यहां गड्ढों में भरा रहता था पिघला सोना, खुले में लगता था हीरों का मार्केट
कर्नाटक का हम्पी पर्यटन स्थल विश्व विरासत स्थल में शामिल है। 500 साल पहले इस नगर में करीब 5 लाख लोग रहते थे। उस समय ये इटली रोम से भी ज्यादा खूबसूरत शहर था। 300 सालों तक यहां हमला करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। कहा जा है कि यहां के गड्ढों में पिघला हुआ सोना भरा रहता था। चूंकि आरबीआई ने 50 रुपए के नए नोट का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोट के पीछे की तरफ हम्पी में बना पत्थर का रथ' छपा है।
हम्पी तुंगभद्र नदी के तट पर बना है। इसका नाम इसी नदी के नाम 'पंपा' (जो ब्रह्मा की बेटी थीं) से बना था। जिसका कन्नड़ में मतलब होता है 'हंपे'। हम्पी को पहले विरूपाक्षपुरा भी बोलते थे।
- यहां का इतिहास और खूबसूरत आर्किटेक्चर इसे एक अच्छा टूरिस्ट प्लेस बनाता है।
- ये एशिया का सबसे बड़ा स्मारक शहर भी माना जाता था। 1 C.E. १३३६,1565, के समय का बना हुआ है और 25 वर्ग किमी किमी में फैला हुआ है।
- ये शहर जहां एक तरफ धार्मिक कारणों से बना था वहीं धार्मिक कारणों की वजह से ही बर्बाद भी हुआ।
- 1565 में हुए युद्ध में विजयनगर शासकों की मुस्लिम शासकों से हार हुई थी और उन्होंने बदला लेने के लिए इस शहर में घुसकर इसकी खूबसरती को तहस-नहस कर दिया था। खासकर हिंदुओं के भगवान की मूर्तियां और मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।
हम्पी एक प्राचीन शहर है जिसका रामायण काल में किष्किंधा के नाम से वर्णन है।
-14वीं सदी में हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी बना जो दक्षिण भारत का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य था।
-सन् १५०९, से 1529 के बीच यहां कृष्णदेव राय ने शासन किया, जिसके दरबार में तेनालीराम थे।
-अकबर-बीरबल की तरह कृष्णदेव राय-तेनाली राम की जोड़ी भी अपनी हाजिर जवाबी के लिए फेमस थी।
-विजयनगर साम्राज्य के वैभवशाली समय में इटली, ईरान, पुर्तगाल से जो यात्री आए उन्होंने इसे दुनिया का सबसे ऐश्वर्यशाली नगर बताया था।
-हम्पी के विरुपाक्ष मंदिर के सामने खुले में डायमंड मार्केट लगता था, जहां दुनिया के लोग हीरे खरीदने आते थे।

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