Header Ads

कभी 1 कमरे के मकान में रहते थे शोएब, 50 पैसे का जूस भी पीते थे उधार


पाकिस्तान के दिग्गज बॉलर शोएब अख्तर आज 42 साल (13 अगस्त, 1975) के हो गए हैं। दुनिया के सबसे तेज फास्ट बॉलर्स में से एक शोएब का बचपन बेहद गरीबी में बीता, लेकिन आज वो करोड़ों के मालिक हैं। क्रिकेट फील्ड से दूर होने के बाद भी वो कभी बतौर क्रिकेट एक्सपर्ट तो कभी टीवी होस्ट के रूप में फैन्स को एंटरटेन कर रहे हैं। कभी 50 पैसे का जूस पीते थे उधार में

- कभी शोएब अख्तर के पास जूस पीने तक के पैसे नहीं होते थे। टीवी होस्ट गौरव कपूर के एक क्रिकेट शो ‘ब्रेकफास्ट विथ चैम्पियंस’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इस किस्से और अपनी स्टार बनने से पहले की लाइफ से जुड़े कई इंटरेस्टिंग किस्से शेयर किए।

- शोएब के अनुसार वो रावलपिंडी क्लब से जब क्रिकेट प्रैक्टिस कर बाहर निकलते थे, तो वहां एक गन्ने के जूस वाला था। उससे शोएब ने दोस्ती की। उससे कहा, ‘तू मुझे 50 पैसे का गन्ने का जूस फ्री पिलाएगा और पैसे नहीं लेगा, तो जब मैं स्टार बन जाऊंगा तो तुझे मशीन लगवा दूंगा। तब वो जूस वाला कहता था कि चल आगे। दिमाग खराब है तेरा।‘

- शोएब रोज उसकी दुकान पर जाकर यही कहते थे। एक दिन जूस वाले ने पूछा, पक्का है ना कि तू क्रिकेटर बन जाएगा। फिर उसने शोएब को जूस पिलाना शुरू किया। साल डेढ़ साल तक उसने फ्री में उन्हें जूस पिलाया।

- शोएब के अनुसार, ‘जब मैं स्टार बनकर लौटा तो पचा चला कि उसकी डेथ हो चुकी है। तब तय किया कि उसकी फैमिली के लिए जरूर कुछ करना है। फिर मैंने सोचा कि अब ये गन्ने का जूस नहीं बेचेंगे। मैं उन्हें दुकान खुलवाकर दी।‘

शोएब पर हंसते थे पड़ोसी

- शोएब बहुत बहुत साधारण परिवार से आते हैं। उन्होंने बताया, ‘मेरे चार बड़े भाई और एक छोटी बहन एक कमरे के छोटे से घर में रहते थे। रावलपिंडी में मई-जून में भयंकर गर्मी होती थी। मैं स्कूल से आकर दोपहर में क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए जाता था तो मोहल्ले के सभी लोग हंसते थे।‘
- ‘मैं कहता था कि एक-दो साल में मैं स्टार बन जाऊंगा तो आप लोगों की जिंदगी बदल दूंगा। इस पर लोग कहते थे कि ये देखो पागल को। ये बनेगा इमरान खान और वसीम अकरम।‘

ट्रायल के लिए जाने के लिए नहीं थे पैसे

- 1994 में लाहौर ट्रायल देने जाना था। शोएब की जेब में पैसे नहीं थे। तब फिर उन्होंने बस के कंडेक्टर से दोस्ती की। शोएब ने उससे बोला लाहौर ले चल मुझे। दोस्त हूं तेरा। छोड़ न पैसों को। फिर वो शोएब को लाहौर ले गया। यहां पहुंचने के बाद तांगे वाले के साथ भी शोएब ने कुछ ऐसा ही किया।

ट्रायल में हो गई थी हालत खराब

- बड़ी मुश्किल ये यहां पहुंचे शोएब ने देखा कि ट्रायल में 3-4 हजार लड़के हैं। उनके अनुसार, ‘मैंने सोचा कि मेरी तो बारी ही नहीं आने वाली। मैंने सोचा कि अब लोग मुझे नोटिस कैसे करेंगे। वहां का ग्राउंड तीन किलोमीटर लंबा था और नेट बीच में लगा था। मैंने भी सबका ध्यान अपनी ओर लाने के लिए ग्राउंड पर भागना शुरू कर दिया।'

- ‘तब जहीर अब्बास की नजर मुझपर पड़ी। उन्होंने सोचा कि ये कौन भाग रहा है दिन के 2 बजे। उन्होंने मुझे बुलाकर पूछा कि क्या करते है ? मैंने कहा कि मैं बहुत तेज फास्ट बॉलर हूं। उन्होंने पूछा- कितना तेज हैं। मैंने कहा यहां जितने भी हैं उनसे तेज हूं।‘ एक मौका दे दीजिए। यहीं से शोएब के क्रिकेट करियर की शुरुआत हुई।

तो मैं खेलता 100 टेस्ट और लेता 400 विकेट

- शोएब के अनुसार, ‘मैं ड्रेसिंग रूम में फादर फिगर को मिस करता था। इमरान भाई होते तो मैं 100 टेस्ट खेलता, 400 विकेट लेता और खेलता भी 1994 ms। मैं साढ़े 21 साल में 1998 में डेब्यू कर सका।'

- ‘मैं चार साल लेट हो गया और चार साल तो फास्ट बॉलर्स के लिए पीक टाइम होता है। हमारे यहां कोई फादर फिगर नहीं था। लोग सोचते थे कि 18 साल का शोएब क्या करेगा।'

- ‘1996 में इतनी मैच फिक्सिंग हो रही थी। मेरे जितने अच्छे जानने वाले थे वो सभी पकड़े गए। उस वक्त मुझे बहुत अजीब लगता था कि मैं किधर आ गया हूं। क्या सोचकर आया था और क्या हो गया है। उस वक्त क्रिकेटर्स का एक-दूसरे पर भरोसा बहुत कम हो गया था।

मेरी गलत इमेज पेश की गई

- शोएब के अनुसार क्रिकेट में उनकी बैड ब्वॉय की इमेज बनाई गई है, रियल लाइफ में वो ऐसे नहीं है। उनके अनुसार, 15 साल के क्रिकेट करियर में उन्होंने सिर्फ 1-2 बार लड़ाई की है। लोग बड़े इनसिक्योर हैं। मैं अपने करियर में बहुत तेजी से आगे बढ़ा।

इंडिया ने बहुत प्यार दिया

- मैं आपको डराया, मारा, लेकिन बहुत मजा आया। मैं सोचता हूं कभी लाइफ में बॉर्डर खुलें।