अमिताभ बच्चन से ज्यादा फीस लेते थे प्राण, ऐसे Interesting हैं Life के फैक्ट्स
70s में राजेश खन्ना और 50s-60s में दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर और राजेंद्र कुमार को प्राण से ज्यादा फीस मिलती थी।
12 जुलाई 2013 को 93 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए प्राण ने बॉलीवुड में 350 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया था। इस दौरान उन्होंने हीरो से विलेन तक किरदार निभाए। लेकिन उनकी लाइफ के कई ऐसे फैक्ट्स हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोग आज भी नहीं जानते। मसलन, उनके नाम को ही ले लीजिए। प्राण का पूरा नाम प्राण कृष्ण सिकंद था। पिता की नौकरी के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से हुई प्राण की पढ़ाई...
- प्राण के पिता सरकारी सिविल कॉन्ट्रैक्टर थे, इसलिए उनकी पढ़ाई भारत के अलग-अलग हिस्सों में हुई। इनमें खास हैं कपूरथला (पंजाब), उन्नाव, मेरठ, रामपुर (उत्तर प्रदेश) और देहरादून (उत्तराखंड)।
- इसके बाद प्राण की इच्छा फोटोग्राफर बनने की हुई और उन्होंने दिल्ली की दास एंड कंपनी में काम सीखना भी शुरू कर दिया था।
- बतौर फोटोग्राफर जब प्राण ने पहली जॉब की तो उनकी सैलरी 200 रुपए प्रति महीना थी। लेकिन उन्होंने यह नौकरी छोड़ सिर्फ 50 रुपए में फिल्म 'यमला जट'(1940) की।
मुंबई आने से पहले कर चुके थे 22 फिल्में
- 1942 से 1947 के बीच प्राण लाहौर में थे और इस दौरान उन्होंने करीब 22 फिल्मों में काम किया। लेकिन बंटवारे के कारण उनके करियर पर रोक लग गई थी।
- प्राण बड़े शर्मीले थे। शौकत हुसैन की फिल्म 'खानदान' (1942) में वे नूरजहां के हीरो बनकर आए। यह फिल्म सुपरहिट हुई, लेकिन प्राण को रोमांटिक हीरो बनना पसंद नहीं आया। वे कहते थे कि पेड़ों के पीछे चक्कर लगाना अपने को जमता नहीं था। इसके बाद कभी उन्होंने बतौर हीरो काम नहीं किया।
12 जुलाई 2013 को 93 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए प्राण ने बॉलीवुड में 350 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया था। इस दौरान उन्होंने हीरो से विलेन तक किरदार निभाए। लेकिन उनकी लाइफ के कई ऐसे फैक्ट्स हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोग आज भी नहीं जानते। मसलन, उनके नाम को ही ले लीजिए। प्राण का पूरा नाम प्राण कृष्ण सिकंद था। पिता की नौकरी के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से हुई प्राण की पढ़ाई...
- प्राण के पिता सरकारी सिविल कॉन्ट्रैक्टर थे, इसलिए उनकी पढ़ाई भारत के अलग-अलग हिस्सों में हुई। इनमें खास हैं कपूरथला (पंजाब), उन्नाव, मेरठ, रामपुर (उत्तर प्रदेश) और देहरादून (उत्तराखंड)।
- इसके बाद प्राण की इच्छा फोटोग्राफर बनने की हुई और उन्होंने दिल्ली की दास एंड कंपनी में काम सीखना भी शुरू कर दिया था।
- बतौर फोटोग्राफर जब प्राण ने पहली जॉब की तो उनकी सैलरी 200 रुपए प्रति महीना थी। लेकिन उन्होंने यह नौकरी छोड़ सिर्फ 50 रुपए में फिल्म 'यमला जट'(1940) की।
मुंबई आने से पहले कर चुके थे 22 फिल्में
- 1942 से 1947 के बीच प्राण लाहौर में थे और इस दौरान उन्होंने करीब 22 फिल्मों में काम किया। लेकिन बंटवारे के कारण उनके करियर पर रोक लग गई थी।
- प्राण बड़े शर्मीले थे। शौकत हुसैन की फिल्म 'खानदान' (1942) में वे नूरजहां के हीरो बनकर आए। यह फिल्म सुपरहिट हुई, लेकिन प्राण को रोमांटिक हीरो बनना पसंद नहीं आया। वे कहते थे कि पेड़ों के पीछे चक्कर लगाना अपने को जमता नहीं था। इसके बाद कभी उन्होंने बतौर हीरो काम नहीं किया।


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