100 किमी/घंटा की रफ्तार में लिया टर्न, पेड़ पर 6 फीट तक चढ़ी अनबैलेंस कार
इंदौर-भोपाल रोड पर रक्षाबंधन की रात कार पलटने से एक रेस्टोरेंट संचालक की मौत हो गई। कार में छह दोस्त सवार थे, जो क्रीसेंट वाटर पार्क से पार्टी मनाकर लौट रहे थे। फंदा टोल नाके पर तेज रफ्तार में मोड़ते वक्त कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े एक पेड़ पर जा चढ़ी। कार डिप्टी सेक्रेटरी का बेटा चला रहा था। हादसे में बाकी पांचों दोस्तों को गंभीर चोट आई हैं। क्या है मामला
-मूलत: बीना निवासी 25 वर्षीय आशुतोष पिता राजेंद्र ठाकुर यहां राजहर्ष कॉलोनी में किराए का मकान लेकर रहते थे।
-इंजीनियरिंग के बाद आशुतोष ने एमबीए इन एचआर किया और करीब सवा महीने पहले त्रिलंगा में गार्डन कैफे शुरू किया था।
-रक्षाबंधन पर छुट्टी होने के कारण सोमवार को छह पुराने दोस्त आपस में मिले।
-इनमें आशुतोष के अलावा शिवाजी नगर निवासी सागर ठाकुर, सिवनी मालवा निवासी पवन सिंह, कोलार निवासी अंकित शर्मा, रायपुर निवासी तुषार चंद्रवंशी और खंडवा निवासी शशांक शामिल थे।
-शशांक और तुषार एमबीबीएस छात्र हैं। सागर के पिता मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी हैं, जबकि तुषार के पिता बीरेंद्र चंद्रवंशी छग बिजली कंपनी में सेक्शन ऑफिसर हैं।
-रक्षाबंधन मनाने के बाद सभी दोस्तों का क्रीसेंट वाटर पार्क जाने का प्लान बन गया।
एयरबैग खुलने से बची डिप्टी सेक्रेटरी के बेटे की जान
-खजूरी सड़क टीआई सूर्यकांत अवस्थी के मुताबिक हादसा सोमवार देर रात करीब पौने एक बजे हुआ। उस वक्त सभी दोस्त पार्टी मनाकर घर लौट रहे थे।
-अंदाजा है कि रफ्तार 100 किमी/घंटा से ज्यादा रही होगी। इतनी रफ्तार में टर्न लेते ही कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े एक पेड़ पर छह फीट तक जा चढ़ी।
-टक्कर के कारण कार का एक ही बैग खुल सका। इससे ड्राइव कर रहे सागर की जान बच गई, लेकिन आशुतोष उछल कर कार के बाहर आ गिरे।
-हादसे में आशुतोष के सिर में गंभीर चोट आई। सभी घायलों को अस्पताल भेजा गया, जहां आशुतोष ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, सागर की हालत नाजुक बताई जा रही है।
मां ने कहा था ग्रहण है बेटा मत जाओ
-सोमवार रात को चंद्रग्रहण लगा था। इसे लेकर सागर की मां ने सभी बच्चों की पार्टी का विरोध किया था। समझाया था कि जो पार्टी करनी है, घर पर ही कर लो। रात में चंद्रग्रहण लगेगा।
लेकिन उन्होंने मां की बात नहीं सुनी।
-सभी दोस्त घर से निकल रहे थे, तभी सागर की बहन नेहा और चचेरी बहन शिखा व बाकी दोस्त दूसरी कार से उनके साथ निकले।
-हादसे के वक्त बहनों की कार सागर की कार से आगे चल रही थी। भनक लगते ही सभी मौके पर लौट आए।
आखिरी बार उसने काफी देर तक मुझसे बात की
-आशुतोष के पिता राजेंद्र ठाकुर के मुताबिक उसका मां से ज्यादा अटैचमेंट था। मुझसे वह कम ही बात करता था।
-सोमवार को दोपहर के वक्त उसने मुझसे करीब 5-6 मिनट तक बात की। अमूमन वह मुझसे इतनी लंबी बात नहीं करता था।
-12वीं में पढ़ने वाले अपने छोटे भाई निमिष से भी उसने फोन पर बात की। निमिष ने कहा कि भइया बीना आ जाओ तो उसने जवाब दिया कि 19 अगस्त को तेरे जन्मदिन पर आता हूं। खूब मस्ती करेंगे।
-निमिष ने बताया कि हमारी कोई सगी बहन नहीं है, इसलिए हम दोनों भाई हर साल बुआ से राखी बंधवाते हैं। मैं भइया को भी बुआ के पास गुना जाने के लिए बीना बुला रहा था।


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