Header Ads

लड़की बोली- ये बच्चा इस हैवान के रेप की निशानी था, इसलिए दफना दिया


3 जुलाई को श्मशान में मिट्टी के नीचे दबे मिले नवजात की मां एक नाबलिग है, जिसने मजबूरी में अपने बेटे को यहां दफनाया था।

तीन जुलाई को श्मशान में मिले बच्चे की मां की पहचान हो गई है। पुलिस को दिए बयान नाबालिग लड़की ने उसके साथ हुए रेप और बच्चे के जन्म की पूरी कहानी सुना दी। लड़की ने कहा कि श्मशान घाट में मुर्दे ले जाए जाते हैं, लेकिन मैं वो अभागी मां हूं जिसे अपने कलेजे के टुकड़े को जिंदा यहां दफनाने ले जाना पड़ा। क्योंकि...ये बेटा उस हैवान के दुष्कर्म की निशानी था, जिसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर देनी चाही।

पुलिस को दिए बयान में उसने कबूला है कि हां...घुसगांव के चिमनियापुरा मोहल्ले में जो श्मशान घाट है उसके गड्ढे से 3 जुलाई को मिला बेटा मेरा ही था। अब मेरी शादी हो गई है। बेटे को बचाने के लिए पति से कहा कि वो उसे अपना ले, लेकिन पति का जवाब था- तू नाजायज बेटे को रख ले या मेरे साथ रह जा। इसके बाद मैं बच्चे को चिमनियापुरा के श्मशान में गड्ढे में डाल ऊपर से पत्थर रख आई। ये आपबीती है बड़वानी के जुलवानिया की रहने वाली एक अभागी दुष्कर्म पीड़िता मां की।

- उसने बताया पिछले साल का कोई दिन था तारीख याद नहीं जब राकेश ने मेरे साथ जर्बदस्ती की। मैं 8वीं में पढ़ती थी। उम्र भी 16 साल थी। मेरा सपना और पढ़ाई करने का था, लेकिन सारे सपने उस एक घटना के बाद टूट गए। मैंने शर्म के मारे घटना का जिक्र किसी से नहीं किया। पर कुछ ही दिनों में मेरी तबीयत बिगड़ी तो घरवालों को हकीकत पता चल गई। उन्होंने पास के गांव के एक युवक से मेरी शादी कर दी। उसे भी कुछ दिनों बाद हकीकत पता चल गई।

- पिछले महीने 24 जून को महाराष्ट्र के सिरपुर में बेटे को जन्म दिया। मैंने पति से बेटे को बचाने और अपनाने का आग्रह किया, लेकिन उसने साफ इनकार कर दिया। मेरे पास और कोई चारा नहीं बचा। मैं गांव आई और यहां से बच्चे को लेकर चिमनियापुरा श्मशान पहुंची। खुद गड्ढा खोदा और बच्चे को उसमें रखकर एक बड़ा सा पत्थर रख दिया।
पिता का पता चलने के बाद भी बेटा लावारिस

- बेटा जिला अस्पताल में भर्ती है। बच्चों के आईसीयू के प्रभारी डॉ जेपी नागौर ने बताया बच्चे में खून की कमी है। ब्लड चढ़ाया है। बुखार अब नहीं है। वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जिंदगी के मोर्चे पर बच्चे ने जंग करीब जीत ली है लेकिन सामाजिक मोर्चे पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। दुष्कर्म का आरोपी यानी पिता राकेश कह रहा है कि मुझे पता होता कि युवती गर्भ से हो गई है तो मैं उसी से शादी करता। अब तो मेरी भी शादी हो चुकी है और मेरी पत्नी बेटे को कभी नहीं अपनाएगी। फिलहाल पुलिस ने राकेश को गिरफ्तार कर लिया है। रिकार्ड के अनुसार आरोपी नाबालिग है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार वह बालिग है।

- बच्चे की सांसें उखड़ जाती तो शायद कभी दुष्कर्म का सच सामने नहीं आता गड्ढे में पड़े और रोते बच्चे को करीब 10 घंटे हो गए थे। सुबह गड्ढे में डाला गया था और उसकी रोने की आवाज सुन शाम को निकाला गया। उसके शरीर पर कीड़ों के काटने से जख्म था। इंफेक्शन फैल रहा था। तेज बुखार था, लेकिन बच्चा फिर भी जिंदा था। अब वह बड़वानी जिला अस्पताल में है। बच्चे की हालत देख एसपी प्रशांत खरे का कलेजा कांप गया। उन्होंने जांच में एक टीम लगाई। चौकी प्रभारी शंकरसिंह रघुवंशी और एसआई हीरूसिंह रावत ने एक-एक घर में दस्तक देकर बयान दर्ज किए और सच सामने आ गया।
ये है पूरा मामला...

- 3 जुलाई को श्मशान घाट के पास मिट्टी में एक नवजात शिशु दबा था। उसके रोने की आवाज सुन बच्चों ने एक दंपति को इसकी सूचना दी। शेरू और सुनीता जब वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि रोने की आवाज मिट्‌टी के नीचे से आ रही है। उन्होंने मिट्‌टी हटाया तो एक तरफ भारी पत्थर रखा हुआ था। पत्थर हटाकर करीब एक फीट खोदने पर एक नवजात शिशु दिखा। नवजात के मुंह में मिट्‌टी और कंकड़ भरा हुआ था। उसके चेहरे पर चींटी या किसी कीड़े के काटने के निशान थे। घर लाकर उन्होंने उसे साफ किया और फिर पुलिस को सूचना दी। ओझर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बड़वानी रेफर कर दिया।-
बच्चे को गोद लेने पहुंचे अस्पताल...

- बच्चा मिलने की जानकारी मिलने पर कई लोग अस्पताल पहुंचे और बच्चे को गोद लेने के लिए मिन्नतें करने लगे। गांव के कुछ लोगों ने नवजात को शेरू और सुनीता को गोद देने की मांग की है। इनकी तीन बेटियां हैं। ये भी बच्चे को गोद लेना चाहते हैं।