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बोरवैल में गिरा 22 साल का लड़का, पांच घंटे के रेस्क्यू में निकाला गया बाहर


बोरवैल में गिरा पर हिम्मत नहीं हारी, खुरपी से खोद कर फंसा पैर निकाला, कमर में रस्सी बांध रेस्क्यू टीम की मदद से ऊपर आया।

राजस्थान में बीकानेर के 22 साल के बोरवैल कर्मचारी ने जिंदगी की जंग पांच घंटे में जीती। वह शनिवार को भिंड के फूप में मोबाइल पर बात करते हुए 350 फीट गहरे बोरबेल के गड्ढे में गिर गया था। गड्ढे में वह 80 फीट की गहराई पर जाकर वह फंस गया था। युवक ने हिम्मत नहीं हारी और खुरपी से खोद कर फंसा पैर निकाला, और कमर में रस्सी बांध रेस्क्यू टीम की मदद से ऊपर आ गया। तीन इनर्जी ड्रिंक्स, एक कोल्ड ड्रिंक और एक पेन किलर के सहारे लड़ा जिंदगी की जंग....

- भिंड के फूफ कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास रामशंकर शर्मा के खेत में खोदे जा रहे बोरबेल में शनिवार दोपहर बीकानेर से आया बोरवैल कर्मचारी कैलाश पुत्र कालूराम मोबाइल पर बात करते अनजाने में जा गिरा। उसके गिरते ही उसके साथी मजदूर भवानी सिंह व अन्य उस ओर दौड़े, लेकिन तब तक वह बोरवैल के गड्ढे में 80 फीट की गहराई पर जा फंसा था।

- तत्काल 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया, कुछ ही देर में कलेक्टर इलैया राजा को सूचना मिली। कलेक्टर एसपी प्रशांत खरे व अन्य अधिकारी के साथ मौके पर पहुंच गए।

- मौके पर CMHO डा.जेपीएस कुशवाह की देखरेख में बोरबेल में आक्सीजन पहुंचाई गई, इसके बाद एनर्जी ड्रिंक भेजा गया। कैलाश ने पैर में दर्द होने की बात बताई तो डॉ.कुशवाह ने रस्सी के सहारे पेन किलर उतरवाई, साथ ही पानी की बोतल भेजी। कुछ देर बाद कोल्ड ड्रिंक भी 80 फीट की गहराई में उतारी गई।

खुरपी से खोद कर खुद बाहर निकाला गड्ढे में फंसा पैर
- रेस्क्यू टीम ने ऊपर से एक 1रस्सी डाली जिसे कैलाश ने अपनी कमर से बांध लिया। उसने बताया कि गिरने से उसका एक पैर मिट्टी में उल्टा धंस गया है, इसे निकालने उसने खुरपी मांगी। रस्सी के सहारे खुरपी भेजी गई, कैलाश ने खुरपी से मिट्टी खोदकर अपना पैर निकाल लिया।
- कैलाश का पैर मिट्टी से निकल आया तो उसने रस्सी को कमर में बांधा। फिर उसे ऊपर खींचना शुरू किया गया।
- करीब 1 घंटे की मेहनत के बाद कैलास को शनिवार साम सुरक्षित ऊपर निकाल लिया गया, और सीधे भिंड डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर भेजा गया।

5 सिलेंडर ऑक्सीजन से बची 80 फीट गहरे गड्ढे में जिंदगी
- बोरबेल में ऑक्सीजन भेजने के लिए मौके पर पांच गैस सिलेंडर रखे गए थे। CMHO डा.कुशवाह अपनी देखरेख में ऑक्सीजन पहुंचाते रहे।

- बोरबेल से निकाले जाने के बाद कैलाश को सीधे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। यहां पहले से तैयार सिविल सर्जन डा.अजीत मिश्रा की टीम ने कैलाश को बेड पर लेटा कर आक्सीजन देना जारी रखा गई। कुछ देर में उसे राहत मिलने लगी।

मोबाइल पर हो रहा था किसी लड़की से विवाद
- कैलाश जिस समय बोरबेल में गिरा, वह मोबाइल पर किसी लड़की से बात कर रहा था। साथी मजदूरों में चर्चा है कि लड़की से विवाद के बाद कैलास ने बोरवैल का पत्थर हटाया, इसी दौरान वह बोर में गिर गया।
- हालांकि कैलास इस बात से इनकार किया है कि वह मोबाइल पर बात कर रहा था। कैलाश के मुताबिक वह छड़ (पाइप) उठा रहा था, इसी दौरान पत्थर खिसकते उसका पैर फिसला और वह बोरवैल में जा गिरा।