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8 साल से घर से बाहर नहीं निकला था ये शख्स, इस दीपावली ऐसे आया बाहर



एक अनजान डर के कारण आठ साल से खुद ही घर के एक अंधेरे कमरे में बंद एक युवक इस दिवाली बाहर निकला। गुरुवार को उसे प्रेरित किया और डर दूर करते हुए बाहर निकाला गया।

इससे न केवल बंद कमरे में घुट रही एक जिंदगी दिवाली के मौके पर रोशन हो गई। उसके माता-पिता की दिवाली पर ये गिफ्ट पाकर खुशी से आंसू छलक आईं।

युवक की कहानी जिसने में सुनी वह कुछ देर के लिए शॉक्ड रह गया।

- ये सार्थक दिवाली मध्य प्रदेश के जावरा निवासी 23 वर्षीय नारायण पिता गोवर्धनलाल नंदेड़ा की रही। नारायण ने आठ साल में पहली बार गुरुवार को खुली हवा में सांस ली। सरसी के स्कूल में 6वीं तक पढ़ने के बाद किसी अनजान डर के कारण उसने खुद को अपने ही घर में बंद कर लिया था।


- मां सीताबाई व पिता गोवर्धनलाल बताते हैं कि स्कूल जाना तो दूर खेत जाने को कहते तो भी बाहर नहीं निकलता। जब कोई समझाना भी चाहता तो नारायण एक ही बात कहता था कि मैं बाहर नहीं निकलूंगा चाहे आप मुझे मार डालो। खुलकर कारण भी नहीं बता रहा था। उसे एक अनजान डर सता रहा था।

- स्वच्छ भारत अभियान के दौरान जब प्रेरक राकेश पाटीदार व शिक्षक मनोहरसिंह राठौर को यह मालूम हुआ तो उन्होंने भी नारायण को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी।

आखिर में सरपंच प्रतिनिधि राजेश चत्तर ने नारायण से मुलाकात की। दो दिन तक नियमित उसके घर गए और समझाया कि डरने की कोई बात नहीं है, लेकिन वह नहीं माना।

- दीपावली पर राजेश फिर से उससे मिले और कहा कि तुम मेरे दोस्त बनो। मैं तुम्हारा साथ दूंगा और दिवाली पर बाहर की रोशनी तथा उत्सव का माहौल दिखाऊंगा। अपनी फोर व्हीलर गाड़ी में घुमाऊंगा।

त्योहारी सीजन में बाजार में खरीददारी करने ले जाऊंगा। आखिर में आठ साल से खुद ही कमरे में बंद नारायण ने हिम्मत जुटाई और सरपंच प्रतिनिधि चत्तर के साथ बाहर निकलकर कार में बैठ गया।

- यह पल न केवल नारायण के लिए नई जिंदगी की शुरुआत का पहला क्षण था, बल्कि उम्मीद खो चुके माता-पिता के लिए दिवाली की असली खुशी लेकर आया।

इसके बाद सरपंच प्रतिनिधि ने नारायण की दाढ़ी-कटिंग बनवाई। उसे नए कपड़े दिलाए। घर में बिजली व्यवस्था नहीं होने से उपलई उपकेंद्र जाकर कनेक्शन का आवेदन दिया।


- भावुक पिता गोवर्धनलाल कहते हैं यह हमारा इकलौता बेटा है। 9 बीघा जमीन है लेकिन इसकी चिंता में वह हमने बंटवारे पर दे दी है। हम जब भी इसे बाहर निकलने का कहते तो यह दरवाजा बंद कर लेता था। अब बाहर निकला है।

इससे बेहतर आैर सार्थक दिवाली कुछ नहीं हो सकती है। आठ साल के दौरान नारायण ने बंद कमरे में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड कंठस्थ कर लिया।