कभी न डूबने वाला जहाज की 3 घंटे में ऐसे हुई थी स्टोरी खत्म, देखें Photos
अपने समय में टाइटैनिक सबसे बड़ा शिप था जिसके बारे में दावा किया गया था कि वह कभी डूब नहीं सकता।
लेकिन बाद में हुआ ये कि शिप 15 अप्रेल 1912 को एक आइसबर्ग से टकराकर सिर्फ 3 घंटे में डूब गया और वह भी 12 हजार फीट नीचे अटलांटिक महासागर में।
राबर्ट बेलार्ड ने इसके अवशेषों को बाद में री-डिस्कवर किया था। कई सालों बाद इस शिप की दर्दनाक स्टोरी 1997 में आई टाइटैनिक मूवी में नजर आई।
अपने समय का सबसे बिगेस्ट पैसेंजर यातायात का साधन था टाइटैनिक।
2224 में सिर्फ 710 लोगों को इस त्रासदी से बचाया जा सका।
इस शिप को चलाने के लिए रोजाना 600 टन कोयले की जरूरत थी, इसलिए इस जहाज पर 6000 टन कोयला लादा गया था। यहां काम करने वाले फायरमेन बड़ी गर्मी और गंदे माहौल में रहते थे।
शिप पर कोई दूरबीन नहीं लगी थी जिससे दूर की चीजों को देखा जा सके। यदि वह होती तो ये दुर्घटना टाली जा सकती थी।
टाइटैनिक पर 14 बेलब्वाॅयज थे जिनका काम पैसेंजर्स का लगेज ढोना और अन्य टास्क पूरा करना था। ये सारे बेलब्वॉयज मारे गए थे।
शिप में 109 बच्चे सवार थे जिनमें से 53 की मौत हो गई।
885 ऑफिसर और क्रू मेंबर्स में से सिर्फ 23 महिलाएं थी।
इस शिप पर सबसे धनी आदमी था जॉन जेकब एस्टर फ़ोर्थ जिसकी नेटवर्थ थी 85 मिलियन डॉलर जो अाज के 2 बिलियन डॉलर के बराबर हैं। वह अपनी प्रेग्नेंट पत्नी के साथ सफर में था। अपनी पत्नी को लाइफबोट में हेल्प करने के दौरान इनकी मौत हुई।
टाइटैनिक जहाज के कैप्टन थे Edward J Smith वे इस यात्रा के बाद रिटायरमेंट लेने वाले थे।
कई फेमस व्यक्तियों ने इस जहाज का टिकट खरीदा था लेकिन वह इसमें सवार नहीं हुए है। इन्हीं में से एक जे पी मॉर्गन थे।
वेटर्स और मैड को टाइटैनिक पर स्टिवर्डस कहा जाता था। शिप पर 421 स्टिवर्डस थे जिनमें से 60 ही बच पाए।
टाइटैनिक मूवीज में जिस आर्केस्ट्रा को डूबते जहाज पर परफार्म करते देखा था, हकीकत में वे ये लोग थे जो जहाज के साथ ही डूब गए।
Elizabeth Gladys Millvina Dean सबसे यंगेस्ट थी जो उस हादसे से बच गई थीं। इनकी मौत 2009 में हुई।
Elizabeth Gladys Millvina Dean की मौत के बाद इनकी राख, साउथैंप्टन के डॉक पर फैला दी जहां से उनकी फैमिली और वह टाइटैनिक पर चढ़े थे।
लोगों की बॉडी कलेक्ट करने में 8 शिप लगे थे।
टाइटैनिक एक लग्जरी पैसेंजर वेसेल था। इसका फर्स्ट क्लास का टिकट 4350 डॉलर, सेकंड क्लास का 1750 डॉलर और थर्ड क्लास का 30 डॉलर था।
त्रासदी के 14 साल पहले माॅर्गन राबर्टसन ने एक नॉवल 'द रेक ऑफ द टाइटन' लिखा था जो विशाल आइसबर्ग से टकराकर डूब गया था। 14 साल बाद ठीक यही मंजर हकीकत में हुआ।
इस विशाल आइसबर्ग से टकराकर टाइटैनिक शिप डूबा था।
शिप से टकराने से सिर्फ 30 सेकंड पहले आइसबर्ग को देखा गया था।
जर्नी के 4 दिन पहले ही समुद्र में तैरते आइसबर्ग की सूचना दे दी गई थी लेकिन उसपर अमल नहीं हुआ।
शिप पर पर्याप्त मात्रा में राफ्ट ही नहीं थी। इन राफ्ट की सहायता से सिर्फ 1178 लोगों को ही बचाया जा सकता था।
जब शिप ने आइसबर्ग को हिट किया तो उसके सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट बाद पूरा जहाज डूब गया।
इस शिप में 4 बड़ी चिमनियां लगी थी। इसमें 3 धुएं को बाहर निकालने के लिए थी और एक एयर को।
टाइटैनिक के दौर के समय सारे ब्रिटिश शिप, चाहे वह मिलिट्री के हों या सिविलियन, उनके आगे RMS लिखा जाता था यानि रॉयल मेल शिप।
शिप के बी डेक पर à la Carte Restaurant था जिसमें सिर्फ फर्स्ट क्लास के पैसेंजर ही जा सकते थे। ये एक इटैलियन बिजनेसमैन का था जो शिप में ही मारा गया। इस रेस्टोरेंट में 66 लोगों को स्टॉफ था जिसमें से सिर्फ 3 लोग बचे।
टाइटैनिक का लग्जीरियस इंटीरियर, लंदन के रिट्ज होटल से एंस्पायर था।
साउथैंप्टन से न्यूयार्क पहुंचने से पहले टाइटैनिक के दो ही बोर्डिंग थे, Cherbourg in France, Queenstown in Ireland।


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