ऐसे संभाल के रखा जाता है इंसानों का दिमाग, कई दिनों तक रहता है नए जैसा
दुनिया में कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनका इलाज आज तक नहीं मिल पाया है। खासकर नर्वस सिस्टम और दिमाग से जुड़ी बीमारियां जैसे अल्जाईमर और डिमेंशिया। ऐसी घातक और जानलेवा बीमारियों के इलाज के लिए दुनियाभर के साइंटिस्ट दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। न्यूयॉर्क के ब्रॉंक्स बरो में भी लगातार ऐसी ही रिसर्च हो रही है, जिससे दिमाग से जुड़ी की गंभीर बीमारियों का इलाज खोजा जा सके।
इंसान की मौत के 72 घंटे के अंदर उसका ब्रेन स्टोर करना जरूरी होता है।
- डॉक्टर्स सिर्फ उन लोगों का ब्रेन ही रिसर्च के लिए ला सकते हैं, जिन्होंने ब्रेन डोनेट किया था।
- मृत व्यक्ति का ब्रेन लैब फैसिलिटी तक लाने के लिए डॉक्टर्स कूल बॉक्स का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद ब्रेन को फार्मेलीन के सॉल्यूशन में रखा जाता है।
- रिसर्च के लिए ब्रेन के पार्ट्स को अलग-अलग हिस्सों में काटा जाता है, इसे प्रक्रिया को ‘डिसेक्शन’ कहते हैं।
इसके बाद ब्रेन के इन हिस्सों को वैक्स (मोम) से ढ़ंक दिया जाता है।
- इन वैक्स्ड पार्ट्स को ही सैंपल के तौर पर रिसर्च के लिए यूज किया जाता है। ब्रेन के बाकी हिस्सों को फ्रीज कर दिया जाता है।
- ब्रेन को फ्रीज करने के लिए लगभग माइन्स 150 डिग्री टेंपरेचर में रखा जाता है। इससे ब्रेन कई दिनों तक नए जैसा बना रहता है।

Post a Comment