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डायरेक्टर ने 3rd फ्लोर से फेंक दी थी गानों की डायरी, ऐसे बने ये Hit गीतकार


जब पहली बार काम मांगने पहुंचे थे समीर, डायरेक्टर ने दिया था ताना- पिता के नाम पर काम चाहते हो।

पॉपुलर गीतकार समीर इंटरनेट पर मौजूद फैमिली और खुद से जुड़ी गलत इंफोर्मेशन से बहुत परेशान हैं। उनके मुताबिक उनके पिताजी के निधन से लेकर खुद के बर्थडे तक की डेट्स गलत पब्लिश हुई हैं।
बता दें कि समीर के पिता अंजान भी मशहूर गीतकार रहे हैं। उन्होंने अपनी यही परेशानी नेक्सा न्यूज़ के साथ शेयर की।
पिताजी के निधन का गम कई गुना बढ़ा देता है इंटरनेट

- 660 से ज्यादा फिल्मों में 4000 से ज्यादा गीत लिख चुके समीर का नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। वे बताते हैं, "मेरे पिताजी का निधन 3 सितंबर 1997 को हुआ था, लेकिन इंटरनेट पर यह डेट 3 की जगह 13 लिखी हुई है।
 इस वजह से लोग मुझे साल में दो बार सांत्वना देने आते हैं, जिससे मेरा मन काफी दुखी हो जाता है। ऐसे ही मेरे गलत बर्थडे पर भी लोग गिफ्ट-कार्ड भेजने लगते हैं, घर पर मिलने तक आ जाते हैं।"

समीर की ये इन्फॉर्मेशन्स हैं इंटरनेट प रॉन्ग

पिता अंजान की बर्थ डेट - 28 अक्टूबर 1929 (इंटरनेट पर ईयर 1930 शो करता है)

अंजान का डेथ यूनिवर्सरी -3 सितंबर 1997 (गलत -13 सितंबर 1997)

समीर बर्थडे - 24 फरवरी 1958 (गलत - 24 अप्रैल)

ऐसी है समीर की फैमिली

- समीर का पूरा नाम शीतला पांडे है। इनका जन्म वाराणसी के ओदारे गांव में 24 फरवरी 1958 को हुआ। प्रेजेंट में ये मुंबई में रहते हैं। बनारस के शिवपुर में पैतृक मकान है।

- इनके पिता लाल जी पांडे अंजान एक मशहूर गीतकार थे। इन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म 'डॉन' का पॉपुलर सॉन्ग 'खाइके पान बनारस वाला' लिखा था।

 इनके कुछ पॉपुलर सॉन्ग्स इस प्रकार से हैं- 'दिल तो है दिल', 'रोते हुए, आते हैं सब', 'ओ साथी रे', 'प्यार जिंदगी है' (मुकद्दर का सिकंदर), 'लोग कहते हैं मैं शराबी हूं' (शराबी) और 'छूकर मेरे मन को' (याराना)।

- समीर की मां स्व इंदिरा पांडे हाउसवाइफ थीं। बड़े भाई शेखर पांडे और भाभी ऊषा बनारस में ही रहते हैं।

- इनकी पत्नी अनीता पांडे भी हाउस वाइफ हैं। बड़ी बेटी संचिता पति अभिशेख दुबे के साथ न्यूजर्सी (अमेरिका) में रहती हैं।

- छोटी बेटी सुचिता पांडे फैशन डिजाइनर है और छोटा बेटा सिद्धेश हाईस्कूल में।

पापा के दोस्त ने तीसरे मंजिल से फेंकी थी गानों की डायरी

- समीर बताते हैं, "शुरुआत में मैं कवि सम्मेलन, अख़बार और पत्रिकाओं के लिए कविताएं लिखता था। पिता कभी नहीं चाहते थे कि मैं इस लाइन में आऊं। उन्होंने खुद को इस्टैब्लिश करने में बहुत परेशानियों का सामना किया था। वो नहीं चाहते थे कि मैं भी उस दौर से गुजरूं।"

- "पहली बार मैं 1980 में मुंबई पहुंचा तो डर के मारे पिता के पास न जाके फूफा के घर गया। वहीं रहकर काम की तलाश करता रहा। उस समय म्यूजिक डायरेक्टर श्याम सागर पिता जी के मित्र हुआ करते थे।

उन्होंने मेरे गीतों की डायरी पढ़कर बहुत बुरा रिएक्शन दिया, बोले- पिता का नाम लेकर गीतकार बनने आए हो। उन्होंने मेरी डायरी को तीन मंजिला बिल्डिंग से नीचे फेंक दिया। मैं इस घटना से निराश जरूर हुआ, लेकिन मन ही मन सफलता पाने का जूनून सवार हो गया।"

- पिता के दोस्त से रिजेक्ट होने के बाद समीर म्यूजिक डायरेक्टर ऊषा खन्ना से मिलने पहुंचे। तब वो फिल्म 'बेखबर' के लिए सॉन्ग रिकॉर्डिंग कर रही थीं। उन्होंने इनसे भी एक गाना रिकॉर्ड करवाया। उस काम के इन्हे 5000 रुपए मिले थे। वहीं से इनका करियर शुरू हुआ।"

- समीर बताते हैं, "धीरे-धीरे मेरी सफलता देखने के बाद श्यामसागर जी ने दोबारा बुलवाया और कई गीत लिखवाए। मेरा पहला सुपरहिट गाना था- 'राजा तेरे रस्ते से हट जाऊंगी, गाड़ी के नीचे आके कट जाउंगी'।

आनंद मिलिंद जी के म्यूजिक और मेरे लिरिक्स ने इस गाने को हिट बना दिया था। इसके बाद मुझे आसानी से फिल्में मिलने लगीं। मैंने 'दिल', 'आशिकी' और 'साजन' जैसी सुपरहिट फिल्मों के लिए गाने लिखे, जो सुपरहिट हुए।"