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याददाश्त खो चुकी थीं 'आशिकी गर्ल', अब झुग्गियों में जाकर सिखा रही योगा


अप्रैल में हुई महेश भट्ट के प्रोडक्शन हाउस विशेष फिल्म्स की 30वी एनिवर्सरी की पार्टी में आशिकी फेम अनु अग्रवाल आखिरी बार देखा गया था। 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' ने अनु को रातोंरात स्टार बना दिया था। इस फिल्म में बाद वो कई और फिल्मों में दिखीं लेकिन उन्हें 'आशिकी' जैसी पॉपुलैरिटी नहीं मिली। अब ग्लैमर वर्ल्ड से दूर अनु झुग्गी-झोपड़ी में जाकर बच्चों गरीब बच्चों को फ्री योगा सिखाती हैं। जिसकी फोटोज वो अक्सर अपने सोशल हैंडल पर शेयर करती हैं।29 दिन कोमा में रहीं अनु...

- 1996 के बाद फिल्मी दुनिया के गायब हो गईं अनु ने योगा और अध्यात्म की तरफ रुख कर लिया था।
- इसी बीच 1999 में हुए एक रोड एक्सीडेंट ने अनु की लाइफ बदल दी। इस हादसे ने न सिर्फ उनकी याददाश्त को चली गई थी, बल्कि वो पैरालाइज्ड हो गई थीं।
- लगभग 29 दिनों तक कोमा में रहने के बाद जब अनु होश में आईं, तो वह खुद को पूरी तरह से भूल चुकी थी।
- याद्दशात खो चुकीं अनु के लिए ये उनका पुर्नजन्म ही था कि लगभग 3 साल तक चले लंबे ट्रीटमेंट के बाद उनकी याददाश्त वापस आ गई।
- अनु अपनी कहानी को आत्‍मकथा 'अनयूजवल: मेमोइर ऑफ ए गर्ल हू केम बैक फ्रॉम डेड' में समेटा है।
21 साल की उम्र में मिला ब्रेक
- 11 जनवरी 1969 को दिल्ली में जन्मी अनु अग्रवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र की पढ़ाई की है।
- पढ़ाई के दौरान ही अनु को महेश भट्ट ने अपनी फिल्म ‘आशिकी’ में पहला ब्रेक दिया था।
- महज 21 साल की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली अनु ने इस फिल्म से ऑडियंस में खूब वाहवाही बटोरी और वो रातोंरात स्टार बन गईं।
- बाद में वो ‘गजब तमाशा’, ‘खलनायिका’, ‘किंग अंकल’, ‘कन्यादान’, ‘बीपीएल ओए’ और ‘रिटर्न टू ज्वेल थीफ’ जैसी फिल्मों में दिखीं लेकिन कोई भी फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी।
- बता दें, अनु तमिल फिल्म ‘थिरुदा-थिरुदा’ और शॉर्ट फिल्म ‘द क्लाऊड डोर’ में भी काम किया है। साथ ही वो कुछ दिन एम टीवी वीजे भी रही हैं।