऊ आ गई। तब मैं 10वीं की स्टूडेंट थीं।''


- "मैं बड़ी हो रही थी और लोगों के ताने बढ़ रहे थे। मैंने सोचा कि मेरी वजह से फैमिली क्यों परेशान हो। इसलिए 1999 में ट्रेन पकड़कर लखनऊ आ गई।"


- "मैं चारबाग स्टेशन पर खड़ी थी। कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूं। मैंने एक ऑटोवाले से शहर में किन्नरों के घर के बारे में पूछा तो वो मुझे सहादतगंज छोड़ गया। मेरी जेब में कुल 100 रुपए थे। मैंने वहां पता पूछते हुए किन्नर समाज तक पहुंच गई, जहां मेरी मुलाकात अखाड़े के गुरु से हुई।"


 सुधा किन्नर अखाड़ा में संध्या गुरु से मिली और उन्होंने खुशी-खुशी उसे अपने साथ रख लिया।
- सुधा बताती है, "उन्होंने मुझे मां- बाप का प्यार दिया। 17 साल से उनके साथ हूं और आगे भी रहना चाहती हूं। बस, अब नाच-गाना अच्छा नहीं लगता।"


- वो रेलवे में नौकरी करना चाहती हैं, जिसके लिए इग्नू में एडमिशन लिया है। सुधा जीके, हिस्ट्री आदि सब्जेक्ट्स की किताबें पढ़ती रहती हैं। वो रेलवे एग्जाम की तैयारी में जुटी हैं।


- क्या फैमिली से बात होती है, इस पर उन्होंने बताया, "पापा को छोड़कर सभी से बात होती है। पापा आज भी मेरे घर से भागने वाली बात से नाराज हैं।"


इग्नू लखनऊ के असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर डॉक्टर कीर्ति विक्रम सिंह के मुताबिक, बिजली पासी गवर्नमेंट वुमन डिग्री कॉलेज में आयोजित अवेयरनेस कैम्प में सुधा ने बीपीपी प्रोग्राम में एनरोलमेंट कराया था। यह 6 महीने का कोर्स है, जिसे पूरा करने के बाद उसको पीजी कोर्स में एडमिशन दिया जाएगा।


- उसके पास इंटर की मार्कशीट व सर्टिफिकेट नहीं था, इसलिए उसका बीपीपी में एडमिशन कराया गया।