ये हैं 75 साल की सरस्वती बाई, 60 साल से नहीं खाया है अन्न का एक दाना
धामनोद के सुंद्रैल की 75 वर्षीय सरस्वती बाई की कहानी सुन हर कोई हैरान रह जाता है। क्योंकि उन्होंने 60 साल से अन्न का एक दाना नहीं खाया है। बस चाय और पानी ही उनके जीने का सहारा है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि वे बिना खाए भी खेत में घंटों काम करती थीं और इसी हालत में उन्होंने पांच बच्चों को जन्म दिया।
एक बार बीमार क्या हुईं खाना ही छूट गया
- सरस्वती बाई पति द्वारकाप्रसाद पाटीदार की कहानी भी बड़ी अजीब है। कम उम्र में शादी हुई और पहली डिलेवरी में लड़की हुई और तबीयत खराब हो गई। टाइफाइड हो गया। आंतें सिकुड़ गई। कुछ भी खाती तो उल्टी हो जाती। हालांकि तबीयत ठीक हो गई, लेकिन कुछ भी खाती तो मन नहीं करता और खाने की कोशिश करती तो बाहर हो जाता।
- अस्पताल से छुट्टी मिली और पति उन्हें घर ले आए, लेकिन सरस्वती को जैसे खाने से एलर्जी हो गई। खाना देखते ही उनका मन अजीब सा करने लगाता। सरस्वती का खाना बंद होने से पति द्वारकाप्रसाद बहुत चिंतित हुए और वे उसे इंदौर लेकर पहुंचे।
- यहां डॉ. जगदीश कुसुम, डॉ. अकबर अली, डॉ. मुखर्जी, डॉ. आरएस मेहता आदि सभी ने लंबे समय तक अलग-अलग इलाज किया, लेकिन उनका खाना शुरू नहीं करवा पाए। समय बीतता गया, लेकिन सरस्वती की हालत में कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा, इस पर कुछ समय बाद उन्होंने दवाएं लेना बंद कर दी। वे अब पानी घूंट घूंट पीने लगीं। इसके अलावा सुबह और शाम चाय पीने लगीं।
- अब सरस्वती का यही भोजन बन गया है। कभी-कभार हफ्ते में एक केला खा लेती हैं, जब उनसे पूछा कि आपको कैसा लगता है तो बिना किसी टेंशन कि वे हंस कर कहती हैं। इतने वर्ष हो गए। अब तो आदत हो गई। शादी ब्याह में भी जाती हूं तो कभी खाने की इच्छा नहीं करती। बस अपना पानी भला और चाय।
- पुत्र महेंद्र पाटीदार कहते हैं पिताजी ने बहुत इलाज कराया, लेकिन मां नहीं खा पाई तो अब सब सामान्य हो गया है। पुराने पड़ोसी कमलेश पाटीदार कहते हैं बचपन से काकी को देख रहा हूं। सिर्फ चाय-पानी पीकर भी खेतों में लगी रहती थीं। हम पूछते थे भूख नहीं लगती तो वे ना कहकर हंस देती थीं। पड़ोसी रमेशचंद्र पाटीदार कहते हैं मुझे पता लगा तो आश्चर्य हुआ लेकिन कई बरस से मैं भी देख रहा हूं।
इसी आहार में सरस्वतीबाई ने पांच और बच्चों को दिया जन्म
- इस बीच सरस्वती बाई के 5 और बच्चों हुए, लेकिन उनकी खुराक वही पानी-चाय ही रही। फिर एक समय ऐसा आया कि गोलियां बंद कर दी और आदत बना ली कि सिर्फ इसी को पीकर जीवन यापन करना है। इतने सबके बावजूद सरस्वती बाई घर से 3 किमी अपने खेतों में जाती थी और 8 घंटे अपने स्वयं के खेत में काम भी करती थी। अब सरस्वती बाई घर में इस उम्र में खेतों में जाना बंद कर अपने पति की सेवा करती हैं।


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