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150 टन वजनी स्लैब के नीचे दबा था आधा शरीर, मरते देख रही थी बेबस भीड़


सासाराम फ्लाईओवर हादसे में पुल के ढांचे के नीचे दबे दो मजदूरों में से एक नालसेन की मौत मौके पर हो गई। लेकिन दूसरा मजदूर शैजुल के कमर के नीचे का पूरा हिस्सा ढांचे में दबे होने के बावजूद निकलने का लगातार कोशिश करता रहा। मौत और जिंदगी के बीच लड़ते शैजुल की मौत आखिरकार डेढ़ घंटे के बाद हो गई। नीचे खड़ी दो हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ बेबस आंखों से मौत का तमाशा देखती रही।

लोगों के मुताबिक, वे हेल्प के लिए प्रशासन और निर्माण कंपनी के अधिकारियों से कहते रहे। परंतु डेढ़ सौ टन से ज्यादा वजन के ढांचे के आगे किसी की नहीं चली।
- बारी-बारी से लाए गए हाइड्रा, जेसीबी और क्रेन समेत कई मशीनरियां भी नाकामयाब हो गईं। शाम साढ़े पांच बजे लाशों को बाहर निकाला गया।

कंपनी के ऑफिस में ताला बंद कर भाग गए कर्मी
- पुल के ढांचे के नीचे छटपटा रहे शैजुल को बचाने के लिए स्थानीय गौरक्षणी मुहल्ला के सैकड़ों लोग निर्माण कंपनी चड्ढा एंड चड्ढा के ऑफिस तक पहुंचे।
- यहां पहुंचने के बाद वहां ताला बंद देख लोग निराश होकर फिर घटनास्थल पर आ गए।
- गजराढ़ निवासी भाजपा नेता श्यामजी ओझा ने बताया कि जब लोग सहायता के लिए निर्माण स्थल के पास बने कंपनी के कार्यालय में गए तो उससे पहले ही वहां के कर्मी तालाबंद कर भाग निकले थे।
- दो तीन बड़ी मशीनरियों के चालक भी भाग गए थे, जिनकी सहायता से मशीनरियों को चालू कर ढांचे को खिसकाया जा सकता था।

चार दिन पहले भी बिगड़ गई थी हाइड्रा मशीन
- सासाराम फ्लाईओवर के निर्माण कार्य में लगी चड्ढा एंड चढ्ढा की मशीन चार दिन पहले भी इसी ढांचे को चढ़ाते वक्त अचानक बंद हो गई थी। तब चालक ने किसी तरह स्टार्ट किया था।
- मजदूर जहिद्दुल ने बताया कि उस वक्त मौके पर मौजूद कंपनी कर्मियों से हाइड्रा मशीन को दुरूस्त करने या दूसरी मशीन मंगाने की बात कही गई थी।
- जिस पर कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की। पुरानी मशीन काम करती रही। अंतत: दो मजदूरों की जान चली गई।
डीआरएम-डीएम बोले : कंपनी की लापरवाही है, कार्रवाई होगी

- मौके पर पहुंचे डीआरएम किशोर कुमार और रोहतास डीएम अनिमेष पराशर ने बताया कि इस घटना में पूरी तरह कंपनी की लापरवाही सामने आई है। जिसकी जांच कराई जा रही है।
- जांच में मिले प्रमाणों के आधार पर कंपनी के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने कहा कि पुरानी मशीनें और कमजोर उपकरणों के सहारे काम कराए जाने की शिकायत मिली है, जिस पर जांच चल रही है।
2016 में ही पूरा कर देना था निर्माण कार्य

- 2012 के अंत में चड्ढा एंड चड्ढा कंपनी द्वारा बनाए जा रहे फ्लाई ओवर के कार्य को पूरा करने का अंतिम समय रेलवे ने 2016 दिसंबर तक दिया था।
- सासाराम रेल प्रबंधक उमेश कुमार ने बताया कि बीच में कुछ जमीन विवाद आने के कारण कार्य रूका पड़ा था। परंतु जिस सेक्शन में घटना घटी है। वहां कोई विवाद नहीं था। काम पहले ही पूरा कर लिया जाना था।