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ये हैं करवा चौथ व्रत की पूरी विधि, चांद के साथ पति का चेहरा देखकर महिलाएं खोलेंगी व्रत


पति की दीर्घायु के लिए महिलाएं रविवार को करवा चौथ का उपवास रखेंगी और चांद के साथ पति का चेहरा देखकर अपना व्रत तोड़ेंगी।

 इस दौैरान महिलाएं दिनभर पूजा-पाठ में व्यस्त रहेंगी। पंडितों के मुताबिक करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है।

भारतीय संस्कृति में विवाहित महिलाओं के लिये करवा चौथ प्रमुख पर्व माना जाता है। पौराणिक काल से ही अपने पति की दीर्घायु और सौभाग्य की कामना के लिये यह व्रत किया जाता है।

करवा चौथ महज एक व्रत नहीं है, बल्कि एक सूत्र है- साथ रहने के विश्वास का, एक साथ जीने का।

रीति-रिवाज और परंपराओं का स्वरूप तो समय के साथ ज्यादा कुछ नहीं बदलता, लेकिन उन्हें निभाने के तौर-तरीके जरूर बदल रहे हैं।

 व्रत के दिन दोपहर के समय महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर भगवान गणेश शिव तथा माता पार्वती की पूजा करती हैं।

स्वास्तिक बनाकर षोडशोपचार पूजा कर करवा चौथ की कहानी सुनाई जाती है। चंद्रोदय के समय सोलह श्रृंगार कर चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है।

 ब्राम्हणों को दक्षिणा देकर एक थाल में सुहाग का सामान, गहना- रुपए व फल-मिठाई रखकर बहू अपनी सासू मां, जेठानी, ननद कोे देती है।

इस दिन पवित्रता व स्वछता का विशेष ध्यान रखना चाहिये। प्रसन्न मुद्रा में, मर्यादित तथा मौन रहें या कम बात करें। किसी का अपमान या निंदा न करें।

घर पर उत्सव का वातावरण बनाकर रखें। इस व्रत में चंद्रमा की भी पूजा की जाती है, क्योंकि ज्योतिष विज्ञान के अनुसार चंद्र देव मन के देवता हैं।

मन की चंचलता को स्थिरता के लिये चंद्र देव का उदय हो जाने पर अर्घ्य देकर विधिवत पूजा कर प्रसन्न किया जाता है। इसके बाद ही व्रती महिलाएं अन्न जल ग्रहण करती हैं।